आग में जलते संत की कहानी क्या थी | Burning Monk Thich Quang Duc

Sant ki Kahani – The Burning Monk :

यह Photo दुनिया के इतिहास में सबसे अधिक प्रसिद्ध फोटो में से एक है. सन 1963 में जून महीने की बात है. Vietnam में सायगांव शहर के एक व्यस्त चौराहे पर महायान बौद्ध संत Thich Quang Duc (थिच क्वांग डक) ने अग्नि में जलकर प्राण त्याग दिए.

ध्यान मुद्रा में बैठे थिच क्वांग डक जलते समय न तो जरा भी हिले, न ही कोई आवाज़ की. एसोसिएटेड प्रेस के Photographer मैल्कम ब्राउन ने यह फोटो खींची थी. इस बौद्ध संत ने ऐसा दिल दहला देने वाला निर्णय क्यों लिया.

The burning monk story in hindi

बौद्ध संत थिच क्वांग डक :

उन दिनों दक्षिणी Vietnam की सरकार बौद्ध धर्म के लोगों का दमन और उत्पीड़न कर रही थी.  उस समय वियतनाम में करीब 70 % लोग बौद्धधर्म के अनुयायी थे, लेकिन वहां की सरकार कैथोलिक चर्च और ईसाईयों को प्राथमिकता देती थी. पीड़ित बौद्ध लोग जगह-जगह पर सरकार के इस पक्षपातपूर्ण रवैये का विरोध करने लगे.

इसी घटनाक्रम में एक दिन सरकार ने नया नियम लागू कर दिया कि बौधिष्ठ झंडों को फहराना गैर-कानूनी है. कुछ ही दिन बाद गौतम बुद्ध जयंती का अवसर था. उस दिन भारी संख्या में लोगों ने इस नियम का विरोध करते हुए बौद्ध झंडे फहराए और झंडों को लेकर Government Broadcasting Station की तरफ चल दिए.

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए गोलियाँ चलाई जिसमें 9 लोगों की मृत्यु हो गयी.

संत थिच क्वांग डक ने दक्षिणी वियतनाम सरकार के बौद्धों के प्रति इस दुर्व्यवहार का विरोध करते हुए अपने प्राण त्याग दिए. वो यह सन्देश देना चाहते थे कि सभी प्रकार के उत्पीड़न से लड़ने के लिए बलिदान आवश्यक होता है. अतः उन्होंने स्वेच्छा से खुदको अग्नि में भस्म कर दिया.

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11 जून 1963 के दिन क्या हुआ था :

इस घटना से एक दिन पहले यानि 10 जून को पत्रकारों को सूचना मिली कि अगले दिन सुबह कोई बड़ी घटना होने वाली है. बहुत से संवाददाताओं को लगा ऐसे दमनकारी माहौल में क्या ही होगा, अतः उन्होंने इस बात पर ध्यान नहीं दिया.

अगले दिन कुछेक पत्रकार जो घटनास्थल पर पहुंचे थे, उनमे Photographer मैल्कम ब्राउन भी थे.

11 जून की सुबह समीपवर्ती बौद्ध पैगोडा से करीब 350 बौद्ध भिक्षुक और संतों का एक दल निकला. यह लोग सरकार और उनकी नीतियों के विरोध में नारे लगा रहे थे. जब यह समूह कम्बोडियन एम्बेसी के सामने पहुंचा तो एक नीले रंग की कार आकर रुकी. कार से थिच क्वांग डक और दो संतों के साथ उतरे.

एक संत ने जमीन पर एक कुशन रखा, जिसपर संत थिच क्वांग डक पद्मासन मुद्रा में बैठ गये.

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दूसरे संत ने कार की डिक्की से 5 लीटर पैट्रोल से भरा हुआ गैलन निकाला और संत थिच क्वांग डक पर उड़ेल दिया. संत थिच क्वांग डक माला लिए हुए जाप कर रहे थे. इसी बीच उन्होंने माचिस जलाई और अपने खुदपर डाल दिया.

उनका वस्त्र और शरीर धू-धू कर जलने लगा और काला धुवाँ उठने लगा.

अंग्रेजी और वियतनामी भाषा में लाउडस्पीकर पर एक बौद्ध संत ने घोषणा की – एक बौद्ध संत खुद जलकर प्राण देता है. एक बौद्ध संत शहीद बन जाता है.

10 मिनट में बौद्ध संत का शरीर पूर्णतः जलने के बाद पीठ के बल गिर गया. जब आग बुझ गयी तो बौद्ध संतों ने उनके शरीर को पीले वस्त्रों में लपेटा और निकटवर्ती पैगोडा ले गए.

मरने से पूर्व थिच क्वांग डक के अंतिम शब्द यह थे – ससे पहले कि मैं अपनी ऑंखें बंद करूँ और बुद्ध की शरण में जाऊं, मैं आदरपूर्वक राष्ट्रपति Ngo Dinh Diem से निवेदन करता हूँ कि वो अपने देश के लोगों के प्रति दया दिखायें और देश की अखंड मजबूती के लिए धार्मिक समानता बरतें. मैं संघ के सम्मानित, श्रद्धेय सदस्यों का आवाहन करता हूँ और सभी बौधिष्ठ एकजुट होकर अपने बलिदान से बौद्ध धर्म की रक्षा करें.

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कुछ महत्वपूर्ण तथ्य :

1) बौद्ध संत Thich Quang Duc के शरीर का दुबारा अंतिम संस्कार किया गया. दुबारा जलाने के बाद भी उनका हृदय नहीं जला. इस दैवीय चमत्कार को देखते हुए उनके हृदय को Xa Loi पैगोडा में कांच के एक बॉक्स में सुरक्षित रख दिया गया.

2) पूरी दुनिया में इस खबर ने तहलका मचा दिया. हर अख़बार पर यह पहले पन्ने की खबर बनी. यह घटना दक्षिणी वियतनामी सरकार के पतन का कारण बनी और बौधिष्ठ लोगों पर अत्याचार का अंत हुआ.

3) फोटोग्राफर मैल्कम ब्राउन को इस फोटो के लिए Photography का पुलित्जर पुरस्कार (Pulitzer Award) दिया गया था.

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