इलेक्ट्रिक साइकिल

इलेक्ट्रिक साइकिल आजकल भारत के लगभग सभी शहरों की सड़कों पर दिखने लगी है। विदेशों में तो इलेक्ट्रिक साइकिलें खूब बिकती हैं और जैसे-जैसे भारत में लोग इसके फायदे जान रहे हैं, वे भी इलेक्ट्रिक साइकिल बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने की कोशिश कर रहे हैं। भारत में करीब 65% इलेक्ट्रिक साइकिलें Tier 2 & Tier 3 शहरों के लोग खरीद रहे हैं। CRISIL की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2018 से हर साल इलेक्ट्रिक साइकिल की बिक्री और डिमांड 13% की ग्रोथ से बढ़ रही है। अगर आप भी अपने लिए एक इलेक्ट्रिक साइकिल खरीदना चाहते हैं तो आप सही जगह आए हैं। हम आपको इलेक्ट्रिक साइकिल के बारे में पूरी जानकारी और कुछ ज्यादातर पूछे जाने वाले सवालों के जवाब भी बतायेंगे। 

Electric Cycle क्या है | What is Electric Bicycle in hindi

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इलेक्ट्रिक साइकिल किसी सामान्य साइकिल जैसी ही होती है लेकिन इसमें बैटरी से चलने वाली मोटर लगी होती है, जिससे पैडल चलाते समय कम मेहनत लगती है। अगर आप मोटर सपोर्ट नहीं चाहते तो भी इसे एक सामान्य साइकिल जैसे चलाया जा सकता है। इलेक्ट्रिक साइकिल को E-Bike या E-Cycle भी कहा जाता है। इलेक्ट्रिक साइकिल चलाने का अनुभव एक हल्की ढलान वाली सड़क पर सामान्य साइकिल चलाने जैसा होता है, यानि आप पैडल चलाते तो हैं लेकिन कम ताकत (less effort) से ही साइकिल चलती जाती है। इलेक्ट्रिक साइकिल में Pedal Assist फीचर का यही मतलब होता है। 

हालांकि बाजार में खरीदने के लिए ऐसी इलेक्ट्रिक साइकिल भी मौजूद हैं जोकि बिना पैडल चलाए, सिर्फ बैटरी पॉवर से भी चलती है। यानि जब मन चाहे पैडल चलाए, नहीं तो बस ऐक्सेलरेटर घुमा कर आगे बढ़ गए। वैसे इलेक्ट्रिक साइकिल का मुख्य उद्देश्य साइकिल चलाने वाले की मेहनत को कम करना होता है, न कि इसे पूरी तरह से मोटरसाइकिल जैसा बना देना, जिसे चलाने में इंसानी शक्ति की जरूरत नहीं होती। 

इलेक्ट्रिक साइकिल के फायदे | Electric Bicycle benefits in hindi

1) सबसे मुख्य फायदा (Environment Conservation) – इलेक्ट्रिक साइकिल खरीदकर आप पर्यावरण में फालतू का प्रदूषण फैलाने से बचेंगे। अगर आप शहर में लगभग 10-60 किलोमीटर के अंदर ट्रैवल करते हैं या आपको अक्सर घर के छोटे-मोटे काम के लिए मार्केट जाना पड़ता हो यानि 200-300 मीटर से लेकर 2-3 किलोमीटर दूर तक जाना है, तो इतनी दूरी आप अपने बाइक/स्कूटी से जायेंगे। इन सबके लिए आप जो तेल जलाते हैं, इलेक्ट्रिक साइकिल खरीदकर आप उसे कम कर सकते हैं। 

2) पैसे की बचत (Cost Efficient) – आजकल पेट्रोल/डीजल के दाम कुछ-कुछ दिनों में बढ़ते ही जा रहे हैं। एक पेट्रोल बाइक की तुलना में एक इलेक्ट्रिक साइकिल की बैटरी चार्ज करने का खर्च करीब 1/20 तक कम हो सकता है यानि अगर साल भर में पेट्रोल बाइक पर 100,000 रुपये का खर्च आता है तो इलेक्ट्रिक साइकिल पर करीब 5000 रुपये सालाना बिजली का खर्च आएगा। इसके अलावा बाइक की तुलना में इलेक्ट्रिक साइकिल की मेंटीनेंस का खर्च भी न के बराबर होता है। 

3) साइकिल चलाने का मजा और एक्सरसाइज़ दोनों एक साथ (Fun & Exercise) – साइकिल चलाना मजे की सवारी है लेकिन जब पसीना बहाना पड़े यानि बहुत मेहनत लगे और गर्मी का मौसम भी हो तो हालत खराब हो जाती है। इलेक्ट्रिक साइकिल से ये फायदा है कि मेहनत आधी से भी कम हो जाती है। कहीं चढ़ाई हो तो भी आराम से साइकिल चढ़ जाती है और लंबी दूरी कवर करना भी आसान हो जाता है। इलेक्ट्रिक साइकिल के पैडल चलाने से साथ-साथ कसरत भी हो जाती है। 

4) अधिक उम्र के लोगों के लिए बढ़िया सवारी – उम्रदराज लोगों के लिए इलेक्ट्रिक साइकिल बढ़िया वाहन है। इससे वे घुटनों पर बिना ज्यादा जोर लगाये, आराम से साइकिलिंग कर सकते हैं। इसका वजन बाइक/स्कूटी की तुलना में काफी कम होने की वजह से संभालना भी आसान है। बुजुर्गों के लिए इलेक्ट्रिक साइकिल सैर के साथ-साथ हल्की एक्सरसाइज़ करने का भी साधन है। बड़े-बूढ़ों के अलावा कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हे किसी चोट, कमजोरी या विकलांगता (Physically handicapped) की वजह से सामान्य साइकिल चलाने में दिक्कत होती है, ऐसे लोगों के लिए भी इलेक्ट्रिक साइकिल अच्छा समाधान है। 

5) लाइसेन्स या रजिस्ट्रेशन का झंझट नहीं (No Licence or Registration Certificate Needed) – भारत की सरकारी संस्था Automotive Research Association of India (ARAI) के अनुसार 25 Km/Hr की स्पीड तक चलने वाली गाड़ियों में लाइसेन्स और RC की जरूरत नहीं होती है। लगभग 90% इलेक्ट्रिक साइकिल इस स्पीड लिमिट का पालन करती हैं, इसलिए आपको इनको चलाने के लिए किसी पेपरवर्क की जरूरत नहीं होती है। 

इलेक्ट्रिक साइकिल क्यों खरीदें | Why buy an Electric Bicycle in hindi

वैसे तो हमने अभी आपको इलेक्ट्रिक साइकिल के फायदे बताए लेकिन फिर भी कुछ ऐसी छोटी-छोटी बातें हैं जो आपको इलेक्ट्रिक साइकिल खरीदने का निर्णय लेने में मदद करेंगी –

1) आपको साइकिल चलाना तो पसंद है लेकिन मेहनत सोचकर आलस आता है कि बहुत थकान हो जाएगी। 

