क्यों आज भी हम दूरदर्शन के अच्छे दिनों को भूल नहीं पाते ?

By | 25/09/2015

दूरदर्शन के सुनहरे दिन [ Golden days of Doordarshan] :

मेरी पीढ़ी का हर व्यक्ति यह बात को स्वीकार करेगा कि दूरदर्शन ने हमारे बचपन और जीवन में अनगिनत रंग भरे. क्योंकि वो यादें मन को आज भी महकाती हैं तो सोचा शेयर करके देखूं आपको कितना कुछ याद है और मुझे कितना कुछ भूल गया है बताइयेगा…

सुबह की शुरुआत :

जब Doordarshan अपना रिले शुरू करता था तो पहले एक छोटा सा गोला Feng shui के यिंग-यैंग ( Ying-yang) जैसा टीवी पर आता था और धीरे धीरे बजने वाला म्यूजिक. उस छोटे से गोले को बड़ा होकर दूरदर्शन का logo बनने में 5 मिनट भी नहीं लगते थे पर वो 5 मिनट सदियों से लम्बे लगते थे.

दूरदर्शन के लोगो के नीचे लिखा होता था सत्यम ,शिवम् ,सुन्दरम ,जिसका मतलब बड़े होने पर पता चला मुझे. इसका अर्थ है जो सत्य है ,कल्याणकारी है वही सुन्दर है. दूरदर्शन के पीछे का यह दर्शन (Philosophy) कितना सुन्दर है.

सुबह समाचार तो आते थे पर उसके बाद क्या…याद नहीं रहा. सुबह सवेरे एक बढ़िया stylish कार्यक्रम था. इसे होस्ट करती थी शिरीन और एक पुरुष एंकर (जिनका नाम याद नहीं ). झकाझक सफ़ेद कपडे पहने हुए, उर्दू बोलते हुए विपिन हांडा फिल्म समीक्षा करते थे. ज्ञान के साथ मनोरंजन वो भी छोटे से कार्यक्रम में, यही बातें Subah Savere को बेहतरीन बनाती थी. लकी अली (Lucky ali) एक जानेमाने गायक और हास्य कलाकार महमूद के बेटे हैं . उनको पहली बार सुबह सवेरे पर ही मैंने देखा और सुना था. ओ सनम वाला गाना सुनाया था उन्होंने जो पहली बार में ही मुझे उनका फैन बना गया था.

दूरदर्शन समाचार – Doordarshan News 

न्यूज़ शुरू होने से पहले एक छोटी सी jingle बजती थी और समाचार शुरू होता था. यह शुरुआत और म्यूजिक समय के साथ बदलती गयी, है ना ! . शम्मी नारंग, शोभना जगदीश, गजाला अमीन, वेद प्रकाश, साधना श्रीवास्तव, सलमा सुल्तान आदि News readers हुआ करते थे, जो कि बड़े Serious मालूम देते थे और शायद कभी ही मुस्कुराते दिखते हों. हाँ समाचार शुरू होने और अंत में एक बार पर वो भी फुल formality वाला.

दूरदर्शन के पुराने सीरियल

उन समाचार वाचको को लिए बड़ा आदर भाव था मेरे मन में. मै उनको किसी राष्ट्रीय नेता से कम नहीं समझता था. न तो वो कभी Arnab Goswami जैसे बहस न करते थे ना ही समाचार को sensational बनाने के लिये बातों के पुल बनाते थे. नमस्कार बोल कर सीधे सीधे समाचार बोला.. बस. 15 मिनट हिंदी और 15 मिनट अंग्रेजी में समाचार आते थे. Serial देखने के इंतज़ार में हम खाने की थाली के सहारे न्यूज़ देख ही लेते थे.

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जब चार लोग ( हाँ ! वही चार लोग जो कि सदियों से हर बच्चे, बूढ़े और जवान की जिंदगी को मुश्किल बनाते आये हैं ) बताते थे की हमारा बच्चा पूरी न्यूज़ देखता है और News देख कर उसके notes भी बनाता है (नोट्स शायद खुदको Genius दिखाने के लिए या School assembly में समाचार पढने के लिए) तब यह सुनकर मुझे बुरा नहीं लगता था बल्कि उस बेचारे पर तरस आती थी. धत्त तेरे की ! क्या जिंदगी जी रहा है बेचारा

फिल्म समाचार – Bollywood News

फिल्मों से जुडी न्यूज़ के नाम पर शायद बस राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की घोषणा होती थी या किसी बड़े हीरो हिरोइन के मृत्यु की सूचना. माइकल जैक्सन जब भारत आने वाला था और हम सबमे बड़ा उत्साह था. पर हम जानते थे दूरदर्शन तो भाव नहीं देने वाला Michael Jackson को, और यही हुआ भी. समाचार में बस गिन कर 5 सेकंड दिए गए जैक्सन जी को. चमचम ड्रेस पहने एक space craft में माइकल जी का आना और दो सेकंड का छोटा सा डांस स्टेप बस. कुल मिलाकर बस इतना ही दिखाया.

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समाचार देख कर हम लोगों के मन में भी उनकी नक़ल करने के सुविचार आते थे . अख़बार से समाचार कागज पर लिख कर, मेज कुर्सी लगाकर समाचार पढ़कर हमें असली में समाचार पढने का अनुभव होता था. बचपन की खासियत होती है हम जो भी कुछ अपने आस पास देखते है उसे पूरा करने या नक़ल करने की कोशिश करते हैं.

साधन न भी होतो क्या हुआ….सीमित साधन, उपजाऊ दिमाग की क्रिएटिविटी और बालमन तीनो मिलकर असलियत का एहसास करा देते थे.

दूरदर्शन मूक बधिर समाचार – News for hearing impaired :

दूरदर्शन एक जन प्रसारण का माध्यम था इसलिए समाज के सभी वर्ग की तरह मूक-बधिर लोगों के लिए रविवार को साप्ताहिक समाचार दोपहर में एक बजे के लगभग आते थे. इसमें दो एंकर होते थे, एक छोटे से बॉक्स में एक Aunty समाचार पढ़ती थी और बाकी fullscreen में एक मोटी सी आंटी हाथ के इशारों से उसे व्यक्त करती थी.

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हमारी generation का शायद ही कोई बच्चा ऐसा होगा जिसने उन्हें देखकर कभी उनकी नक़ल कॉपी करने की कोशिश न की हो.

यह देखकर राहत महसूस होती है कि आज भी Doordarshan के समाचार वैसे ही सीधे और सटीक होते है. ये सही है कि अनगिनत न्यूज़ चैनलों से हमें कई तरह के दृष्टिकोण जानने को मिलते है. Doordarshan एक national channel है जिसे आज भी भारत में सबसे ज्यादा देखा जाता है. दूरदर्शन की जिम्मेदारी होती है कि वो निष्पक्ष होकर समाचार दिखाए, इसीलिए दूरदर्शन बाकि चैनलों की तरह समाचार नहीं दिखाता है.

कृपया कमेंट करके इस टॉपिक से जुडी अपनी भी यादें बताएं

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2 thoughts on “क्यों आज भी हम दूरदर्शन के अच्छे दिनों को भूल नहीं पाते ?

  1. श्रवण कुमार

    बहुत अच्छा लगा । आपका ये लेख पड़कर। बचपन याद आ गया।

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