2 मनोवैज्ञानिक फिल्म एक्सपेरिमेंटर और द स्टैनफोर्ड एक्सपेरिमेंट

असली साइकोलॉजिकल एक्सपेरिमेंट पर आधारित 2 मनोवैज्ञानिक फिल्में Experimenter और The Stanford Experiment मूवी 2015 में रिलीज हुई थीं। खास बात ये कि इन फिल्मों की कहानी 2 Real Psychological Experiment और उनके Results पर आधारित है। इन मनोवैज्ञानिक परीक्षण के रिजल्ट इतने आश्चर्यजनक थे कि इन्होंने बहुत सी मान्यताओं को हिला कर रख दिया और ये दोनों experiment आने वाले कई सालों तक, बड़े स्तर पर चर्चा और बहस का मुद्दा बनी। 

1) Experimenter – हॉलीवुड मनोवैज्ञानिक फिल्म

इस प्रयोग में कुछ लोगो को एक मनोवैज्ञानिक प्रयोग में भाग लेने के लिए बुलाया गया। एक कमरे में किसी एक व्यक्ति को एक इलेक्ट्रिकल स्विचबोर्ड के सामने बैठा दिया जाता था और कुछ प्रश्न और उत्तर की लिस्ट दे दी जाती। अब उन्हें एक ऐसे व्यक्ति से मिलवाया जाता था जोकि Psychologist की टीम का ही हिस्सा था।

मिलने के बाद टीम का व्यक्ति एक दूसरे बंद केबिन में बैठ जाता था जिससे कि स्विचबोर्ड के सामने बैठा व्यक्ति उसे देख तो नहीं पाता मगर उसकी आवाज़ सुन सकता था। 

आमंत्रित व्यक्ति को बताया जाता कि केबिन में बंद व्यक्ति को तुम्हारे सामने के Switchboard से निकले तार से जोड़ दिया गया है और आपको उससे सवाल के उत्तर पूछने है। गलत जवाब देने पर आपको स्विचबोर्ड को दबाना है जिससे कि केबिन के व्यक्ति को बिजली का हल्का झटका लगेगा।

जैसे-जैसे प्रश्न-उत्तर की लिस्ट में आगे बढ़ेंगे, गलत जवाब देने पर बिजली के झटको की पॉवर बढती जाएगी। इस कमरे की गतिविधियों पर मनोवैज्ञानिक एक गुप्त जगह से नज़र रखे हुए थे। असल में Cabin में बंद व्यक्ति को कोई झटका नहीं लगता था, वो तो बस वहां बैठकर दर्द और चीख की आवाज़ से भरे के एक रिकॉर्ड को चला रहा होता था। 

इस प्रयोग से ये चौकाने वाले परिणाम सामने आये कि कई स्त्री, पुरुष जोकि बड़े दयालु और सहृदय मालूम होते हैं असल में दबाव और परिस्थिति के प्रभाव में क्रूर (Cruel) हो सकते हैं। 

वहीं कई ऐसे लोग जोकि देखने से सख्त मिजाज़ के लगते हैं मगर दबाव और प्रभाव के बावजूद अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुन कर सही निर्णय लेते हैं और दया का भाव प्रदर्शित करते हैं। 

इससे ये भी पता चला कि किस प्रकार कुछ लोग अपने सीनियर्स / मालिक के आदेशों का आंख बंद करके पालन करते हैं मगर  कुछ लोग अपने विवेक के अनुसार चलते हैं। 

2) The Stanford Experiment – साइकोलॉजिकल मूवी 

कैदी और जेल में काम करने वाले वर्कर, जेल गार्ड के बरताव और उनकी मनोवैज्ञानिक स्थिति के बारे में जानने के लिए इस प्रयोग को बनाया गया था। इसमें Stanford College के कुछ विद्यार्थियों को लिया गया। कॉलेज में ही एक नकली जेल बनाई गयी। 

अब कुछ स्टूडेंट्स को उनकी मर्जी के अनुसार जेल गार्ड और कैदी बनाया गया। इसके बाद कैदी लडको को उनके जेल में डाल दिया गया और गार्ड लड़कों से उनपर नज़र रखने और एक जेल गार्ड के तरह बर्ताव करने के लिए कहा गया। 

शुरू में सभी को लगा इस परीक्षण से कुछ खास निर्णय सामने नहीं आने वाला था परन्तु प्रयोग के 1-2 दिन बाद परिस्थितियां तेजी से बदली और इस प्रयोग में भाग लेने वाले विद्यार्थियों के मानसिक स्थिति में ऐसे आश्चर्यजनक और गंभीर परिवर्तन आए कि इस प्रयोग को बीच में ही रोक देना पड़ा। 

इस प्रयोग में यह देखने में आया कि किस प्रकार कुछ लोग मुश्किल से मुश्किल परिस्थितयों में भी अपना Mental Balance बनाये रखते है और आशावादी बने रहते है जबकि उन्ही स्थितियों में अन्य लोग हिम्मत हार जाते हैं। 

यह साइकोलॉजिकल प्रयोग ये भी बताता है कि किसी आदमी पर उसके आसपास के माहौल, वातावरण और लोगों के Behavior का गहरा असर पड़ता है। 

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source : https://en.wikipedia.org/wiki/Stanford_prison_experimenthttps://en.wikipedia.org/wiki/Experimenter_(film)https://en.wikipedia.org/wiki/Milgram_experiment

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शब्दबीज संपादक पिछले 5 वर्षों से हिन्दी में विभिन्न विषयों पर अच्छे लेखों का प्रकाशन कर रही है। हमारा उद्देश्य है कि सही जानकारी, अनुसंधान और गुणवत्ता पूर्ण लेख से हमारे पाठकों का ज्ञानवर्धन हो।

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