2) आप कोई इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदना चाहते हैं लेकिन बहुत ज्यादा पैसा नहीं खर्च करना चाहते। 

3) बच्चों को बाइक/स्कूटी चलाने के लिए नहीं देना चाहते पर वो नॉर्मल साइकिल भी नहीं चलाना चाहते। 

4) अगर साथ में कुछ सामान/वजन है तो भी मोटर सपोर्ट की वजह से पैडल चलाना बहुत आसान हो जाएगा। 

5) कोई पुल, ओवरब्रिज, चढ़ाई बिना पैडल पर ज्यादा जोर लगाये साइकिल पार कर जाएगी। 

6) पेट्रोल पंप का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। 

7) आपकी जरूरत, बजट, पावर, रेंज के हिसाब से ढेरों मॉडल मौजूद हैं।

8) Eco-friendly होती है और आप Nature की मदद कर सकेंगे। 

9) इलेक्ट्रिक साइकिल चलाना सीखना बहुत आसान है। 

10) इलेक्ट्रिक साइकिल एक बाइक की तुलना में कम जगह लेती है तो आप इसे अपने कमरे, घर के अंदर रख सकते हैं। 

11) एक सामान्य साइकिल की औसत स्पीड 10-12 Km/Hr होती है, जबकि इलेक्ट्रिक साइकिल की औसत स्पीड 20 Km/Hr होती है। यानि ये इतनी स्लो नहीं है, जितना आपको लगता होगा। 

12) सिर्फ शरीर ही नहीं दिमाग के लिए भी साइकिलिंग एक बढ़िया कसरत है जिससे स्ट्रेस, टेंशन दूर होता है और मूड सही रहता है। 

13) पार्किंग आसान है और ट्रैफिक में फँसने का झंझट भी नहीं। 

14) बाइक तो एक जगह से दूसरी जगह जाने का साधन है लेकिन घूमने/सैर का मजा साइकिल से ही आता है, जहां भी मन चाहा रुक गए, 2 मिनट देखा-सुना फिर आगे बढ़ गए। इलेक्ट्रिक साइकिल से आप लंबी दूरी का चक्कर कम मेहनत में लगा पाएंगे। 

इलेक्ट्रिक साइकिल के प्रकार | Types of Electric Bicycle in hindi

Making के अनुसार इलेक्ट्रिक साइकिलें 2 प्रकार की होती हैं। 

1) Pedal Assit – इन इलेक्ट्रिक साइकिल में पैडल चलाने पर ही मोटर सपोर्ट मिलता है, पैडल चलाना रोक देंगे तो मोटर सपोर्ट भी रुक जाएगा। इन साइकिल में लगा सेन्सर यह पता लगा लेता है कि आप पैडल चला रहे हैं या नहीं। जब आप पैडल चलाना रोक देंगे तो मोटर Cut-off हो जाती है।

2) With Throttle – ये इलेक्ट्रिक साइकिलें तो एक तरह की कम पावर वाली इलेक्ट्रिक स्कूटी/बाइक जैसी हैं यानि इसमें पैडल के साथ-साथ थ्राटल (ऐक्सेलरेटर) भी दिया गया होता है। आप इसे नॉर्मल साइकिल जैसे चलाएं या जब चाहें थ्राटल घुमाकर बाइक जैसे चलाने लगें। 

वैसे आजकल बहुत सी ऐसी इलेक्ट्रिक साइकिलें आने लगी हैं, जिसमें Pedal Assist + Throttle दोनों ही फीचर दिए गए होते हैं। इसका ये फायदा है कि अगर इलेक्ट्रिक साइकिल को साइकिल जैसे चलाओ तो भी मजे से चलेगी, नहीं तो बाइक जैसे भी चला सकते हैं।

बाजार मे आपकी जरूरत / पॉवर के हिसाब से ढेरों इलेक्ट्रिक साइकिल मिल रही हैं, जिसे मुख्यतः 3 केटेगरी में रखा जाता है। 

1) Recreation – छोटी दूरी जाने या कभी-कभार मौज-मस्ती में घूमने के लिए इलेक्ट्रिक साइकिल 

2) Transportation – रोजाना ऑफिस, स्कूल आने-जाने के लिए इलेक्ट्रिक साइकिल 

3) Niche – यानि पहाड़ी रास्तों या लंबी दूरी चलाने के लिए इलेक्ट्रिक साइकिल 

1) Recreation Electric Bicycles –

कई लोग इलेक्ट्रिक साइकिल को रोजमर्रा के जरूरत की चीजें, सब्जी आदि खरीदने के लिए या वीकेंड पर घूमने-चलाने के लिए लेना चाहते हैं, क्योंकि इन कामों के लिए उन्हे बार-बार बाइक/स्कूटी निकालनी पड़ती है। यानि ये कह सकते हैं कि उनकी ज्यादातर जरूरत 5-10 किलोमीटर दूरी के क्षेत्र में ही होती है। इस प्रकार की इलेक्ट्रिक साइकिल सस्ती होती हैं और उनकी रेंज, पावर भी ठीक-ठाक होती है। 

आइए जाने इस केटेगरी में किस टाइप के इलेक्ट्रिक साइकिल मॉडल होते हैं। 

A) Fat Tyre Electric Bicycle – 4 से 6 इंच मोटे टायर वाली इलेक्ट्रिक साइकिलें गड्ढों व ऊबड़-खाबड़ सड़कों पर झटके नहीं लगने देती। फैट टायर इलेक्ट्रिक साइकिल में अच्छा कम्फर्ट मिलता है और ये ऑफरोडिंग में भी चलाई जा सकती है।   

B) Cruiser Electric Bicycle – इस टाइप की इलेक्ट्रिक साइकिल के हैन्डल ऐसे होते हैं, जिन्हे झुककर पड़ने की जरूरत नहीं होती। आप आराम से सीधे बैठकर साइकिल चला सकते हैं। इसकी सीट भी आरामदायक होती हैं। इसके पहिये बड़े होते हैं, जिससे रोड पर अच्छी पकड़ और स्थिरता (stability) मिलती है। आस-पड़ोस में, सैर (Neighborhood) में चलाने के लिए क्रूज़र इलेक्ट्रिक साइकिल बढ़िया होती हैं। 

C) Folding Electric Bicycle – आजकल फोल्डिंग इलेक्ट्रिक साइकिल भी बहुत आ गई हैं, जिनके फ्रेम को बीच से (Fold) मोड़कर साइकिल की लंबाई लगभग आधी की जा सकती है। इसका फायदा यह है कि ये रखने में जगह कम लेती हैं और इसे लिफ्ट में रखकर भी ऊपर-नीचे ले जा सकते है। इस बात का ध्यान दें कि फोल्ड करने से इनकी लंबाई तो कम हो जाती हैं लेकिन चौड़ाई कुछ बढ़ जाती है। फोल्डिंग फीचर की वजह से इसकी पावर और रेंज दोनों बहुत ज्यादा नहीं होती हैं। 

