दोना पत्तल बनवा रहे हैं जर्मन और भारतीय प्लास्टिक प्लेट से खुश हैं

दोना पत्तल का जर्मन ब्रांड Leaf Republic :

जहाँ एक ओर हम भारतीय लोग प्लास्टिक के बने प्लेट, बाउल को गले लगा रहे हैं और देसी दोना पत्तल को पिछड़ा हुआ समझते हैं। जर्मनी की कंपनी Leaf Republic पेड़ के पत्तों से बनी पत्तलें और दोनों का विदेश में प्रचार-प्रसार कर रही है। 

कितनी अजीब विडम्बना है कि जिस कल्चर को हमने देहाती और पिछड़ा हुआ समझ कर छोड़ दिया, उसका महत्व और उपयोगिता अंग्रेज समझ रहे हैं. विदेशी लोग Dona Pattal के Eco-friendly गुण गाते नहीं थक रहे हैं। 

जब हमारा हजारों वर्ष पुराना भारतीय योग विदेशों के चक्कर काटकर Yoga बन कर वापस आया तो लोगों ने इसे हाथों-हाथ लिया. कल को इसी तरह कोई विदेशी कम्पनी पत्तों के बने प्लेट, दोने, कुल्हड़ पैकिंग करके 10 गुने दाम में बेचेंगी तो हम शान से खरीदेंगे.

तो चलिए आप भी जानिए जर्मन कम्पनी लीफ रिपब्लिक के बारे में और ये भी कि वो ऐसा क्यों कर रहे हैं ?

leaf republic founder team

जर्मनी की Leaf Republic नामक कम्पनी डिज़ाइनर और इंजीनियर्स का एक छोटा सा ग्रुप है जोकि पारंपरिक भारतीय पत्तलों और दोने के आईडिया से बड़े प्रभावित थे.

दोना पत्तल की सबसे बड़ी खासियत इको-फ्रेंडली और Bio-degradable होना है. मतलब प्रकृति पर कोई बुरा असर नहीं, प्रकृति से मिला और प्रकृति में वापस मिल गया.

पत्तों के बने दोने, पत्तल, कुल्हड़ उपयोग के बाद फेंकने पर सड़-गल कर मिट्टी में मिल जाते हैं. जबकि प्लास्टिक के बने आइटम हजारों साल में जाकर गलते हैं और प्रकृति को दूषित भी करते हैं.

Leaf Republic अलग अलग आकार और साइज़ के कटोरे, ट्रे और प्लेटें बनाती है. Leaf Republic ने अपनी शुरुआत ऑनलाइन स्टार्टअप वेबसाइट Kickstarter से की है और वे बढ़िया बिजनस कर रहे हैं.

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Dona Pattal banane ki company

भारत में दोना पत्तल का चलन :

दक्षिण भारत में तो सामान्य से लेकर अच्छे होटलों तक में आपको केले के पत्तों पर भोजन मिल जायेगा. पर हमारे आजकल के ज्यादातर उत्तर भारतीय लोगों को अपनी पुरानी सभ्यता और विचारधारा से बड़ी उलझन फ़ील होती है.

हम उत्तर भारतीय बड़ी लगन से अपने रिवाजों और मान्यताओं को भुलाने और उनसे पीछा छुड़ाने में लगे हुए है. क्या आपको याद है आखिरी बार कब आपने पत्तों से बने Dona Pattal में कुछ खाया था ?

आखिर ऐसा क्यों है कि जब कोई विदेशी संस्था हल्दी, तुलसी, बासमती चावल जैसे किसी भारतीय आइटम के पेटेंट का दावा करती है, तभी हमारी देशभक्ति जगती है.

इसलिए समय की मांग है कि अब हम ऑंखें खोलें, विचार करें और सही निर्णय लेने में कोई संकोच न करें. इस जानकारी को अपने दोस्तों को व्हाट्सप्प, फ़ेसबुक से जरूर बताएं जिससे ये लेख कई लोग पढ़ सकें। 

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