भगवान का अस्तित्व साबित करने वाला अनोखा प्रयोग : Double Slit Experiment

भगवान का अस्तित्व – Double Slit Experiment in hindi :

God’s Existence को साबित करता है Physics का Double Slit Experiment जिसे पहली बार 18th century में किया गया. तब से लेकर आज तक ये प्रयोग कईयों बार दोहराया जा चुका है लेकिन हर बार इसके परिणाम Scientists के लिए एक गुत्थी है। 

जहाँ एक ओर आस्तिक और आध्यात्मिक लोग इसे भगवान का अस्तित्व और उनकी परमसत्ता मानते हैं. वहीँ दूसरी ओर साइंटिस्ट इसे वैज्ञानिक रूप से समझने की कोशिश में दशकों से लगे हुए हैं.

इस प्रयोग के सामने कई वैज्ञानिक थ्योरी फेल हो जाती हैं और इसने Quantum Mechanics को भी हिलाकर रखा हुआ है. आइये जानते हैं आधुनिक विज्ञान के अस्तित्व को चुनौती देनेवाला Double Slit Experiment क्या है.

Double Slit Experiment क्या है ?

विज्ञान विषय के सभी विद्यार्थियों ने Physics का Young’s Double Slit Experiment जरुर किया गया होगा.

इस प्रयोग में एक गत्ते या धातु की प्लेट में दो सामानांतर पतले स्लिट (चीरा) बने होते थे. इस स्लिट के एक तरफ Light source होता था और दूसरी तरफ एक पर्दा या बोर्ड होता था.

young double slit experiment in hindi

image source : physicsoftheuniverse

स्लिट से प्रकाश के गुज़रने से पर्दे पर पैटर्न बनते हैं. इन पैटर्न के विश्लेषण से प्रकाश सम्बन्धी नियमों का अध्ययन किया जाता है. यह प्रयोग पहली बार 18वीं सदी के वैज्ञानिक Thomas Young ने किया था, इसलिए यह प्रयोग Thomas Young : Double Slit Experiment कहा जाता है.

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डबल स्लिट एक्सपेरिमेंट का निष्कर्ष रहस्यमयी क्यों है ? What is Light ? :

प्रकाश हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अंग है लेकिन विज्ञान प्रकाश के बारे में ठीक-ठीक कुछ भी जानता.

  • प्रकाश क्या है ?
  • यह पार्टिकल (कण) है या वेव (तरंग) ?
  • यह कैसे गति करता है ?

क्या प्रकृति अपना यह राज हमसे छुपाकर रखना चाहती है ? शायद हाँ ! क्योंकि इस प्रयोग के रिजल्ट में यही सामने आया.

-- इस प्रयोग में 2 स्लिट से प्रकाश के गुजरने पर पर्दे पर 2 स्लिट की परछाई नहीं बल्कि कई सारी गहरी-हल्की परछाइयाँ बनती हैं, जिससे लगता है कि प्रकाश एक तरंग है और कण आपस में टकरा कर ढेर सारी परछाइयाँ रहे हैं.

वैज्ञानिकों ने सोचा कि अगर एक-एक इलेक्ट्रॉन छोड़ा जाये तो वो आपस में टकरायेंगे नहीं और केवल 2 स्लिट की परछाई ही  बनेगी.

-- पर ऐसा नहीं हुआ और इस बार भी अलग-अलग कई परछाइयाँ बनी. ऐसा नहीं होना चाहिए था क्योंकि कण एक सीधी रेखा में चलते हैं. एक-एक इलेक्ट्रान बारी-बारी से छोड़ा जा रहा था, इसलिए उनके आपस में टकरा के Interference Pattern (व्यतिकरण) बनाने की भी सम्भावना नहीं थी. तो फिर आखिर क्या हो रहा था ??

वैज्ञानिकों ने जब इसका कारण जानने के लिए खास तरह के माइक्रोस्कोपिक कैमरे लगाये तो परिणाम देख के वो दंग रह गये.

double slit experiment explained

image source : slideshare

अब पर्दे पर दोनों स्लिट की केवल 2 परछाइयाँ बन रही थी, मतलब प्रकाश पार्टिकल की तरह व्यव्हार करने लगा. पर क्यों ?? क्या एटम या अणु को यह मालूम हो गया कि उनपर नजर रखी जा रही है ?

यह प्रयोग कई बार अलग अलग जगह दोहराया जा चुका है, पर परिणाम जस के तस हैं. अगर आप के पास इसका जवाब है तो नोबल पुरस्कार आपका इंतज़ार कर रहा है.

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-- हालाँकि इसे Quantum Mechanics के जटिल नियमों से सिद्ध करने के कोशिश की गयी मगर प्रसिद्ध भौतिकशास्त्री Richard Feynman ने भी कहा – I think I can safely say that nobody understands quantum mechanics (मै समझता हूँ कि ये बात मैं बड़े आराम से कह सकता हूँ कि क्वांटम मैकेनिक्स की समझ किसी को भी नहीं है).

इस प्रयोग को अच्छे से समझने के लिए आप यह यूट्यूब विडियो देखिये –

प्रकाश को न समझ पाने की गुत्थी विज्ञान पर कई बड़े सवाल खड़े करती है. जैसे कि –

  • क्या हमारे Science के आधारभूत सिद्धांत ही गलत हैं ?
  • क्या कोई परमसत्ता है जोकि अपने गूढ़ रहस्यों को छुपाकर रखना चाहती है ?.
  • क्या हर कण पर परमात्मा का नियंत्रण है ?

शायद भविष्य में कभी इसका कारण ठीक-ठीक पता चला भी जाए पर फिलहाल Double Slit Experiment का परिणाम भगवान का अस्तित्व का सबूत समझना गलत नहीं होगा. यह जानकारी लेख दोस्तों के लिए व्हाट्सप्प, फ़ेसबुक पर शेयर जरूर करें जिससे कई लोग इसे पढ़ सकें। 

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One Response

  1. Shivam

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