2) Transportation Electric Bicycles –

अगर आप रोजाना कम से कम 10-50 किलोमीटर तक ऑफिस, स्कूल/कोचिंग आने-जाने के लिए इलेक्ट्रिक साइकिल खरीदना चाहते हैं तो देखें क्या ऑप्शन हैं। इस टाइप की इलेक्ट्रिक साइकिलों की कीमत रेंज और पावर के अनुसार कम-ज्यादा हो सकती है। 

A) City Electric Bicycle – शहर की सड़कों और ट्रैफिक में रोजाना चलाने के लिए ये इलेक्ट्रिक साइकिल सही होती हैं। इसमें सामान/बैग रखने के लिए रैक भी लगा होता है। इसके पहिये सामान्य साइकिल जितने चौड़े होते हैं, जिससे अच्छी रेंज मिलती है। काम और मजे दोनों के लिए सिटी इलेक्ट्रिक साइकिल ठीक रहती हैं। 

B) Commuter Electric Bicycle – कम्यूटर इलेक्ट्रिक साइकिल भी क्रूज़र ई-साइकिल जैसी ही डिजाइन और सुविधाजनक फीचर्स की वजह से आरामदायक राइडिंग अनुभव देती हैं। लेकिन कम्फर्ट और सुविधाओं की वजह से इसका दाम सिटी इलेक्ट्रिक साइकिल से ज्यादा होता है। 

C) Motorbike Type Electric Bicycle – आपने देखा होगा कि कुछ इलेक्ट्रिक साइकिल देखने में एकदम छोटी और मोपेड जैसी लगती हैं। ये बाइक बड़ी बैटरी, मोटे टायर की वजह से वजन में भारी होती हैं। ये लंबे लोगों के लिए बहुत आरामदायक नहीं होती और बैटरी खत्म हो जाने पर इन्हे साइकिल जैसे चलाना भी थकाऊ होता है। 

D) Cargo Electric Bicycle – अगर आपको ज्यादा सामान ले जाना है या कुछ वजन ढोना है तो इस टाइप की इलेक्ट्रिक साइकिल लेना चाहिए। इसकी बैटरी भी ज्यादा पावरफुल होती हैं, जिससे कि लोड ले सके। इसमें आगे या पीछे और साइड में दोनों तरफ समान रखने के रैक लगवाए जा सकते हैं। अगर पीछे कैरियर पर बच्चों को बिठाना है तो भी ये सही रहती हैं। कार्गो इलेक्ट्रिक साइकिल की बॉडी भी काफी मजबूत बनाई जाती हैं और बड़ी बैटरी भी लगी होती हैं,  इसलिए ये कुछ भारी हो सकती हैं। 

3) Niche Electric Bicycles –

इस केटेगरी में ऐसी इलेक्ट्रिक साइकिलें आती हैं, जोकि कुछ विशेष उद्देश्यों के लिए होती हैं और इसके ग्राहक भी कम ही होते हैं। ये इलेक्ट्रिक साइकिलें कई स्पेशल फीचर्स से लैस होती हैं और दाम में भी महंगी होती हैं। इनका उपयोग पहाड़ी रास्तों पर चलाने के लिए या लंबी दूरी (60-100 Km) की साइकिलिंग के लिए होता है।

A) Mountain E-Cycles – कुछ शौकीन लोग पहाड़ों और Rough Terrain पर चलाने के लिए इलेक्ट्रिक साइकिल चाहते हैं, उनके लिए माउंटेन ई-साइकल्स बेस्ट हैं। इनका दाम महंगा होता हैं क्योंकि ये हाई परफॉरमेंस मैकेनिज़्म, गियर्स और बेहतरीन सस्पेन्शन सिस्टम के साथ आती हैं । 

B) Road E-Bikes – प्रोफेशनल साइकलिस्ट जिन्हे लंबी दूरी और हाई स्पीड परफॉरमेंस के लिए इलेक्ट्रिक साइकिल चाहिए, रोड ई-बाइक्स सही ऑप्शन होती हैं। इन साइकिल की बॉडी हल्की पर मजबूत, आरामदायक और Aerodynamic होती हैं। 

C) Trike Electric Bicycles – 3 पहिये वाली इलेक्ट्रिक साइकिल को ट्राइक इलेक्ट्रिक साइकिल कहा जाता है। इसमें समान ढोने के लिए एक बड़ी बास्केट या छोटी ट्राली जुड़ी होती है। 3 पहिये की वजह से स्थिरता (Stability) अच्छी होती है।

बेस्ट इलेक्ट्रिक साइकिल ब्रांड | Best Electric Cycles Brands in India

हम आपको टॉप 10 भारतीय इलेक्ट्रिक साइकिल ब्रांड के नाम बता रहे हैं। आप अपनी जरूरत, बजट, उपलब्धता, फीचर्स , गारंटी/वारंटी के अनुसार इनमें से किसी भी ब्रांड से इलेक्ट्रिक साइकिल खरीद सकते हैं।

इलेक्ट्रिक साइकिल कैसे चलाते हैं | How to Use or Drive an Electric Bicycle in hindi

किसी इलेक्ट्रिक साइकिल को चलाने का तरीका साइकिल मॉडल के फीचर्स के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। आगे बढ़ने से पहले हम आपको याद दिला दें कि अगर आप इलेक्ट्रिक साइकिल की मोटर ऑन नहीं करते हैं या साइकिल की बैटरी खत्म हो जाए तो भी आप इलेक्ट्रिक साइकिल को नॉर्मल साइकिल जैसे चला सकते हैं। इन साइकिल में मोटर लगे होने से वजह से पैडल चलाने में कोई गतिरोध (Resistance) नहीं होता, लेकिन अगर साइकिल का वजन बहुत भारी है तो मेहनत लग सकती है।  

Pedal Assist इलेक्ट्रिक साइकिल –

इस मॉडल की इलेक्ट्रिक साइकिल चलाने में मोटर पावर और इंसानी शक्ति दोनों को एक साथ प्रयोग करना होता है। इसे शुरू करने के लिए हैन्डल में दिए गए On/Off बटन से स्टार्ट करते हैं, फिर 3 या 4 अलग-अलग स्पीड/पॉवर मोड बटन में से किसी एक को सेलेक्ट कर लेते हैं। बस अब पैडल चलाना शुरू कीजिए, आपको मोटर से मिलने वाला Push पता चलने लगेगा क्योंकि साइकिल काफी कम मेहनत में ही अच्छी स्पीड पकड़ लेगी। 

Electric Only / Throttle इलेक्ट्रिक साइकिल – 

थ्राटल वाली इलेक्ट्रिक साइकिल में पावर ऑन/ऑफ करने के लिए बटन और पेट्रोल बाइक जैसे ही ऐक्सेलरेटर दिया गया होता है, जिससे जब चाहे घुमाकर स्पीड बढ़ाई जा सकती है। इसमें ये फायदा है कि जब चाहें पैडल चलाएं, नहीं तो नॉर्मल बाइक जैसे केवल मोटर पावर से ही आगे बढ़ते जाएं। ये मॉडल भी With Gear/Without Gear में आते हैं। 

