भविष्य पुराण की 5 अचूक भविष्यवाणियाँ पढ़ें

Bhavishya Puran – इस पुराण में भविष्य और वर्तमान युग के बारे में भविष्यवाणियां और घटनाओं का वर्णन है। हिन्दू पुराणों में कलयुग के वर्णन के साथ ही वर्तमान युग के बारे में भी विस्तार से मिलता है। भविष्य पुराण के अनुसार इसके श्लोकों की संख्या 50,000 के लगभग होनी चाहिए, परंतु वर्तमान में कुल 14,000 श्लोक ही उपलब्ध हैं।

भविष्य पुराण 4 प्रमुख पर्वों (ब्रह्म, मध्यम, प्रतिसर्ग तथा उत्तर) में विभाजित है। ऐतिहासिक घटनाओं का वर्णन प्रतिसर्ग पर्व में वर्णित है। इसके प्रतिसर्ग पर्व के 3 तथा 4 खंड में इतिहास की जानकारी दी गई है। भविष्य पुराण में भारत के राजवंशों और भारत पर शासन करने वाले विदेशियों के बारे में स्पष्ट उल्लेख मिलता है।

भविष्य पुराण की कुछ प्रमुख भविष्यवाणियाँ – Bhavishya Puran in hindi

1) ईसा मसीह का उल्लेख : इस पुराण में ईसा मसीह का जन्म, उनकी हिमालय यात्रा और तत्कालीन सम्राट शालिवाहन से भेंट के बारे में काफी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई हैं, जिसे आधुनिक रिसर्च के बाद प्रमाणित भी किया जा चुका है। भविष्य पुराण के प्रतिसर्ग पर्व के खंड 3 के अध्याय 2 के श्लोक में ऐसा ही उल्लेख है जिसमें ईसा मसीह के लंबे समय तक भारत के उत्तराखंड में निवास करने और तपस्यारत रहने का वर्णन है।

उस समय उत्तरी भारत में शालिवाहन का शासन था। एक दिन वे हिमालय गए जहां लद्दाख की ऊंची पहाड़ियों पर उन्होंने एक गौरवर्ण दिव्य पुरुष को ध्यानमग्न अवस्था में तपस्या करते हुए देखा। समीप जाकर उन्होंने उनसे पूछा – आपका नाम क्या है और आप कहां से आए हैं?

उस पुरुष ने उत्तर दिया- ‘मेरा नाम ईसा मसीह है। कुंवारी मां के गर्भ से उत्पन्न हुआ हूं। विदेश से आया हूं जहां बुराइयों का अंत नहीं है। उन आस्थाहीनों के बीच मैं मसीहा के रूप में प्रकट हुआ हूं। कहा गया है – ‘म्लेच्छदेश मसीहो हं समागत।। ईसा मसीह इति च ममनाम प्रतिष्ठितम् ।।

Bhavishya Puran in hindi

2) वर्तमान कलयुग का वर्णन – ‘रविवारे च सण्डे च फाल्गुनी चैव फरवरी। षष्टीश्च सिस्कटी ज्ञेया तदुदाहार वृद्धिश्म्।।” अर्थात भविष्य में अर्थात आंग्ल युग में जब देववाणी संस्कृत भाषा लोपित हो जाएगी, तब रविवार को ‘सण्डे’, फाल्गुन महीने को ‘फरवरी’ और षष्टी को सिक्स कहा जाएगा।

भविष्यपुराण में बताया गया है कि कलयुग में लोगों के दिलों में छल होगा और अपनों के लिए भी लोगों के दिलों में जहर भरा होगा। अपनों का भी बुरा करने से कलयुग के लोग घबराया नहीं करेंगे। दूसरों का भी हक़ खाने की आदत लोगों को हो जाएगी और चारों तरफ लूट ही लूट होगी।

कलयुग में हर व्यक्ति को किसी न किसी चीज का अहंकार होगा और वह खुद को इसलिए दूसरों से ऊपर समझने का काम करेगा। अहंकार की वजह से कलयुग में टकराव बढ़ जाएगा और यही वजह इन्सान के अंत की भी वजह रहेगी। भविष्यपुराण में साफ बताया गया है कि कलयुग में पैसा ही सबका बाप होगा। पैसे की चाहत इतनी मनुष्य को हो जाएगी कि वह पैसे के लिए किसी की जान तक ले लिया करेगा।

