पानी की कमी से होने वाले रोग जानिए

बहुत से लोग डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) या शरीर में पानी की कमी हो जाने को गंभीरता से नहीं लेते. उन्हें लगता है कि ऐसा रेगिस्तान में ही हो सकता है कि कोई पानी की कमी के कारण जान से हाथ धो बैठे. शरीर में पानी की कमी से कई रोग भी हो सकते हैं. 

लेकिन अनेक कारणों से शरीर में पानी की क्रोनिक कमी हो सकती है जिसके गंभीर दुष्परिणाम हो सकते हैं और यह ज़रूरी नहीं है कि इसके लक्षण एकाएक ही प्रकट हों. क्रोनिक डिहाइड्रेशन बहुत व्यापक समस्या बनता जा रहा है और यह उन व्यक्तियों को प्रभावित करता है जो पर्याप्त मात्रा में जल ग्रहण नहीं करते.

Pani ki kami se rog

शरीर में पानी की कमी से होने वाले रोग :

क्रोनिक डिहाइड्रेशन के फलस्वरूप होनेवाले 13 प्रमुख लक्षणों पर विचार करें और नियमित अंतराल पर पानी पीने को अपनी आदत में शामिल करें. प्रत्येक लक्षण यह बताता है कि शरीर में पानी की सतत कमी होते जाना स्वास्थ्य को किस प्रकार प्रभावित कर सकता हैः

थकान और ऊर्जा की कमी शरीर के ऊतकों (टिशू) में पानी की कमी होने से एंजाइमेटिक गतिविधि धीमी हो जाती है.

असमय वृद्धावस्था –नवजात शिशु के शरीर में जल की मात्रा 80 प्रतिशत होती है जो कि वयस्क होने तक घटते-घटते 70 प्रतिशत रह जाती है और उम्र बढ़ने के साथ-साथ और घटती जाती है.

मोटापा –हम प्रायः नम और तरल भोजन लेना पसंद करते हैं इसीलिए आवश्यकता से अधिक भोजन कर लेते हैं क्योंकि प्यास को लोग कई बार भूख समझ लेते हैं.

हाई और लो ब्लड प्रेशर – शरीर में पानी की कमी होने पर रक्त की मात्रा धमनियों, शिराओं और रक्त वाहिनीयों के तंत्र को पूरी तरह से भरने के लिए पर्याप्त नहीं होती.

कोलेस्ट्रॉल –डिहाइड्रेशन होने से कोशिकाओं के भीतर स्थित द्रव कम हो जाता है. शरीर अधिक कोलेस्ट्रॉल का निर्माण करके इस नुकसान की भरपाई करने का प्रयास करता है.

कब्ज –जब चबाया हुआ भोजन आंतों में प्रवेश करता है तो इसमें मौजूद द्रव के कारण मल भली भांति बनता है और आंत पानी को सोख लेती हैं. पुराने कब्ज में आंतें शरीर के अन्य अंगों को पानी उपलब्ध कराने के लिए पानी को अधिकता से सोखने लगती हैं.

पाचन विकार –क्रोनिक डिहाइड्रेशन में पेट में पाचक रसों का निर्माण घट जाता है.

Sardi me bhi khoob pani piyen

गैस्ट्राइटिस (Gastritis) पेट के अल्सर –पेट (आमाशय) की म्यूकस झिल्ली भीतरी सतह को अम्लीय पाचक रसों द्वारा नष्ट हो जाने से बचाने के लिए म्यूकस की एक परत हमेशा स्त्रावित होती रहती है. पानी की कमी से अम्ल बनने की गति बढ़ जाती है और पेट में छाले हो जाते हैं.

सांस संबंधित कठिनाइयां –फेफड़ो की भीतरी म्यूकस झिल्ली भी सांस के रास्ते भीतर आनेवाले कणों को जकड़ लेती है. पानी की कमी से इसकी क्षमता भी प्रभावित होती है.

एसिड-क्षार का असंतुलन –डिहाइड्रेशन होने से एंजाइम गतिविधियां सुस्त हो जाती हैं जिससे शरीर में एसिड बनना शुरु हो जाता है.

एक्जिमा –त्वचा की नमी बनाए रखने के लिए एक दिन शरीर में पानी की 20 से 24 औंस पसीना बनना ज़रूरी है जो एसिड की तीव्रता को कम करता है. इस दर में कमी आने से त्वचा में खारिश-खुजली होने लगती है.

सिस्टाइटिस (Cystitis) और यूरिन इन्फेक्शन्स –पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहने से मूत्र में मौजूद एसिड और टॉक्सिन आदि बाहर निकलते रहते हैं और उनकी तीव्रता नहीं बढ़ती. इससे यूरिन सिस्टम की म्यूकस झिल्लियां सुरक्षित रहती हैं.

गठिया –डिहाइड्रेशन से रक्त और शरीर के अन्य द्रवों में टॉक्सिन का कंसेन्ट्रेशन बढ़ जाता है जिससे गठिया का दर्द भी उसी अनुपात में बढ़ता जाता है.

कितना पानी पिएं :

हस सभी सांस लेने, पसीना बहने और मल-मूत्र त्यागने के कारण अपने शरीर का पानी खोते रहते हैं. शरीर की सभी गतिविधियां भलीभांति चलती रहें इसके लिए यह ज़रूरी है कि हम शरीर में हमेशा कम होती जा रही पानी की मात्रा की भरपाई पानी पीकर तथा तरल भोजन लेकर करते रहें.

वयस्क स्वस्थ व्यक्ति को कितने लीटर पानी पीना चाहिए :

इन्स्टीट्यूट ऑफ़ मेडिसिन के अनुसार संतुलित तापमान और वातावरण में पुरुषों के लिए पानी का यथेष्ट इनटेक (adequate intake = AI) लगभग 3 लीटर है. स्त्रियों के लिए इसकी मात्रा 2.2 लीटर है. इसमें अन्य द्रव पदार्थ जैसे चाय, कॉफ़ी, जूस आदि की मात्रा भी शामिल है.

Source

Keywords: Pani ki kami in hindi, Pani ki kami se rog, Pani ki kami se hone wali bimari, Body me pani ki kami

Shabdbeej 2015-2016 © All rights reserved.