अब हम आजकल बाजार में मिलने वाली ज्यादातर इलेक्ट्रिक साइकिल में जो फीचर्स दिए जा रहे हैं, उनके बारे में बताएंगे जिससे कि आप ये देख सकें कि किन फीचर्स की आपको जरूरत है और कौन से आपके काम के नहीं हैं। 

इलेक्ट्रिक साइकिल की बैटरी की जानकारी | Types of Electric Bicycle Battery in hindi

बैटरी के (Types) प्रकार जानने से पहले ये जान लें कि कुछ इलेक्ट्रिक साइकिल में बैटरी, साइकिल की बॉडी फ्रेम में ही फिक्स होती है और कुछ मॉडल में बैटरी को साइकिल से निकालकर अलग किया जा सकता है। अगर बैटरी साइकिल बॉडी के अंदर लगी है तो आप साइकिल जहां रखेंगें, वही पर चार्जिंग वायर लगाकर चार्ज करना होता है। 

अगर आपके साइकिल की बैटरी Detachable है तो आप साइकिल से बैटरी निकालकर घर के अंदर किसी भी प्लग से चार्ज कर सकते हैं। Detachable Battery से यह फायदा है कि अगर आप किसी बिल्डिंग के ऊपरी फ्लोर में रहते हैं और साइकिल की बैटरी नीचे पार्किंग में चार्ज करने की सुविधा नहीं हैं, तो आप साइकिल से बैटरी निकालकर घर ले जाकर चार्ज कर लें।  

इलेक्ट्रिक साइकिल की बैटरी 2 प्रकार की हो सकती है। Types of Battery in  Electric Bicycles in hindi 

1) Lead-Acid Battery or SLA Battery – लेड-ऐसिड बैटरी कीमत में सस्ती होती हैं लेकिन इनका वजन भारी होता है, जिस वजह से साइकिल पर ज्यादा बड़ी बैटरी लगवाना यानि बैटरी अपग्रेड करना संभव नहीं होता है। इनकी लाइफ भी कम होती है। इन बैटरी से हाई रेंज (Mileage) भी नहीं मिलता। 

2) Lithium-Ion Battery or Li-ion Battery – लीथियम ऑयन बैटरी कीमत में महंगी होती हैं लेकिन इनका वजन लेड-ऐसिड बैटरी की तुलना में कम होता है। खास बात ये कि Li-ion बैटरी की लाइफ लेड-ऐसिड बैटरी की तुलना में करीब 10 गुना तक ज्यादा हो सकती है। इसलिए ये बैटरी पैसा-वसूल ऑप्शन है और लंबी रेंज के लिए बेस्ट हैं।  

इलेक्ट्रिक साइकिल के मोटर की जानकारी। Types of Motors in Electric Bicycle in hindi

आजकल लगभग सभी अच्छी इलेक्ट्रिक साइकिलों में नॉर्मल मोटर की बजाय BLDC Motor लगाई जाती है जोकि

  • ज्यादा पॉवर फुल होती है
  • अच्छी स्पीड देती है
  • साइज़ में छोटी होती है
  • कम शोर (less noise) करती है
  • जल्दी खराब नहीं होती
  • इसमें बहुत कम मेंटीनेंस की जरूरत होती है

इलेक्ट्रिक साइकिल में मोटर की Placement  2 प्रकार से हो सकती है।

1) HUB Drive Motor – हब ड्राइव का मतलब है अगले या पिछले पहिये में मोटर लगी होती है। वैसे ज्यादातर इलेक्ट्रिक साइकिल के पिछले पहिये (Rear hub drive) में ही मोटर फिक्स होती है। 

2) Mid Drive Motor – मिड ड्राइव का अर्थ है साइकिल के बीच में पैडल के पास मोटर लगाई जाती है। मिड ड्राइव मोटर की Performance, Torque दोनों ही हब ड्राइव मोटर से ज्यादा होती है। पहाड़ी रास्तों के लिए ऐसी मोटर वाली इलेक्ट्रिक साइकिल लेना सही रहता है। मिड ड्राइव मोटर वाली इलेक्ट्रिक साइकिलों का दाम भी ज्यादा होता है। 

इलेक्ट्रिक साइकिल के वोल्टेज (V) की जानकारी | Voltage of an Electric Cycle in hindi

इलेक्ट्रिक साइकिल का वोल्टेज जितना ज्यादा होगा, साइकिल की मोटर उतना ज्यादा पॉवरफुल होगी यानि हाई स्पीड से आप साइकिल चला सकेंगे। 12V से 72V तक की इलेक्ट्रिक साइकिलें मार्केट में उपलब्ध हैं लेकिन आमतौर पर शहर में चलाने के लिए 24V से 36V की साइकिल काफी होती है। इससे ज्यादा वोल्टेज की साइकिल पहाड़ी रास्तों या ज्यादा लंबी दूरी के लिए ही सही होती हैं। 

इलेक्ट्रिक साइकिल के ऐम्प्स (Amps) की जानकारी | Ampere of an Electric Cycle in hindi 

इलेक्ट्रिक साइकिल की क्षमता और रेंज उसके एम्पियर पर निर्भर करती है। 5A से लेकर 20A तक की साइकिलें नॉर्मल उपयोग के लिए पर्याप्त होती है। हालांकि साइकिल की कपैसिटी और माइलेज तो रोड कन्डिशन, साइकिल चलाने वाले के वजन, साइकिल के वजन, मौसम, हवा बहने की दिशा, साइकिल पर कोई एक्स्ट्रा वजन (बैग या सामान) लादने के ऊपर निर्भर करता है। 

इलेक्ट्रिक साइकिल के वाट (Watt) की जानकारी | Wattage of an Electric Cycle in hindi

इलेक्ट्रिक साइकिल की असली पावर (Actual Power) यानि Watt पता करने का फार्मूला इस प्रकार है। इससे हमें साइकिल की रेंज (Mileage) पता चलती है। 

Density (Watt-Hours) = Voltage (V) X Amp-Hours (Ah)

उदाहरण के तौर पर 36V, 10A की साइकिल 360W की होगी। यानि Ideal Conditions में 100% चार्ज बैटरी साइकिल में लगाकर, थ्राटल से चलाने पर इलेक्ट्रिक साइकिल की रेंज 36 किलोमीटर होगी। इस हिसाब से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आपको कितनी वाट की ई-साइकिल लेनी चाहिए। आमतौर पर शहर में चलाने के लिए 200W-250W की इलेक्ट्रिक साइकिल काफी होती है।

इलेक्ट्रिक साइकिल के ब्रेकिंग सिस्टम की जानकारी। Types of Braking in Electric Bicycle in hindi

