जब डॉ विश्वेश्वरैया ने ट्रेन एक्सीडेंट से पहले ट्रेन रोक दी, एक रोचक घटना

Dr Visvesvaraya story in Hindi :

डॉ विश्वेश्वरैया एक महान इंजीनियर, राजनेता और मैसूर के दीवान थे. भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित डॉ विश्वेश्वरैया के जीवन से जुड़ी यह रोचक घटना पढ़िए :-

आधी रात का समय था. रात्रि के शांत अँधेरे में शोर मचाती हुई एक ट्रेन अपने गन्तव्य की ओर चली जा रही थी. एक व्यक्ति ट्रेन के डिब्बे में खिड़की से सिर टिकाकर सो रहा था. अचानक उसकी नींद खुल गयी.

वो एकदम से उछलकर अपनी सीट से उठा और सर के ऊपर लटक रही खतरे की जंजीर खींच दी. चेन खींचते ही ट्रेन धीमी होने लगी और थोड़ी दूर चल कर रुक गयी. ट्रेन के कर्मचारी, सहयात्री और अन्य डिब्बों के लोग उस डिब्बे में यह जानने के लिए गये कि क्या हुआ.

कुछ लोगों को ये लगा कि शायद इस आदमी ने नींद के झोंके में चेन खींची होगी. ये सोचकर वो गुस्से में भी आ गये. आखिर सभी लोगों ने उस आदमी को घेरकर पूंछा कि आखिर उसने ट्रेन क्यूँ खींची.

उस व्यक्ति ने आराम से जवाब दिया – ट्रेन ट्रैक में कुछ मीटर आगे एक क्रैक है. अगर ट्रेन उसके ऊपर से गुजरती तो अनहोनी घट सकती थी.

लोग इस बात से चौंक पड़े, वो बोले – क्या बात कर रहे हो. इस अंधेरी रात में, ट्रेन में बैठे बैठे आपको कैसा पता चल गया कि ट्रेन के आगे पटरी में क्रैक है ? क्या मजाक कर रहे हो !

चेन खींचने वाला आदमी बोला – जी नहीं. मुझे चेन खींचने और सबको परेशान करने का कोई इरादा नहीं है. आप लोग जाकर ट्रैक चेक करिए, उसके बाद मुझे बताइयेगा.

रेलवे के कर्मचारी ट्रेन से उतर कर टॉर्च लेकर ट्रैक चेक करने लगे. सभी के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा जब उन्होंने देखा कि वाकई ट्रेन जहाँ रुकी थी, उससे थोड़ी ही दूर पर ट्रैक में गहरा क्रैक था. अगर ट्रेन क्रैक के ऊपर से गुजरती तो उस अँधेरे, सूनसान इलाके में अवश्य ही बड़ी दुर्घटना घट जाती.

सभी लोग फिर से वापस उसी आदमी के पास पहुंचे जिसने इस बात की पूर्वसूचना दी थी. लोगों के पूछा कि आखिर आपको यह बात पहले ही कैसे पता चल गयी.

उस व्यक्ति ने बताया वो सोते हुए ट्रेन और ट्रैक की आवाज़ सुन रहा था और अचानक ही वह आवाज़ बदल गयी थी. ट्रैक के कम्पन से होने वाली आवाज़ में अचानक आये बड़े बदलाव से उसे पता चल गया कि ट्रैक में आगे अवश्य ही बड़ा क्रैक है.

आश्चर्यजनक रूप से ट्रेन एक्सीडेंट रोकने वाला यह व्यक्ति कोई और नहीं महान भारतीय इंजीनियर डॉ मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया ही थे.

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