भारतीय रेलवे के वडाला एक्सपेरिमेंट ने एक्सीडेंट 75% कम कैसे किया

भारतीय रेलवे का वडाला एक्सपेरिमेंट :

Indian Railway का वडाला एक्सपेरिमेंट एक गजब मनोवैज्ञानिक प्रयोग था जिससे Railway Track पार करते समय होने वाले एक्सीडेंट की संख्या में भारी कमी आई. मुंबई में व्यस्त इलाके वडाला में इस प्रयोग को किया गया जहाँ बहुत ज्यादा एक्सीडेंट होते थे.

लोगों के दिमाग पर गजब का असर करने वाले Wadala Experiment को मुंबई की Final Mile कंपनी ने रेलवे के साथ मिलकर किया.

अक्सर लोग रेलवे ट्रैक पार करने की जल्दी में लोग ट्रेन के सामने आ जाते हैं. लोग ऐसा गलत निर्णय क्यों ले लेते हैं, इसके पीछे 3 मुख्य मनोवैज्ञानिक कारण होते हैं. इन्ही कारणों का Creative solution निकालकर रेलवे ने इसका समाधान किया.

1) परिणाम की कल्पना न होना :

रेल की पटरी पार करते समय हमारे सामने दो निर्णय होते हैं, रुको या भागो. इसी में कन्फ्यूज होकर लोग गलती कर बैठते हैं. इस हड़बड़ी में हम गलत निर्णय के परिणाम की कल्पना नहीं कर पाते.

इसका उपाय रेलवे ने कुछ ऐसे पोस्टर लगाकर किया, जिसमें एक आदमी ट्रेन के नीचे आ रहा है. ये पोस्टर ऐसी जगह लगाये गये, जहाँ सबसे ज्यादा एक्सीडेंट होते थे.

Railway accident photo

image source : Boston

पोस्टर लगाने का परिणाम ये हुआ कि वहाँ से गुजरते समय लोगों की नजर उस पोस्टर पर पड़ती और लोग सम्भावित एक्सीडेंट की कल्पना करके सचेत होने लगे.

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2) Leibowitz Hypothesis का असर होता है :

आप मानेंगे नहीं ! पर इस हाइपोथिसिस से सिद्ध किया गया है कि मनुष्यों को तेजी से आती छोटी चीज़ से ज्यादा भय लगता है, बजाय उसी तेजी से आती बड़ी वस्तु से.

यह मनुष्य के क्रमिक विकास का परिणाम है क्योंकि आदिकाल में हाथी, ऊँट के बजाय शेर, चीते से इंसानों को ज्यादा हानि थी. लोग तेजी से आती ट्रेन की गति का सही आकलन नहीं कर पाते और ट्रेन की चपेट में आ जाते हैं.

Yellow Railway Tracks wadala

image source : thequint

इसका समाधान यह निकाला गया कि हर थोड़ी दूर पर रेलवे ट्रैक्स को पीले रंग से कलर कर दिया गया. इन पीले ट्रैक ने एक बोल्ड मार्कर की तरह काम किया. इससे लोगों को अंदाज़ा मिलने लगा कि इन्हें पार करती हुई ट्रेन कितनी तेजी से उनके पास आ जाएगी.

3) रेलवे हॉर्न न सुन पाना :

हम इन्सान एक समय में एक ही आवाज पर सही फोकस कर पाते हैं. अगर एक साथ कई आवाजें सुनाई दे रहीं हों तो हमारा दिमाग बहुत सी आवाज़ों को अनसुना सा कर देता है. कई बार ऐसा हो जाता है कि ट्रेन के हॉर्न की आवाज़ आसपास के शोरगुल में मिल जाती है और हमारा ध्यान हॉर्न की आवाज़ पर नहीं जाता.

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इसके उपाय के लिए सम्भावित एक्सीडेंट वाले क्रासिंग प्वाइंट से 120 मीटर पहले Whistle board लगाये गये. रेलवे ड्राईवर को निर्देश दिया गया कि इन Whistle board से गुजरते समय वो एक लम्बे लगातार हॉर्न के बजाय थोड़े-थोड़े अन्तराल पर 2 बार हॉर्न बजायें.

Railway whistle board on tracks

इस तरह हॉर्न बजाने से लोगों का ध्यान हॉर्न की तरफ जाता है. चलती ट्रेन से थोड़े अन्तराल पर आती दो आवाज़ों में आवाज की तीव्रता का अंतर महसूस किया जा सकता है. इससे लोग ये अंदाजा लगाने में सक्षम होते हैं कि ट्रेन अब नजदीक आ गई है.

  • इन 3सरल से मनोवैज्ञानिक उपायों के असर से वडाला क्षेत्र में एक्सीडेंट की संख्या में 70-75% की कमी हुई
  • एक्सीडेंट से रेलवे के होने वाले नुक्सान में कमी आई.
  • Railway Accident कम करने की योजना के लिए 50 करोड़ रुपये बजट था मगर इन उपायों को अपनाने से काम कुछ हज़ार रुपयों में ही हो गया.

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