इलेक्ट्रिक साइकिल में 3 तरह के ब्रेक सिस्टम की फिटिंग हो सकती है

1) Rim Brake or Caliper Brake – नॉर्मल साइकिल में जो ब्रेक दिखते हैं, उसे रिम ब्रेक या कैलिपर ब्रेक कहते हैं। कम स्पीड वाली इलेक्ट्रिक साइकिल में भी इसका उपयोग किया जाता है या उसके किसी एक पहिये में लगा होता है। इसके ब्रेक शू कुछ महीनों में घिस जाते हैं लेकिन इन्हे बदलवाना, मेन्टेनस सस्ता और आसान है। 

2) Drum Brake – ड्रम ब्रेक साइकिल के पहिये के बीच (centre) में लगे होते हैं। ये जल्दी खराब नहीं होते और कैलिपर ब्रेक से ज्यादा मजबूत और बढ़िया काम करते हैं। कीमत में ये रिम ब्रेक से महंगे पर डिस्क ब्रेक से सस्ते होते हैं। 

3) Disc Brake – डिस्क ब्रेक सबसे ज्यादा पावरफुल ब्रेक्स होते हैं। हाई स्पीड साइकल्स के लिए ये बेस्ट होते हैं। इनकी लाइफ भी बहुत लंबी होती हैं। साइकिल रोकने के लिए ये ब्रेक ज्यादा तेज दबाने की जरूरत भी नहीं होती। डिस्क ब्रेक 2 प्रकार के होते हैं – 1) मैकेनिकल डिस्क ब्रेक 2) हाइड्रोलिक डिस्क ब्रेक 

इलेक्ट्रिक साइकिल के टायर्स की जानकारी | Types of Tyres in Electric Bicycle hindi

आम साइकिलों की तरह ही इलेक्ट्रिक साइकिल में भी पतले टायर, फैट टायर, बड़े या छोटे साइज़ के पहिये लगवाए जा सकते हैं। पतले टायर से अच्छी स्पीड और लंबी रेंज का फायदा मिलता है। मोटे-चौड़े टायर्स रोड के खड्डों के झटके से बचाते हैं, इन्हे रेतीली जमीन, बालू में भी चलाया जा सकता हैं लेकिन इसे लगाने से रेंज कम मिलती है। आजकल साइकिल के लिए तीली वाले पहिये (Spoke Wheel) के अलावा अलॉय पहिये (Alloy Wheel) भी आने लगे हैं। इसी तरह साइकिल की टायर भी ट्यूबलेस (Tubeless) आने लगी है, जिससे पंचर होने का झंझट भी नहीं होता है। 

इलेक्ट्रिक साइकिल के डिस्प्ले की जानकारी | Types of Display in Electric Bicycles

इन साइकिल्स में 3 प्रकार के डिस्प्ले (TFT, LCD, LED) छोटे-बड़े साइज़ में देखने को मिलते हैं। इलेक्ट्रिक साइकिल के डिस्प्ले में Settings, Battery Bar, Cycle Mode, Speed, Power bar, Time, Tripmeter, Range Estimate, GPS, Bluetooth, Light जैसी जानकारियाँ दिखती हैं। स्क्रीन की साइज़ और स्क्रीन बैकलाइट पर यह निर्भर करता है कि शाम या रात के अंधेरे में डिस्प्ले की जानकारी दिखाई देगी या नहीं। आपके साइकिल में कौन सा डिस्प्ले हैं, डिस्प्ले में क्या इनफार्मेशन दिखाई देगी और उसका साइज़ इलेक्ट्रिक साइकिल की कीमत और मॉडल पर डिपेंड करता है।

इलेक्ट्रिक साइकिल के गियर्स की जानकारी | Types of Gears in Electric Cycles in hindi 

अगर आपकी साइकिल में गेयर हैं तो आप लंबी दूरी, ऊंचे-नीचे रास्तों पर गियर चेंज करके पैडल चलाने में लगने वाली ताकत को कम-ज्यादा कर सकते हैं। ज्यादातर इलेक्ट्रिक साइकिल बिना गियर सिस्टम के और Single Speed ऑप्शन में आती हैं, जोकि Direct-drive होती हैं। इलेक्ट्रिक साइकिल में गियर्स की कोई खास जरूरत नहीं पड़ती है लेकिन आप चाहें तो अपने इलेक्ट्रिक साइकिल में बाद में भी Gears फिट करवा सकते हैं। वैसे खरीदने के लिए बहुत सी 7 गियर्स वाली इलेक्ट्रिक साइकिलें भी बाजार में मौजूद हैं। हाई परफॉरमेंस साइकिल, माउंटेन ई-बाइक्स में 7 या इससे ज्यादा गियर सिस्टम लगे होते हैं, ये थोड़ा महंगी भी होती हैं।

इलेक्ट्रिक साइकिल के मोड्स की जानकारी | Types of Modes in Electric Cycle in hindi

इलेक्ट्रिक साइकिल में ज्यादातर 3-5 मोड्स देखने को मिलते है। 

On/off – इस बटन को दबाकर इलेक्ट्रिक साइकिल के मोटर सपोर्ट को चालू या बंद किया जाता है। यह बटन हर मॉडल/बजट वाली इलेक्ट्रिक साइकिल में होता है। यह Off रहने पर इलेक्ट्रिक साइकिल एक नॉर्मल साइकिल जैसी चलेगी।

Pedal-Assist या Pedalec Mode – अगर पैडल असिस्ट वाली इलेक्ट्रिक साइकिल होगी तो 3-4 पावर मोड होंगे। हाई पावर मोड में स्पीड अच्छी मिलेगी लेकिन रेंज कम हो जाएगी जबकि लो पावर मोड में मेहनत थोड़ी ज्यादा होगी पर रेंज ज्यादा हो जाएगी। 

Throttle – थ्राटल मोड वाली साइकिलों में Throttle Mode ऑन करने पर पैडल चलाने की जरूरत नहीं होती और साइकिल केवल बैटरी और मोटर पावर से चलने लगती है। 

Walk Mode – कुछ इलेक्ट्रिक साइकिल में Walk Mode भी होता है। इसे ऑन करने पर साइकिल 6 Km/Hr की स्पीड से चलने लगती है। यह स्पीड लगभग हमारे नॉर्मल चलने-फिरने की स्पीड जितनी होती है। अगर आपके साइकिल के साथ कोई पैदल चल रहा है या आप एकदम धीमी स्पीड में चलते हुए आस-पास के नजारों का आनंद लेना चाहते हैं तो इसके लिए Walk Mode बेस्ट है। 

इलेक्ट्रिक साइकिल के सेंसर्स की जानकारी | Types of Sensors in Electric Bicycle in hindi

इलेक्ट्रिक साइकिल में ज्यादातर 2 प्रकार के सेसर्स लगे हो सकते हैं। किसी इलेक्ट्रिक साइकिल में दोनों में से कोई एक सेंसर या दोनों ही सेंसर्स लगे हो सकते हैं। 

