ज्यादा सोने के 9 नुकसान क्या होते हैं | Jyada Sone ke Nuksan

ज्यादा सोने से क्या होता है : जरुरत से ज्यादा सोना (Oversleeping) या नींद कम लेना दोनो ही सेहत के लिए हानिकारक होता है। एक अच्छी नींद (Sleep) लेना हमारे अच्छे स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी होता है। नवजात शिशु से लेकर 3 साल तक की उम्र के बच्चों के लिए 15-17 घंटे तक सोना आवश्यक होता है। 4 साल से लेकर टीन ऐज यानि 13-14 साल तक की उम्र के बच्चों के लिए 9-11 घंटे सोना सामान्य है।

पैदा होने से लेकर, बचपन और टीन ऐज तक बॉडी में तेजी से ग्रोथ होती है, जिसके लिए नींद के पर्याप्त घंटे जरूरी है। इसके बाद 15-65 साल की उम्र के एक सामान्य व्यक्ति को अच्छे Health के लिए 6-9 घंटे सोना जरुरी है। आइए ज्यादा देर तक सोने से होने वाले प्रॉब्लम, बीमारियों के बारे में व ज्यादा सोने की आदत से बचने के उपाय जानें।

1) शरीर में आलस बना रहना | Jyada sone ke nuksan in hindi

ज्यादा सोने का एक सबसे बड़ा नुकसान ये है कि व्यक्ति के शरीर में अनावश्यक आलस बना रहता है। यह देखा गया है कि अधिक सोने वाले ज्यादातर लोग उठने के बाद बहुत आलस और भारीपन महसूस करते हैं, जैसे कोई नशा किया हो। ये आलसपन कई बार नहाने के बाद भी नहीं जाता और आधा दिन निकलने के बाद ही व्यक्ति सामान्य महसूस कर पाता है।

Adhik sone se hone wale nuksan

2) दिमाग पर पड़ता है बुरा असर

वैज्ञानिकों ने एक स्टडी में पाया कि आवश्यकता से अधिक सोने वाले लोगो में टेंशन, डिप्रेशन का शिकार होने की सम्भावना अधिक होती है. 9 घंटे से ज्यादा सोने से दिमाग की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है, दिमाग सुस्त होने लगता है. अच्छे मानसिक स्वास्थ्य (Mental health)  के लिए थकान लगने पर सोना चाहिए और अनावश्यक सोने, आलस करने से बचना चाहिए.

3) औरतों ध्यान दें

अधिक सोने वाली स्त्रियों की गर्भधारण क्षमता प्रभावित होती है. वैज्ञानिकों के अनुसार इस स्लीप पैटर्न से हार्मोन स्राव, मेंसट्रूअल साइकिल प्रभवित होता है, जिससे फर्टिलिटी (Fertility) घट सकती है.

4) डायबिटीज जैसे बीमारियों को निमंत्रण

ज्यादा सोना शरीर में ब्लड-शुगर लेवल को असंतुलित करता है, जिससे Type 2 Diabetes बीमारी हो सकती है. अधिक सोने वाले व्यक्ति हृदय की बीमारी जैसे कोरोनरी हार्ट डिजीज, हार्ट स्ट्रोक, एनजाइना का भी शिकार हो सकते हैं.

5) मोटापा और वजन बढ़ना

वजन बढ़ने और ज्यादा सोने का तो सीधा सम्बन्ध है. सोते समय हमारी सभी उपापचय क्रियाएँ (Metabolism) धीमी पड़ जाती है। सोने में शरीर की बहुत कम ऊर्जा खर्च होती है, जिससे कम कैलोरीज बर्न होती है। फलतः अनावश्यक Fat शरीर में बढ़ने लगता है।

7) अधिक सोना मतलब जल्दी मृत्यु

रिसर्च में एक आश्चर्यजनक फैक्ट यह पाया गया कि ज्यादा सोने वालों की मृत्यु अपेक्षाकृत जल्दी होती है. तो ये वहम आप मन से निकाल दें कि ज्यादा सोने से लोग लम्बी उम्र पा सकते हैं. लम्बी उम्र पाने वाले दुनिया के कई बुजुर्गों ने अपनी लम्बी उम्र का राज सक्रिय और संतुलित जीवन बताया है.