ब्रह्मा जी ने कहा-हे नारद! भयंकर कलियुग के आने पर मनुष्य का आचरण दुष्ट हो जाएगा और योगी भी दुष्ट चित्त वाले होंगे। संसार में परस्पर विरोध फैल जाएगा। द्विज (ब्राह्मण) दुष्ट कर्म करने वाले होंगे और विशेषकर राजाओं में चरित्रहीनता आ जाएगी। देश-देश और गांव-गांव में कष्ट बढ़ जाएंगे। साधू लोग दुःखी होंगे।

अपने धर्म को छोड़कर लोग दूसरे धर्म का आश्रय लेंगे। देवताओं का देवत्व भी नष्ट हो जाएगा और उनका आशीर्वाद भी नहीं रहेगा। मनुष्यों की बुद्धि धर्म से विपरीत हो जाएगी और पृथ्वी पर मलेच्छों के राज्य का विस्तार हो जाएगा। मलेच्छ का अर्थ होता है दुष्ट, नीच और अनार्य।

जब हिन्दू तथा मुसलमानों में परस्पर विरोध होगा और औरंगजेब का राज्य होगा, तब विक्रम सम्वत् १७३८ का समय होगा। उस समय अक्षर ब्रह्म से भी परे सच्चिदानन्द परब्रह्म की शक्ति भारतवर्ष में इन्द्रावती आत्मा के अन्दर विजयाभिनन्द बुद्ध निष्कलंक स्वरूप में प्रकट होगी। वह चित्रकूट के रमणीय वन के क्षेत्र (पद्मावतीपुरी पन्ना) में प्रकट होंगे। वे वर्णाश्रम धर्म (निजानन्द) की रक्षा तथा मंदिरों की स्थापना कर संसार को प्रसन्न करेंगे। वे सबकी आत्मा, विश्व ज्योति पुराण पुरुष पुरुषोत्तम हैं। म्लेच्छों का नाश करने वाले बुद्ध ही होंगे और श्री विजयाभिनन्द नाम से संसार में प्रसिद्ध होंगे। (उ.ख.अ. ७२ ब्रह्म प्र.)

वह परब्रह्म पुरुष निष्कलंक दिव्य घोड़े पर (श्री इन्द्रावती जी की आत्मा पर) बैठकर, निज बुद्धि की ज्ञान रूपी तलवार से इश्क बन्दगी रूपी कवच और सत्य रूपी ढाल से युक्त होकर, अज्ञान रूपी म्लेच्छों के अहंकार को मारकर सबको जागृत बुद्धि का ज्ञान देकर अखण्ड करेंगे। (प्र. ३ ब. २६ श्लोक १)

3) भविष्य पुराण और इस्लाम : भविष्य पुराण में मुहम्मद के बारे में कहा गया है। इसी पुराण का निम्न श्लोक हम यहां प्रस्तुत कर रहे हैं, जो प्रतिसर्ग पर्व में वर्णित है। इस ग्रंथ के श्लोक को हम यहां यथावत उल्लेख कर रहे हैं लेकिन हम यह दावा नहीं करते कि संस्कृत के इस श्लोक की व्याख्‍या वहीं है जोकि श्लोक में है।

भविष्य पुराण पर्व 3, खंड 3, अध्याय 3 और मंत्र 5 से 8 तक इस बारे में उल्लेख मिलता है। भविष्य पुराण, द्वितिय खंड, प्रतिसर्ग अध्याय 3, अनुवादक पंडित बाबूराव उपाध्याय और प्रकाशक हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग से प्रकाशित पुस्तक के पृष्ठ नंबर 258 पर इसका जिक्र है।

लिंड्गच्छेदी शिखाहीन: श्मश्रुधारी सदूषक:।
उच्चालापी सर्वभक्षी भविष्यति जनोमम।।25।।
विना कौलं च पश्वस्तेषां भक्ष्या मतामम।
मुसलेनैव संस्कार: कुशैरिव भविष्यति ।।26।।
तस्मान्मुसलवन्तो हि जातयो धर्मदूषका:।
इति पैशाचधर्मश्च भविष्यति मया कृत:।। 27।। : (भविष्य पुराण पर्व 3, खंड 3, अध्याय 1, श्लोक 25, 26, 27)