1) Cadence Sensors – कैडेन्स सेन्सर का काम यह पता लगाना होता है कि आप साइकिल के पैडल चला रहे हैं या नहीं। अगर आप पैडल चला रहे हैं तो यह सेंसर फौरन मोटर को भी चालू कर देता है, जिससे आपकी पैडल चलाने की मेहनत बचे। यह साइकिल में Crank के पास लगा होता है। 

2) Torque Sensors – टॉर्क सेन्सर आपके द्वारा पैडल चलाने में लगी मेहनत को (Measure) नापकर उसी हिसाब से मोटर से मिलने वाले सपोर्ट पावर को कम या ज्यादा कर सकते हैं। यानि अगर रास्ते में कहीं चढ़ाई है और आपको पैडल चलाने में जोर लग रहा है तो टॉर्क सेंसर तुरंत मोटर पावर बढ़ा देता है, जिससे आपको जोर नहीं लगाना पड़ेगा। 

जिस इलेक्ट्रिक साइकिल में दोनों प्रकार के सेंसर्स लगे रहते हैं, उसे चलाने का अनुभव बढ़िया, आरामदायक होता है। हालांकि कुछ सस्ती इलेक्ट्रिक साइकिल में केवल कैडेन्स सेंसर लगा होता है, जिसकी वजह से शुरुआत में थोड़ा सा Jerk लगता है। साइकिल सेंसर की जानकारी साइकिल के Brochure, Specifications में दी गई रहती है। 

इलेक्ट्रिक साइकिल के सस्पेन्शन सिस्टम की जानकारी | Electric Cycle Suspension systems in hindi

इंडियन रोड्स की कन्डिशन तो आप जानते ही हैं। साइकिल के पहिये में Shock Absorber यानि सस्पेन्शन लगा है तो खराब रोड, स्पीड ब्रेकर आने पर साइकिल राइडर को तेज झटका नहीं लगता है। ज्यादातर इलेक्ट्रिक साइकिल के अगले या पिछले पहिये में सस्पेन्शन लगा होता है, तो कुछ साइकिल के दोनों ही पहियों में Suspension system फिट होता है। अगर आपकी इलेक्ट्रिक साइकिल के पहिये में शॉक ऐब्सॉर्बर नहीं लग सकता है, तो Spring Seat और Gel Saddle जरूर लगवाएं, ये आपको सड़क के झटकों से काफी आराम देगा।

इलेक्ट्रिक साइकिल की मेन्टेनेंस | Electric Bicycle maintenance in hindi 

इलेक्ट्रिक साइकिल की मेन्टेनेंस, रख-रखाव का कोई स्पेशल तरीका नहीं होता है। जैसे किसी आम साइकिल को नियमित साफ-सफाई, कल-पुर्जों में तेल, चेन में ग्रीज़ या Lube डालते हैं, हवा और ब्रेक चेक करते हैं, उसी तरह से इलेक्ट्रिक साइकिल में भी करना चाहिए। इससे इलेक्ट्रिक साइकिल फिट रहती है और रेंज भी अच्छी मिलती है। 

इलेक्ट्रिक साइकिल की मोटर या बैटरी कभी जल्दी खराब नहीं होती हैं और मेंटीनेंस फ्री होती हैं। अगर कभी बैटरी, मोटर, कंट्रोल सिस्टम में दिक्कत आ ही जाए तो उस ठीक करवाने के लिए आपको इलेक्ट्रिक साइकिल शॉप, डीलर या कंपनी के कस्टमर केयर से बात करनी होगी। 

इलेक्ट्रिक साइकिल कैसे खरीदें और खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें | How to buy Electric Cycle in hindi

गूगल सर्च करके आप ये पता लगा सकते हैं कि आपके शहर में इलेक्ट्रिक साइकिल का शोरूम कहाँ है। इसके अलावा आप ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाईट या इलेक्ट्रिक साइकिल कंपनी की वेबसाईट से भी अपने लिए साइकिल ऑर्डर कर सकते हैं। 

अब हम जानेंगे कि साइकिल शॉप से या ऑनलाइन इलेक्ट्रिक साइकिल खरीदने से पहले हमें किन छोटी-बड़ी बातों का ख्याल रखना चाहिए। इन Points से आपको अपने लिए सही बजट, मॉडल, फीचर की इलेक्ट्रिक साइकिल खरीदने में मदद मिलेगी। 

1) सबसे जरूरी बात ये है कि आपको किसलिए और कितनी दूर (Km) तक चलाने के लिए इलेक्ट्रिक साइकिल चाहिए। ध्यान रहे साइकिल की रेंज और पावर जैसे-जैसे बढ़ती जाती है, उसकी कीमत भी बढ़ती जाती है। आप बहुत पॉवरफुल और महंगी साइकिल खरीद लें पर उसकी आधी पावर जितना भी चला न पायें तो क्या फायदा। 

लंबी दूरी आने-जाने के लिए हाई पावर बैटरी वाली इलेक्ट्रिक साइकिल खरीदें। ज्यादा स्पीड चाहिए या ऊंची-नीची सतहों से गुजरना है तो पॉवरफुल मोटर वाली इलेक्ट्रिक साइकिल खरीदें।

2) अगर बच्चों या बुजुर्गों के लिए इलेक्ट्रिक साइकिल लेना है तो बहुत हेवी वजन वाली साइकिल न लें, जिसे बैटरी खत्म होने पर वो सामान्य साइकिल जैसे न चला पाए या वजन न सम्हाल पाए। अगर आप युवा हैं, स्वस्थ हैं और साइकिल चलाना पसंद है तो बेशक खरीद सकते हैं।  

3) इलेक्ट्रिक साइकिल खरीदने से पहले टेस्ट राइड करना बहुत जरूरी है, फिर चाहें तो आप उसे ऑनलाइन ही खरीद लें। सिर्फ ऑनलाइन देखकर खरीदना है तो पहले अच्छी तरह पता कर लें कि साइकिल में आपकी जरूरत के हिसाब से क्या-क्या बदलाव किये जा सकते हैं। 

4) क्या आपके प्रदेश (State) में इलेक्ट्रिक साइकिल खरीदने पर सरकार की तरफ से सब्सिडी (छूट) मिलती है ? अगर हाँ तो कीमत में छूट और Tax benefits का फायदा लेना न भूलें।

5) साइकिल अधिकतम कितने किलोग्राम की सवारी/लोड ले सकती है ? 

6) इलेक्ट्रिक साइकिल की अधिकतम स्पीड क्या है ?

7) क्या साइकिल में आपके जरूरत के अनुसार सही ब्रेकिंग सिस्टम है ? 

8) साइकिल में कौन सा डिस्प्ले है ? उसमें क्या सेटिंग, जानकारी दिखाई देती है ?

9)  क्या साइकिल में शाम/रात को अंधेरे में चलाने के लिए लाइट लगी है ? क्या साइकिल में शॉक ऐब्सॉर्बर /सस्पेन्शन सिस्टम लगा हुआ है ? अगर नहीं तो क्या लगवाया जा सकता है ?

