ऐसा क्या हुआ जो Satyajit Ray की Alien फिल्म कभी बन न सकी

By | 18/03/2016

सत्यजित रे भारत के ही नहीं विश्व के श्रेष्ठतम फिल्म डायरेक्टर्स में माने जाते हैं. Steven Spielberg और Martin Scorsese जैसे कितने ही शीर्ष डायरेक्टर्स और दुनिया भर के करोड़ों सिनेमा प्रेमी सत्यजित रे की फिल्मों और उनके डायरेक्शन के फैन हैं. सत्यजित रे ने कुल 36 फिल्मों का निर्देशन किया था.

satyajit ray indian alien film

फोटो स्रोत

पाथेर पांचाली’ सत्यजित रे की पहली ही फिल्म थी जिसने 11 International Awards जीते. यह क्लासिक फिल्म सिनेमा से जुड़े हर एजुकेशनल कोर्स का पार्ट बन चुकी है और सिनेमा इतिहास का मास्टरपीस मानी जाती है.

सत्यजित रे की एलियन फिल्म :

यह सब बातें तो संभवतः आपको पता हो, पर क्या आप ये जानते हैं कि सत्यजित रे ने सन 1967 में Alien पर आधारित एक फिल्म बनाने का भी न सिर्फ प्रयास बल्कि काफी मेहनत भी की. भारत में उस समय समुचित संसाधनों के आभाव को देखते हुए सत्यजित रे हॉलीवुड की मदद से यह फिल्म बनाना चाहते थे. इस फिल्म की स्क्रिप्ट खुद सत्यजित रे ने लिखी थी. फिल्म का प्रोडक्शन Hollywood Studio ‘कोलंबिया पिक्चर्स’ के अंतर्गत होने वाला था, पर यह प्लान कभी सम्भव नहीं हो पाया. ऐसा क्यों हुआ? इसके पीछे बहुत सी बातें, अफवाहें हैं.

ancient Aliens in india

फिल्म की स्क्रिप्ट ‘बंकूबाबुर बंधू’ (बंकू बाबू का मित्र) नामक कहानी पर आधारित थी. यह साइंस फिक्शन कहानी ‘सत्यजित रे’ ने सन 1962 में एक बंगाली मैगज़ीन के लिए लिखी थी जोकि काफी लोकप्रिय हुई थी. उस ज़माने में जहाँ एलियन से जुडी सभी फिल्मों की कहानी एलियन के पृथ्वी पर हमले से जुडी हुई थी, वहीं सत्यजित की कहानी इसके उलट एलियन और गाँव के एक लडके की दोस्ती की कहानी थी.

‘बंकूबाबुर बंधू’ की कहानी कुछ इस प्रकार है :-

बंगाल के किसी ग्रामीण इलाके के एक तालाब में एक एलियन स्पेसशिप उतरता है. गाँव वाले उसे धरती से उदय हुआ मंदिर मान कर उसकी पूजा करने लगते हैं. स्पेसशिप में एक एलियन भी आता है, जिसे कहानी में ‘मिस्टर एंग’ का नाम दिया गया है. मिस्टर एंग गाँव के ‘हाबा’ नामक एक लडके से स्वप्न के जरिये सम्पर्क स्थापित करता है और उनकी दोस्ती हो जाती है. बंगाली भाषा में ‘हाबा’ शब्द का अर्थ ‘मंद बुद्धि‘ होता है. यह एलियन धरती पर अपने थोड़े दिनों के प्रवास में गाँव वालों के साथ कई शरारतें भी करता है. कहानी के अन्य मुख्य पात्र थे, एक भारतीय बिजनेसमैन, कलकत्ता का एक पत्रकार और एक अमेरिकी इंजिनियर.

फिल्म के मुख्य किरदार हॉलीवुड के उस समय के टॉप एक्टर Marlon Brando, पीटर सेलर्स और जेम्स कुबार्न निभाने वाले थे. सत्यजित रे जब यह फिल्म बनाने Hollywood पहुंचे तो उनकी मुलाकात प्रोड्यूसर ‘माइक विल्सन‘ से हुई जिन्होंने इस कहानी में काफी रूचि दिखाई और सत्यजित से फिल्म स्क्रिप्ट लिखने को कहा. गडबडी तब शुरू हुई जब फिल्म की स्क्रिप्ट माइक विल्सन ने अपने और सत्यजित रे के नाम से कॉपीराइट करा ली.

कॉपीराइट अधिकार में भी विल्सन का नाम महज एक contributor के रूप में था, पर कुछ दिनों बाद जब सत्यजित रे हॉलीवुड गए तो उन्हें पता चला कि विल्सन ने उनकी स्क्रिप्ट के प्रतियाँ कई जगह बंटवा दी हैं. संभवतः विल्सन का विचार था कि इस कहानी को कोई अमेरिकी डायरेक्टर निर्देशित करे. विल्सन ने कॉपीराइट का उल्लंघन किया और सत्यजित रे के साथ सरासर धोखेबाजी की. सत्यजित समझ गए कि उनका यह स्वप्न अब पूरा नहीं हो पायेगा.

सन 1982 में जब स्टीवन स्पीलबर्ग की फिल्म E.T. the Extra-Terrestrial रिलीज़ हुई तो सत्यजित रे सहित हॉलीवुड के कई लोगो ने नोटिस किया कि सत्यजित रे की एलियन फिल्म  और E.T. the Extra-Terrestrial की स्क्रिप्ट में कई सारी समानताएं थी. हालाँकि स्टीवन स्पीलबर्ग ने हमेशा ही इस बात का खंडन किया पर सन 2010 में शीर्ष हॉलीवुड डायरेक्टर Martin Scorsese ने भी खुली तौर पर कहा कि स्टीवन की फिल्म सत्यजित की स्क्रिप्ट से ही प्रेरित थी.

चलिए हॉलीवुड न सही पर बॉलीवुड में कौन सी फिल्म इस कहानी से प्रेरित थी, क्या आपको अभी भी यह बताने की जरुरत है?

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अंत में हम आपको सत्यिजत रे की स्क्रिप्ट का एक छोटा सा सीन बताते है :

एलियन

आश्चर्यजनक तेजी से कमल के पत्तों पर छोटे छोटे कदम रखता हुआ एलियन तालाब के किनारे तक पहुँचता है. किनारे पहुच कर एलियन नीचे झुक कर बड़े ध्यान से घास को देखता और छूता है, फिर कूदते हुए बांस की झाड़ियों तक पहुचता है. वहां पर एलियन एक छोटा सा पौधा देखता है. एलियन की आँखें पीले रंग में चमकने लगती हैं. एलियन अपना हाथ पौधे के ऊपर फिराता है और फूल खिल जाते हैं. एलियन हलकी सी आवाज़ में हँसता है जिससे पता चलता है  कि वह खुश हुआ.

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