अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के पुनर्जन्म की अदभुत कहानी : कर्म-चक्र का नियम

भारत सहित विश्व की कई सभ्यताओं में पुनर्जन्म (Reincarnation) की मान्यता है. पुनर्जन्म के पीछे कर्म-चक्र का नियम कारण माना जाता है. मतलब आपके द्वारा किये गए जिन अच्छे या बुरे कर्मों का फल किसी कारणवश आपको इस जन्म में नहीं मिल पाता है, तो उन कर्मों का शुभ-अशुभ फल आपके अगले जन्म में मिलता है.

अमेरिका के पहले राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन (Abraham Linclon) की कहनियाँ हम सबने पढ़ीं हैं कि कितनी कठिनाइयों का सामना करने के बाद अब्राहम लिंकन अमेरिका के राष्ट्रपति बने और राष्ट्रपति बनने के बाद भी उनका कार्यकाल बेहद संघर्षपूर्ण रहा.

उनके प्रयासों से संयुक्त राज्य अमेरिका की नींव पड़ी और अश्वेतों के मानवाधिकारों की रक्षा हुई. जब स्थितियां कुछ सामान्य हुई तो अचानक एक दिन अब्राहम लिंकन की मृत्यु एक हत्यारे के हाथों हो गयी. सन 1946 में भारतीय संत श्री परमहंस योगानन्द जी ने अपने एक भाषण के दौरान अब्राहम लिंकन के पुनर्जन्म की कहानी बताई और वास्तविक तथ्यों के साक्ष्य से इस बात को सिद्ध भी किया.

स्वामी श्री परमहंस योगानन्द के इस वक्तव्य की सत्यता विश्व के कई विद्वानों ने जांची-परखी और आश्चर्यजनक रूप से सत्य पाया. इन्टरनेट, YouTube पर इस विषय से सम्बंधित ढेरों लेख और विडियो उपलब्ध हैं. इस लेख में हम अब्राहम लिंकन के पुनर्जन्म (Reincarnation) से जुड़े तथ्यों के बारे में बतायेंगे.

स्वामी परमहंस योगानंद
महान भारतीय योगी श्री योगानन्द परमहंस

पुनर्जन्म की कहानी :

स्वामी श्री परमहंस योगानन्द ने बताया कि अब्राहम लिंकन अपने पूर्व-जन्म में हिमालय में रहने वाले एक योगी थे, जिनकी मृत्यु के पहले अंतिम इच्छा जातीय और नस्लवादी भेदभाव (Racial Discrimination) को खत्म करना था. अपने इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए उनका दूसरा जन्म अब्राहम लिंकन के रूप में हुआ.

अब्राहम लिंकन के रूप में उन्होंने भली प्रकार अपने कर्तव्यों का पालन किया पर असामयिक मृत्यु से उन्हें उनके अच्छे कर्मों का फल मिलना बाकी रह गया. कर्म-चक्र का नियम फिर चला और अब्राहम लिंकन का पुनर्जन्म चार्ल्स लिंडबर्ग के रूप में हुआ.

अब्राहम लिंकन Punarjanm proof and facts
स्रोत: अब्राहम लिंकन का पुनर्जन्म चार्ल्स लिंडबर्ग के रूप में

चार्ल्स लिंडबर्ग कौन थे ?

चार्ल्स लिंडबर्ग (Charles Lindbergh) प्रसिद्ध अमेरिकी पायलट, खोजकर्ता, लेखक, अविष्कारक, मिलिट्री ऑफिसर, पर्यावरणविद और समाजसेवी थे. जब चार्ल्स लिंडबर्ग 25 साल के थे तो कुछ ऐसा हुआ जिससे वह रातों रात गुमनामी के दौर से शोहरत के शिखर पर पहुँच गए.

चार्ल्स लिंडबर्ग ऐसे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने इतिहास में पहली बार अमेरिका से पेरिस की यात्रा नॉन स्टॉप विमान चला कर पूरी की थी. इस यात्रा की कुल दूरी 5800 किलोमीटर की थी जिसे चार्ल्स लिंडबर्ग ने 33 घंटे 30 मिनट में पूरी की. इस ऐतिहासिक अभियान के लिए चार्ल्स लिंडबर्ग को अमेरिकी सेना का शीर्ष मेडल Medal of Honor दिया गया.

जहाँ अब्राहम लिंकन (Abraham Lincoln) को जीवन में कड़े संघर्षों का सामना करना पड़ा, उसके बदले में चार्ल्स लिंडबर्ग बड़ी तेजी और आसानी से सफल और लोकप्रिय हुए. चार्ल्स लिंडबर्ग और अब्राहम लिंकन के जीवन में इतनी समानताएं हैं कि जिन्हें महज संयोग (Coincidence) नहीं कहा जा सकता.

इस समानताओं की  लम्बी लिस्ट है, इसलिए अगर आप कम समय में यह जानना चाहते हैं तो ऊपर दिए गए YouTube video को देखिये. आप जानेंगे कि किस प्रकार चार्ल्स लिंडबर्ग ने उन सभी सुखों और सफलताओं को पाया जिसके अब्राहम लिंकन हकदार थे और कर्म-चक्र नियम से पुनर्जन्म (Reincarnation) में उसकी पूर्ति हुई. आप स्वयं विश्वास करेंगे कि चार्ल्स लिंडबर्ग और अब्राहम लिंकन एक ही आत्मा के दो रूप थे.

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