10) क्या साइकिल में चलाते समय अनावश्यक तेज शोर (noise) तो नहीं होता है ?  

11) क्या इलेक्ट्रिक साइकिल बेचने वाली शॉप साइकिल रिपेयरिंग भी करता है या एक्स्ट्रा पार्टस बेचता है ? अगर नहीं तो रिपेयरिंग कहाँ से कराएं ?

12) साइकिल में हब मोटर है या मिड ड्राइव मोटर है ? साइकिल कितने वाट की है ? हाई वाट की साइकिल हाई स्पीड देगी पर बैटरी जल्दी खत्म करती है। 

13) चाहें दुकान से खरीदें या ऑनलाइन, इलेक्ट्रिक साइकिल की गारंटी / वारंटी क्या है ?और किस-किस पार्ट की कितने दिनों की है, इसे अच्छे से पता कर लें। जैसेकि कुछ इलेक्ट्रिक साइकिल कंपनियां बॉडी की गारंटी तो 5 साल की देती हैं लेकिन मोटर और बैटरी की गारंटी 1-2 साल के लिए ही देती हैं। 

14) कौन सी बैटरी लगी है ? SLA या Li-Ion ? इलेक्ट्रिक साइकिल की बैटरी फुल चार्ज होने में कितना टाइम लेती है ? कितने साल में बैटरी चेंज करवाना होगा ? अगर इलेक्ट्रिक साइकिल की बैटरी को अपग्रेड करना चाहें तो क्या ये पॉसिबल है ?  बैटरी फिक्सड है या डिटैचेबल है ? मतलब साइकिल में वायर लगाकर चार्ज करना होगा या बैटरी अलग करके भी बैटरी चार्ज कर सकते हैं ?

15) साइकिल में कौन से सेंसर्स लगे हैं ? Cadence या Torque या दोनों ही ?

16) साइकिल में कितने स्पीड मोड हैं ? हर मोड में कितनी स्पीड मिलती है ?

17) इलेक्ट्रिक साइकिल खरीद रहे हैं तो दुकानदार से बात करके या कंपनी की वेबसाईट से देखें कि कौन-कौन से पार्ट, ऐक्सेसरी, मडगार्ड, स्टैन्ड, बैटरी, मोटर खराब होने, टूटने पर दोबारा खरीदी जा सकती है। कंपनी की कस्टमर केयर से बात करके आप ये भी पता कर सकते हैं कि क्या आपके शहर में कोई दुकान है, जहां से आप सीधे पार्ट खरीद सकें।

18) पता करें कि इलेक्ट्रिक साइकिल के मॉडल में कौन से Safety feature, Waterproof Rating, Locking system है। 

19) साइकिल की सीट आरामदायक है या नहीं ? क्या बदली जा सकती है ? क्या साइकिल की सीट की ऊंचाई बढ़ाई/कम की जा सकती है ? क्या हैन्डल पकड़ने के लिए आपको बहुत झुकना तो नहीं पड़ता है ? क्या साइकिल के हैन्डल की पोजीशन ऊपर/नीचे की जा सकती है ?

20) इलेक्ट्रिक साइकिल खरीदना आसान है लेकिन उससे पहले रखने की जगह, चार्जिंग पॉइंट पोजीशन भी सुनिश्चित कर लें। 

21) ध्यान रहे कि सबसे बढ़िया इलेक्ट्रिक साइकिल वही है जो आपके बजट, माइलेज, आराम तीनों कन्डिशन को पूरा करती है। अगर ये तीनों कन्डिशन पूरी नहीं होती तो चाहे साइकिल देखने में कितनी ही फ़ैन्सी लगे, साइकिल चलाने में मजा नहीं आएगा। 

इलेक्ट्रिक साइकिल कैसे बनाए | How to Covert Noraml Cycle to Electric in hindi 

अगर आप इलेक्ट्रिक साइकिल के बारे में जानकारी इकट्ठा कर रहे होंगे, तो ऑनलाइन रिसर्च के दौरान आपको भी Electric Cycle Coversion Kit के बारे में पता चला होगा। Coversion Kit में मोटर, बैटरी, वायर्स, डिस्प्ले, कंट्रोल स्विच आदि चीजें होती हैं। कुछ Coversion Kit में साइकिल व्हील भी आता है, जिसमें पहले से ही मोटर फिट रहती है। ये कन्वर्शन किट खरीदकर आप अपनी नॉर्मल साइकिल में फिट करके उसे इलेक्ट्रिक साइकिल बना सकते हैं, हालांकि इसके पहले आपको कुछ बातें जानना जरूरी है। 

1) क्या आप खुद से Coversion Kit साइकिल में फिट कर सकते हैं ? या आपके पास कोई इतना अच्छा मिस्त्री है जो इसको फिट कर सके ?

2) जो Conversion Kit आपने खरीदा है, वो आपके साइकिल के पहिये में फिट हो सकता है या नहीं ?

3) क्या Coversion Kit लगाने पर आपके साइकिल की बैलन्सिंग खराब तो नहीं हो जाएगी ?

4) क्या आपकी नॉर्मल साइकिल इलेक्ट्रिक बनने के बाद लोड लेने लायक मजबूत है ?

ये बात सही है कि Conversion Kit की कीमत एक नई इलेक्ट्रिक साइकिल की कीमत से काफी कम होती है। इसलिए अगर सही Conversion Kit मिल जाए और उसकी फिटिंग भी अच्छी तरह हो जाए तो यह फायदे की डील है। वहीं दूसरी तरफ कई मामलों में ऐसा भी देखा गया है कि पुरानी साइकिल में Conversion Kit लगाने की बजाय, नई साइकिल लेना ज्यादा आसान, टेंशन-फ्री उपाय है क्योंकि एक नई साइकिल की बैलन्सिंग, फिटिंग सब कंपनी की तरफ़ से स्टैन्डर्ड सेटिंग होकर आती है।  

Electric Cycle FAQ | इलेक्ट्रिक साइकिल के बारे में सवाल-जवाब 

इलेक्ट्रिक साइकिल की स्पीड कितनी होती है

आमतौर पर स्पीड 20 से 45 Km/Hr हो सकती है। वैसे भारत सरकार के नियम के अनुसार ज्यादातर इलेक्ट्रिक साइकिलों की स्पीड 25 Km/Hr पर फिक्स्ड होती है। इससे ज्यादा तेज चलाने पर मोटर सपोर्ट बंद हो जाता है।

क्या बारिश में इलेक्ट्रिक साइकिल चला सकते हैं ?

जी हाँ चला सकते हैं ! इलेक्ट्रिक साइकिल की बैटरी और मोटर Water-Resistant होते हैं। यह बात आप शॉप से या कंपनी की वेबसाईट से भी पता कर सकते हैं कि जो मॉडल आप खरीद रहे हैं, क्या वो Rainproof है ?

क्या इलेक्ट्रिक साइकिल की रेंज यानि माइलेज फिक्स्ड होता है ?

