रिचर्ड फ्रांसिस बर्टन की अनोखी साहसिक यात्राओं के 5 किस्से

Richard Francis Burton biography in hindi :

रिचर्ड फ्रांसिस बर्टन (1821-1890) एक महान साहसिक खोजकर्ता, जासूस, कवि, राजदूत, लेखक, भूगोलवेत्ता, अनुवादक, कार्टोग्राफर और सैनिक थे. उन्होंने Asia, Africa, America की कई अद्भुत, अनोखी खोजी यात्रायें की.

रिचर्ड कुल मिलाकर 29 भाषाओं के ज्ञाता थे जोकि एशियन, यूरोपियन, अफ्रीकन भाषाएं थीं। रिचर्ड ने अपनी साहसिक यात्राओं पर भौगोलिक जानकारी के साथ विस्तारपूर्वक वर्णन करने वाले कई लेख लिखे. 

रिचर्ड फ्रांसिस बर्टन के किस्से :

अब आप ये रोचक फैक्ट्स पढ़ें, जिससे आपको अंदाजा लगे कि Richard Francis Burton क्या हस्ती थे. उन्होंने जिस बहादुरी से अपनी साहसिक हैरतंगेज यात्राओं को जारी रखा, वो एक अजूबा ही है :-

1) क्रिश्चियन होते हुए भी ‘हज की यात्रा’ :

रिचर्ड फ्रांसिस बर्टन पहले गैर-मुस्लिम यूरोपियन यात्री थे जिन्होंने 1853 में हज की यात्रा की. उस समय गैर-मुस्लिम के लिए मक्का जाने पर रोक थी और कोई चला भी जाए तो उसे मौत की सजा मिलती थी। 

लेकिन रिचर्ड ने इस कर दिखाया जबकि अगर उनका भेद खुल जाता तो उन्हें मौत की सजा दी जाती. फिर यह कैसे सम्भव हुआ ?

असल में रिचर्ड को 29 भाषा बोलने में महारत हासिल थी. रिचर्ड ने अरबों के सारे रस्म-रिवाज सीखे. उनका भेद खुल न जाये, इसलिए उन्होंने अपना खतना (Circumcision) भी करवाया था. इस सबके बावजूद पकड़े जाने की काफी संभावना थी। 

लेकिन फिर भी वो एक पश्तून का भेष बनाकर Mecca पहुँच ही गये। इस यात्रा में उनके पास एक ‘कुरान’ रखने का केस था जिसके अंदर कुरान की जगह कुछ पैसे, चाकू, घड़ी, कम्पस, पेंसिल और कुछ कागज भी रखे थे जो नोट्स लिखने के काम आते। 

इस तरह रिचर्ड ने चालाकी से सफलतापूर्वक हज की यात्रा की. 

2) नील नदी की यात्रा :

अफ्रीका में नील नदी (Nile river) का स्रोत खोजने की साहसिक यात्रा में तो उनके कई साथी बीमारी से मर गए, कुछ लोग खूंखार जंगली जानवरों का शिकार भी हुए.

इसके अलावा आदिवासियों और जंगली जनजातियों से भी उनकी कई लड़ाईयां हुई, जिसमे दर्जनों लोगों ने जानें गवाई.

Richard Francis Burton scar

3) अफ्रीकी आदिवासियों से लड़ाई में घायल :

Richard Francis Burton की ये फोटो देखिये. इसमें उनके बाएं गाल पर जो निशान हैं उसके बारे में जानिए. यह निशान उन्हें अफ्रीका यात्रा के दौरान एक लड़ाई में घायल होने पर बना था.

एक सोमाली वारंले आदिवासी ने उन्हें भाले से मारा जोकि उनके दाहिने गाल को चीरकर घुसा और बाएं गाल से बाहर निकल गया. इससे रिचर्ड के गाल के साथ ही दांत, जबड़े, तालु भी कट गये.

इससे लड़ाई के बीच में ही रिचर्ड को वहाँ से जान बचाकर मुंह में भाला घुसाये ही भागना पड़ा।

जब वे और उनके साथी किसी सुरक्षित जगह पहुंचे तो भाले को निकालने के लिए एक आदमी ने उनका सर पकड़ा और दूसरे ने धीरे-धीरे खींच कर बाहर किया. इस लड़ाई में उन्हें ऐसे 10 बड़े घाव लगे, पर उन्होंने अपनी यात्रा जारी रखी.

4) कामसूत्र का अनुवाद :

रिचर्ड ने शिकार, यात्रा, मानव व्यवहार, युद्ध, यौन-क्रिया, मानव-जाति विज्ञान जैसे बहुत से विषयों पर किताबें लिखी और कई अन्य भाषाओ की पुस्तकों का अनुवाद भी किया.

रिचर्ड के अनुवाद की वजह से ही पहली बार पश्चिमी जगत को कामसूत्र, अलिफ़ लैला, द परफ्यूमड गार्डन जैसी किताबें पढ़ने को मिली.

रिचर्ड फ्रांसिस बर्टन पहले व्यक्ति थे जिन्होंने KamaSutra का अंग्रेजी अनुवाद किया था. विक्टोरियन युग में ऐसे साहित्य का प्रसार करने पर जेल और कड़ी सजा मिलती थी.

इसलिये रिचर्ड ने एक गुप्त संस्था ‘काम-शास्त्र सोसाइटी’ बनाई जो गुपचुप ऐसे साहित्य का प्रचार करती थी.

5) जबर्दस्त तलवारबाज :

रिचर्ड यूरोप के बेहतरीन तलवारबाज माने जाते थे. रिचर्ड फ्रांसिस बर्टन ने तलवारों के बारे में Book of the Sword नामक प्रसिद्ध किताब लिखी।

उन्होंने बेयोनेट फाइटिंग पर A complete system of Bayonet exercise किताब लिखी जिसका उपयोग सेना ने सैनिकों की ट्रैनिंग देने में भी किया

– एक समय रिचर्ड ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ में कप्तान भी थे और भारत में वो 7 वर्ष गुजरात में रहे। इस दौरान उन्होंने हिन्दी, गुजराती, मराठी, सिन्धी, पंजाबी, सराइकी, पर्शियन और अरबी भाषा सीख डाली। 

अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि रिचर्ड फ्रांसिस बर्टन क्या जीवट के इंसान थे. बहुमुखी प्रतिभा के धनी Richard Francis Burton ने जीवन की कई अनंत संभावनाओं को खंगाला और एक शानदार, रोमांचक जीवन जिया.

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