व्याख्‍या : रेगिस्तान की धरती पर एक महामद जन्म लेगा , वो एक ऐसे धर्म की नींव रखेगा जिसके कारण मानव जाति त्राहिमाम् कर उठेगी। वो असुर कुल सभी मानवों को समाप्त करने की चेष्टा करेगा। उस धर्म के लोग अपने लिंग के अग्रभाग को जन्म लेते ही काटेंगे, उनकी शिखा (चोटी) नहीं होगी, वो दाढ़ी रखेंगे, पर मूंछ नहीं रखेंगे। वो बहुत शोर करेंगे और मानव जाति का नाश करने की चेष्टा करेंगे। राक्षस जाति को बढ़ावा देंगे एवं वे अपने को ‘मुसलमान’ कहेंगे और ये धर्म कालांतर में स्वत: समाप्त हो जाएगा।

4) अंग्रेज और मुगलों का वर्णन – इस पुराण में द्वापर, कलियुग के राजा तथा उनकी भाषाओं के साथ-साथ विक्रम-बेताल तथा बेताल पच्चीसी की कथाओं का विवरण भी है। सत्यनारायण की कथा भी इसी पुराण से ली गई है। इस पुराण में ऐतिहासिक व आधुनिक घटनाओं का वर्णन किया गया है। इसमें आल्हा-उदल के इतिहास का प्रसिद्ध आख्यान इसी पुराण के आधार पर प्रचलित है।

इस पुराण में नंद वंश, मौर्य वंश एवं शंकराचार्य आदि के साथ-साथ इसमें मध्यकालीन हर्षवर्धन आदि हिन्दू और बौद्ध राजाओं तथा चौहान एवं परमार वंश के राजाओं तक का वर्णन प्राप्त होता है। इसमें तैमूर, बाबर, हुमायूं, अकबर, औरंगजेब, पृथ्वीराज चौहान तथा छत्रपति शिवाजी के बारे में भी स्पष्‍ट उल्लेख मिलता है। श्रीमद्भागवत पुराण के द्वादश स्कंध के प्रथम अध्याय में भी वंशों का वर्णन मिलता है।

सन्‌ 1857 में इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया के भारत की साम्राज्ञी बनने और आंग्ल भाषा के प्रसार से भारतीय भाषा संस्कृत के विलुप्त होने की भविष्यवाणी भी इस ग्रंथ में स्पष्ट रूप से की गई है।

5) हिंदुकुश पर्वत का सत्य – भविष्य पुराण में जिक्र आता है कि एक समय जब हिन्दुस्तान की सीमा हिंदकुश पर्वत तक थी तो वहां प्रसिद्ध शिव मंदिर था। ऐसा कहा जाता है कि एक बार कुछ संत हिन्दकुश पर्वत पर शिव के दर्शन करने गए थे तो भगवान शिव ने उन्हे बताया था कि अब आप सभी यहां से लौट जाओ। मैं भी इस स्थान को सदा के लिए छोड़ रहा हूं। जाओ और सभी को बताओ कि अब यहां किसी को नहीं आना है। थोड़े दिनों में प्रलय की शुरुआत यहां होने वाली है।

कहा जाता है कि इसके बाद खलिफाओं के आक्रमण ने अफगान और हिन्दुकुश पर्वतमाला के पास रहने वाले 15 लाख हिन्दुओं का सामूहिक नरसंहार किया था। अफगान इतिहासकार खोण्डामिर के अनुसार यहां पर कई आक्रमणों के दौरान 15 लाख हिन्दुओं का सामूहिक नरसंहार किया गया था। इसी के कारण यहां के पर्वत श्रेणी को हिन्दुकुश नाम दिया गया, जिसका अर्थ है ‘हिंदुओं का वध।’ हालांकि कुछ संत लोग मानते हैं कि भगवान जब किसी स्थान से नाराज होते हैं तो वहां प्राकृतिक प्रलय आने लगती हैं। आज हिंद्कुश पर्वत और आसपास का क्षेत्र भूकंप के आने का केंद्र बना हुआ है।

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निष्कर्ष (Conclusion) – 

भविष्य पुराण में भविष्यवाणियों वाला भाग बहुत प्राचीन नहीं है और इसे ‘बृहत संहिता’ और ‘साम्ब पुराण’ से लिया गया है। कई विद्वानों और इतिहासकारों का इस विषय में मतभेद भी है। इस लेख का उद्देश्य मात्र आपको जानकारी देना है, किसी विचार को बढ़ावा देना नहीं है। भविष्य पुराण की भविष्यवाणी के संबंध में अपने विचार नीचे कमेन्ट करें और इस लेख को व्हाट्सप्प, फ़ेसबुक पर शेयर जरूर करें जिससे अन्य लोग ये लेख पढ़ सकें।

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