8) शरीर का सिस्टम डिस्टर्ब

अनावश्यक सोना हमारे शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक की प्रणाली को असंतुलित करता है। जिसके दुष्परिणाम आलस बना रहना, सुस्ती, मूड खराब होना, सरदर्द, पीठदर्द, थका-थका सा अनुभव करने के रूप में सामने आते हैं.

9) फालतू सपने आना

आयुर्वेद के अनुसार किसी भी नियम, वस्तु का असंतुलित पालन, उपयोग बीमारी को आमंत्रण देता है. अनावश्यक सोने से सपने भी अधिक आते हैं और सपने आना (Dreams) अच्छी नींद का लक्षण नहीं माना जाता. अच्छी नींद का मतलब होता है कि जब आँख खुले तो आप अपने आप को तरोताजा महसूस करें.

ज्यादा सोने के कारण व ज्यादा नींद लाने वाली बीमारियाँ

  • सोने का बिस्तर या जगह बदलना
  • सोने-जगने का शेड्यूल बदलना
  • बंद, अंधेरे कमरे में सोना जहाँ ताजी हवा, प्रकाश न आता हो
  • भारी भोजन वाला डिनर या ओवरइटिंग (जरूरत से ज्यादा खाना)
  • नशा करना
  • देर रात तक जगने की आदत
  • घंटों मोबाइल देखना
  • आरामतलब लाइफस्टाइल यानी फिज़िकल ऐक्टिविटी कम करना
  • शरीर में ज्यादा फैट होना आदि

कुछ ऐसी बीमारियाँ भी होती हैं जिसमें नींद ज्यादा आती है जैसे Hyperthyroidism, Chronic pain, ऐल्कहॉल और नशीले ड्रग्स के साइड इफेक्ट, सिर में ट्यूमर या चोट लगना, तनाव या उलझन-बेचैनी जैसे मानसिक रोग, दवाइयों के साइड इफेक्ट आदि। इसलिए अगर सभी उपाय करने से भी नींद का समय कम न हो पा रहा हो तो ऐसे में ज्यादा सोने की आदत कंट्रोल करने के लिए डॉक्टरी सलाह लेना चाहिए। कुछ लोगों को Narcolepsy, Sleep apnea जैसा कोई Sleep disorder भी हो सकता है, जिसकी जांच व इलाज कराना चाहिए।

ज्यादा सोने से कैसे बचें और सोने के घंटे कम करने के उपाय

ज्यादा सोने की आदत दूर करने के लिए अच्छी लाइफस्टाइल, सही भोजन, अच्छी आदतें, योग-प्राणायाम करने जैसे उपाय हैं। खाना समय से खाएं, रात का खाना बहुत गरिष्ठ न हो, प्रतिदिन व्यायाम करें, सोने और भोजन के बीच में 1-1.5 घंटे का गैप (अन्तराल) हो। ये नियम एक स्वस्थ नींद के सहायक हैं। दिन में पानी खूब पियें। रोज सुबह-शाम खाली पेट, गहरी सांस लेने वाले योग जैसे अनुलोम-विलोम, प्राणायाम, शारीरिक व्यायाम करें।

अधिकतर लोग केवल आदतवश ही ज्यादा सोते (Oversleeping) हैं, जिसे 15-20 दिन में धीरे-धीरे कम करते हुए सामान्य, स्वस्थ नींद के स्तर पर लाया जा सकता है। इसके लिए रोजाना सोने के पहले खुद को किसी निश्चित समय उठने को बोले, जैसे मुझे सुबह 6 बजे या 7 बजे उठना है और कल्पना करें कि आप सुबह उठे और घड़ी में देखा तो ठीक 6 बज रहे हैं। हमारा अवचेतन मन (Subconscious mind) का बॉडी क्लॉक से संबंध होता है, हम भले सो जाते हैं लेकिन दिमाग के कुछ हिस्से हमेशा ऐक्टिव रहते हैं। इसे रोजाना करें, मनचाहा रिजल्ट न मिलने पर भी बंद न करें। आप अलार्म लगाकर उठना भी ट्राई कर सकते हैं।

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source : https://www.webmd.com/

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