अरोमाथेरेपी क्या है व अरोमाथेरेपी में प्रयुक्त 5 खुशबु के फायदे

अरोमाथेरेपी क्या है और इसके फायदे :

अरोमा थेरेपी एक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति है जिसमे कुछ शारीरिक-मानसिक व्याधियों का का उपचार किया जाता है. अरोमा थेरेपी (Aromatherapy) में बीमारियों का इलाज़ तरह तरह की खुशबुओं से किया जाता है.

जीवन में खुशबु /अच्छी महक  के असर से हम सभी वाकिफ हैं. खाने की अच्छी खुशबु, फूलों की महक से जहाँ हमारा दिलो-दिमाग प्रसन्नचित्त हो जाता है, वहीं किसी बदबू की वजह से हमारा चित्त घृणा, उलझन के भाव से भर जाता है. अरोमा थेरेपी खुशबुओं का विज्ञान है, जो यह बताता है कि कई खुशबुएँ शारीरिक-मानसिक व्याधियों से ग्रस्त व्यक्ति को राहत दिला सकती हैं.

अरोमा थेरेपी में प्रयोग की जाने वाली कई खुशबुओं से हम परिचित हैं, परन्तु उनसे हमारे चित्त पर पड़ने वाले कुछ खास प्रभाव से जनसामान्य अनभिज्ञ है. अरोमा थेरेपी उपचार काफी सरल है और आप अरोमा थेरेपी के किसी एक्सपर्ट या स्वयं भी लक्षणों के अनुसार इसका प्रयोग कर सकते हैं.

अरोमाथेरेपी में उपचार कैसे किया जाता है ?

 अरोमा थेरेपी में खुशबुओं का प्रयोग कई प्रकार से किया जाता है. उदाहरण के तौर पर जैसे गुलाब की खुशबु

 गुलाब के इत्र/परफ्यूम, तेल, अगरबत्ती प्रयोग करिए, इत्र की बूंदे तकिये पर छिड़क सकते हैं

 गुलाबजल नहाने के पानी में मिला के नहाइए.

 गुलाब के तेल को किसी हल्की खुशबु वाले तेल में मिलाकर मालिश कर सकते हैं.

इस लेख में हम आपको अरोमा थेरेपी में प्रयोग की जाने वाली कुछ खुशबुओं और उनसे व्याधि-विशेष पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में बतायेंगे :- 

गुलाब की खुशबु

गुलाब (Rose) : गुलाब की खुशबु से पित्त दोष की शांति होती है. गुलाब की महक से चिंता, स्ट्रेस, डिप्रेशन, पाचन की समस्या में आराम मिलता है. लडकियों और महिलाओं की समस्याओं के लिए गुलाब की महक खास कारगर होती है. इसके अलावा गुलाब रक्त संचार, ह्रदय की समस्या, श्वास रोग जैसे अस्थमा में राहत दिलाता है. ध्यान रखने वाली बात यह है कि औरतों को गर्भावस्था के दौरान गुलाब की खुशबू का प्रयोग नहीं करना चाहिए.

नीबू की गंध

नीम्बू (Lemon) : नीबू की महक दिमाग की उथल-पुथल को शांत करके मानसिक स्पष्टता देती है. इसके अतिरिक्त नींबू की खुशबू का प्रयोग ध्यान केन्द्रित करने, आर्थराइटिस की समस्या, मुहांसों को दूर करने और पाचन समस्या में किया जाता है. नींबू की महक सरदर्द दूर करती है, बिगड़े हुए मूड को भी फ़ौरन ठीक करती है. नीम्बू की खुशबु इम्यून सिस्टम ( रोग प्रतिरोधक तंत्र ) को मजबूत करती है.

अरोमाथेरेपी चन्दन

चन्दन (Sandalwood) : चन्दन की खुशबु वाले प्रोडक्ट्स प्रयोग करने से मन को शांति मिलती है. चन्दन की महक तंत्रिका तंत्र को शांत करता है. इसकी खुशबु से मूत्र मार्ग के रोग, सीने का दर्द, टेंशन में आराम मिलता है. चन्दन के तेल की मालिश सूजन कम करती है और त्वचा का रूखापन दूर करती है. चन्दन की खुशबू का पूजा-पाठ, ध्यान और योग में बड़ा महत्व है. इसकी खुशबु से आध्यात्मिक मनोस्थिति बनती है.

यूकेलिप्टस के तेल का प्रयोग

यूकेलिप्टस (Eucalyptus) : यह खुशबू और इसका प्रयोग तो ज्यादातर लोग जानते ही है. यूकेलिप्टस की खुसबू जुकाम, कफ़ समस्या, बंद नाक, सीने की जकड़न में राहत दिलाती है. ज्यादातर बाम और मलहम में इसका उपयोग किया जाता है. यूकेलिप्टस की खुशबु सरदर्द, दांतदर्द, माइग्रेन और मानसिक थकान में आराम दिलाती है.

Chameli ka fool ki mehak ka asar

चमेली (Jasmine) : चमेली की महक का प्रयोग डिप्रेशन दूर करने, सरलतापूर्वक प्रसव कराने में, किसी आदत से छुटकारा पाने में, श्वास रोग में किया जाता है. गर्भवती महिलाओं को इसके प्रयोग से बचना चाहिए.

 

3 comments

  1. बहुत अच्छी जानकारी है। ऐसे post शेयर करते रहें।

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