मेमोरी और दिमागी ताकत बढ़ाने वाली इन 3 वनस्पतियों का सेवन करें

By | 15/07/2016

Memory और Mental power में आनेवाली कमी अब केवल उम्र बढ़ने के असर के रूप में ही नहीं देखी जाती. बदलती लाइफस्टाइल, खानपान में बदलाव, पॉल्यूशन, शराब-सिगरेट पीने का चलन और कई तरह की दवाइयों के कारण बहुत बड़ी तादाद में लोग मेमोरी संबंधित डिसॉर्डर के शिकार हो रहे हैं.

इस बारे में एक मिथ ये भी है कि मेमोरी और दिमागी ताकत में आनेवाले बदलाव नैचुरल होते हैं, लेकिन ये बात सही नहीं है. हमारा दिमाग उम्र के हर दौर में नई-नई Brain cells बनाता रहता है और हमारा भोजन इस प्रोसेस में बड़ी जिम्मेदारी निभाता है.

हांलांकि हमारे नैचुरल फूड के बहुत बड़े भाग में शरीर और दिमाग को सक्षम रखनेवाले पदार्थ होते हैं लेकिन प्राचीन काल से ही प्रयोग में लाई जा रही ऐसी बहुत सी Herbs और वनस्पतियां हैं जिनका मुख्य प्रभाव हमारे मेमोरी और Brain system पर पड़ता है और डॉक्टर के परामर्श के हिसाब से लेने पर वे हमारी दिमागी ताकत को इंप्रूव करती हैं :

ब्राम्ही – Bramhi (Bacopa monnieri) – 

ब्राम्ही का पौधा साउथईस्ट एशिया के दलदली क्षेत्रों में अपने आप ही उगता है और इसके ब्रेन-बूस्टिंग गुणों के बारे में आयुर्वेद में भी बताया गया है. यह याददाश्त की कमी, फोकस नहीं होना, यहां तक कि डिप्रेशन को दूर करने में भी मददगार देखा गया है. ब्राम्ही के मेडिकल गुणों पर विश्व के अनेक देशों में सैंकड़ों रिसर्च हुई हैं जिनमें यह पता चला है कि ये वाकई हमारे दिमाग पर पॉज़िटिव असर डालती है.

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वर्ष 2012 में Evidence-Based Complementary and Alternative Medicine जर्नल में छपे एक पेपर में यह बताया गया है कि ब्राम्ही के प्रयोग से “अटेंशन बढ़ता है, ब्रेन की प्रोसेसिंग इंप्रूव होती है, और ब्रेन की AChE एक्टीविटी के माध्यम से वर्किंग मेमोरी बढ़ती है”. जर्नल Neuropsychopharmacology के अनुसार ब्राम्ही के प्रयोग से मेमोरी बढ़ती है और बातों को जल्द रीकॉल करने में मदद मिलती है.

सभी ब्रेन-बूस्टिंग औषधियों की ही भांति ब्राम्ही को भी असर करने में समय लगता है. इसके सत्व की 150 मिलीग्राम मात्रा नियमित रूप से दो महीने तक लेने से इसके बेहतर परिणाम देखे जा सकते हैं. यह कई आयुर्वेदिक औषधि निर्माताओं द्वारा कैप्सूल और टैबलेट के फॉर्म में बेची जाती है.

मंडूकपर्णी या गोटू (Gotu kola) –

गोटू कोला (Centella asiatica) अजमोदा समूह की वनस्पति है और हिमालय में उगती है. इसे भारत और चीन में हजारों सालों से वेरीकोज़ वेन्स, स्किन प्रॉब्लम्स, ब्लड सर्कुलेशन, और अनिद्रा (insomnia) के उपचार के लिए उपयोग में लाया जाता रहा है लेकिन मंडूकपर्णी हमारे दिमाग पर भी बहुत अच्छा प्रभाव डालती है.

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वर्ष 2013 में एक आयुर्वेदिक जर्नल में छपे एक पेपर में छपा कि मंडूकपर्णी को मेध रसायन समूह की अन्य वनस्पति औषधियों के साथ लेने पर मेमोरी पर इसका प्रभाव यौगिक क्रियाओं की तुलना में भी अधिक तेजी से होता देखा गया. इससे एक साल पहले छपे एक रिव्यू में भी यह बताया गया कि मंडूकपर्णी में Neuroprotective गुण होते हैं जो कि एल्ज़ीमर्स (Alzheimer’s disease), पार्किंसन (Parkinson’s disease) और ऑक्सीडेटिव तनाव में लाभ पहुंचाते हैं.

डॉक्टर के परामर्श से Gotu Kola के 500 मिलीग्राम के एक या दो कैप्सूल दिन में एक बार लेने से Memory प्राकृतिक तरीके से बिना किसी साइड इफेक्ट के बढ़ती है. जिंको और मंडूकपर्णी की चाय भी मिलती है और इसकी कड़वाहट को शहद या नींबू मिलाकर कम किया जा सकता है.

जिंको बाईलोबा (Ginkgo Biloba) –

जिंको बाईलोबा की गिनती विश्व के सबसे पुराने पौधों में होती है. यह यूरोप और अमेरिका में सबसे अधिक उपयोग में लाई जानेवाली हर्बल मेडिसिन है. इसका पेड़ बहुत लंबे समय तक जीवित रहता है और इसकी पत्तियां औषधि के लिए प्रयोग में लाई जाती हैं. वर्ष 2014 में Advances in Experimental Medicine and Biology जर्नल में छपी स्टडी के अनुसार इसके प्रयोग से प्रौढ़ (middle-aged individuals) की मेमोरी संबंधित समस्याओं के निदान में मदद मिली.

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वर्ष 2013 में Toxicology and Industrial Health जर्नल में छपे पेपर ने यह भी बताया कि इसे विटामिन सी (vitamin C) के साथ लेने पर फ्लोराइड के लंबे एक्सपोज़र के कारण होनेवाले मेंटल डिसॉर्डर को ठीक करने में भी सहायता मिली.

जिंको का रिकमेंडेडे डेली डोज़ लगभग 240 से 600 मिलीग्राम दिन में तीन बार तक डॉक्टर के परामर्श से लेने पर मेमोरी रिलेटेड समस्याओं का उपचार हो सकता है. ब्राम्ही की ही तरह जिंको का असर भी धीरे-धीरे होता है और इसे कम-से-कम एक महीना लेकर देखना चाहिए.

डिस्कलेमरः किसी भी आयुर्वेदिक क्रिया या औषधि को अपनाने से पहले स्वविवेक से काम लें और आयुर्वेद के जानकार चिकित्सक से भी सलाह लें. इस वेबसाइट के सारे लेखों का उद्देश्य केवल शैक्षिक है.

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