रेंज कई बातों पर डिपेंड करता है, जैसे आप कितना पैडल मारते हैं, रोड कैसी है, मौसम कैसा है, साइकिल राइडर का वजन कितना है, बैटरी कितनी चार्ज है आदि। इसी अनुसार रेंज घटती-बढ़ती है। 

इलेक्ट्रिक साइकिल की बैटरी चार्ज होने में कितना समय लगता है ?

आमतौर पर 3-5 घंटे में बैटरी 0% से 100% फुल चार्ज हो जाती है। नई बैटरी पहली बार चार्ज होने में 7-8 घंटे भी लगा सकती है।

पैडल असिस्ट और थ्राटल इलेक्ट्रिक साइकिल में कौन सी बढ़िया है ?

आपके उपयोग पर डिपेंड करता है। अगर आपको साइकिल चलाना पसंद है तो आपके लिए पैडल-असिस्ट सही है। अगर आप पैडल लगातार चलाने से जल्दी थक जाते हैं तो थ्राटल वाली खरीदें। वैसे कुछ इलेक्ट्रिक साइकिल ऐसी भी आती हैं, जिसमें (Padel-Assit & Throttle) दोनों ही फीचर होते हैं।

इलेक्ट्रिक साइकिल की कीमत (Price) कितनी होती है ?

भारत में इलेक्ट्रिक साइकिल का दाम 15-20 हजार रुपये से शुरू होकर 1-3 लाख रुपये तक है।

इलेक्ट्रिक साइकिल Conversion Kit का दाम क्या है ?

कन्वर्शन किट की कीमत 3-4 हजार रुपए से लेकर 10-15 हजार रुपये तक है। 

इलेक्ट्रिक साइकिल चलाने में कितनी मेहनती लगती है ?

आपने कौन सा स्पीड मोड सिलेक्ट किया है ? क्या रोड ऊंची-नीची है ? बैटरी का चार्जिंग लेवल क्या है ? इन बातों पर निर्भर करता है। 

इलेक्ट्रिक साइकिल का वजन कितना होता है ?

7-8 किलोग्राम से लेकर 30-40 किलोग्राम तक हो सकता है। 

क्या बैटरी खत्म होने पर भी इलेक्ट्रिक साइकिल चला सकते हैं ?

जी हाँ लेकिन यह साइकिल के वजन, मॉडल पर निर्भर करता है कि उसे बिना बैटरी चलाने में कितनी मेहनत लगेगी। हल्की बॉडी, कम पावर की मोटर, कम बैटरी कपैसिटी वाली इलेक्ट्रिक साइकिल का वजन कम होगा, उसे साइकिल जैसे चलाने में कम मेहनत लगेगी।

क्या इलेक्ट्रिक साइकिल चलाने पर लगातार पैडल चलाना होता है ?

पैडल असिस्ट इलेक्ट्रिक साइकिल में पैडल चलाने पर ही मोटर का सपोर्ट मिलता है, पैडल नहीं चलायेंगे तो भी इलेक्ट्रिक साइकिल एक नॉर्मल साइकिल जैसे बढ़ती रहेगी। थ्राटल इलेक्ट्रिक साइकिल में जब भी चाहे पैडल रोककर थ्राटल घुमाकर आगे बढ़ सकते हैं। अगर कोई चढ़ाई है तो दोनों ही मॉडल की इलेक्ट्रिक साइकिल में पैडल मारना होगा, लेकिन नॉर्मल साइकिल से कम मेहनत लगेगी। 

इलेक्ट्रिक साइकिल के बैटरी की लाइफ कितनी होती है ?

आमतौर पर 2 से 5 साल तक होती है। यह आपके उपयोग, Charging cycle पर भी निर्भर करता है। 

इलेक्ट्रिक साइकिल बैटरी कितनी बार रिचार्ज करनी चाहिए ?

बैटरी पूरी तरह डिस्चार्ज नहीं रखनी चाहिए। बेहतर होगा आप जब भी राइड से वापस आए, बैटरी चार्ज कर लें। इससे दोबारा जब भी कहीं जाना होगा तो पहले बैटरी चार्ज करने का झंझट नहीं रहेगा। 

ऊंचे-नीचे रास्तों के लिए कौन सी इलेक्ट्रिक साइकिल लेनी चाहिए ?

मिड ड्राइव मोटर वाली माउंटेन ई बाइक्स या हाई पावर मोटर वाली, विद गियर्स इलेक्ट्रिक साइकिल खरीदनी चाहिए। 

क्या मुझे अपनी इलेक्ट्रिक साइकिल में गियर लगवाना चाहिए ?

अगर आप ज्यादातर सपाट सड़कों (Flat Roads) पर साइकिल चलाते हैं तो कोई जरूरत नहीं है। लंबी दूरी चलाने वाले या ऊंचे-नीचे रास्तों से जाने वाले अपनी इलेक्ट्रिक साइकिल में गियर लगवा सकते हैं। 

क्या इलेक्ट्रिक साइकिल को चाभी से On करते हैं ?

हाँ ! ज्यादातर मॉडल में एक RFID Chip वाली चाभी मिलती है, जिससे कंट्रोल सिस्टम को On/Off किया जाता है। 

इलेक्ट्रिक साइकिल को कैसे लॉक करते हैं ?

जैसे आप किसी भी आम साइकिल को लॉक करते हैं, वैसे ही इलेक्ट्रिक साइकिल को भी लॉक करते हैं। इलेक्ट्रिक साइकिल महंगी होती हैं, इसलिए बढ़िया क्वालिटी का मजबूत U Lock, D Lock ही लगाएं। अगर बैटरी Detachable है तो उसे भी अलग करके साथ ले जाएं। 

हम आशा करते हैं कि अगर आप इलेक्ट्रिक साइकिल खरीदना चाहते हैं तो यह जानकारियाँ आपकी मदद करेंगी। अगर आप इस बारे में कुछ सवाल पूंछना चाहते है तो नीचे कमेन्ट करें। अगर कोई आपकी जान-पहचान में इलेक्ट्रिक साइकिल खरीदना चाहता है तो यह पोस्ट उसे व्हाट्सप्प फॉरवर्ड, शेयर जरूर करें।

Sources : https://en.wikipedia.org/wiki/Electric_bicycle, https://www.bicycling.com/skills-tips/a20044021/13-things-about-e-bikes/, https://www.nytimes.com/wirecutter/blog/build-ebike/, https://www.theverge.com/2019/10/10/20904414/electric-bikes-ebike-guide-rideables-battery-how-to-buy-price

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5 thoughts on “इलेक्ट्रिक साइकिल”

    • Sir Thane me electric cycle buy karne ki bahut si shops hai. Ap apne area ke kisi bhi bade cycle showroom se pata kariye Or Google search kare ‘Electric bicycle near me’ apko apne area me elctric bicycle shops ka name & address pata chal jayega. Thane me Ghodbunder road, Ram murti road, Thane west, Thane station roads par electric bicycle shops hain

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