फारुख शेख़ दीप्ति नवल की 6 बेस्ट मूवीज़ YouTube पर | Farooq Shaikh Deepti Naval

फारुख शेख़ दीप्ति नवल की जोड़ी :

फारुख शेख़ और दीप्ति नवल समानांतर सिनेमा के सफलतम कलाकारों में माने जाते हैं. मसाला मूवीज कहें या फार्मूला फ़िल्में, यह ट्रेंड फिल्म जगत की खासियत रहा है. बॉलीवुड में भी ऐसे कई दौर रहे हैं जहाँ लगभग एक जैसी ही, मिलती- जुलती फिल्में साल-दरसाल बनती रहीं.

इन फिल्मों का हमेशा से बड़ा दर्शक वर्ग रहा है और ये कमाई भी बढ़िया करती है. इन फिल्मों को हम मुख्यधारा की फिल्में (Bollywood Mainstream Cinema) कहते हैं. इस मुख्यधारा के समानांतर भी एक फिल्म निर्माण परम्परा चलती चली आई है, जिसे समानांतर सिनेमा (Parallel Cinema) कहा गया.

समानांतर सिनेमा की खासियत मनोरंजक और मर्मस्पर्शी फिल्में, फ्रेश कहानियां, बेहतरीन निर्देशन, अच्छे कलाकार (हीरो-हिरोइन नहीं, अभिनेता-अभिनेत्री ) और कम बजट वाली फिल्में हुआ करती हैं.

फारुख शेख़ और दीप्ति नवल ने साथ में कई बढ़िया, सदाबहार फिल्में की हैं जोकि काफी लोकप्रिय हुईं. इस पोस्ट में हम फारुख शेख़ और दीप्ति नवल की 6 फिल्मों के बारे में बतायेंगे, जिन्हें आप YouTube पर मुफ्त में देख सकते हैं 

चश्मे बद्दूर 1981 – Chashme Buddoor Youtube :

2013 में इसी नाम से आई डेविड धवन की रीमेक फ्लॉप फिल्म ओरिजिनल फिल्म के सामने कही नहीं ठहरती. सन 1981 में आई फिल्म चश्मे बद्दूर की डायरेक्टर थीं सई परांजपे. अपनी बढ़िया कॉमेडी की वजह से चश्मे बद्दूर सिल्वर जुबली हिट फिल्म साबित हुई.

फिल्म की कहानी 3 दोस्तों के बारे में है जो गर्मियों की छुट्टियों में घर जाने के बजाय मौज-मस्ती कर रहे होते है. अचानक उनके जीवन में एक लडकी आती है, जिससे तीनो लडको की आपसी दोस्ती के समीकरण बड़ी तेजी से बदलते –बिगड़ते हैं. फारूख शेख़ के अलावा बाकि 2 दोस्तों के रोल में राकेश बेदी और रवि बासवानी हैं.

रंग-बिरंगी 1983 – Rang Birangi movie on Youtube :

हृषिकेश मुखर्जी की फिल्म ‘रंग बिरंगी’ की मुख्य कहानी परवीन बाबी और अमोल पालेकर के इर्द गिर्द घूमती है, पर फिल्म में दीप्ति नवल और फारूख शेख़ की भी महत्वपूर्ण भूमिका है. फिल्म में फारूख प्रोफेसर जीत सक्सेना और दीप्ति नवल उनकी गर्लफ्रेंड ‘अनीता सूद’ के रोल में हैं.

कथा 1983 – Katha movie on Youtube :

सन 1983 में आई सई परांजपे द्वारा निर्देशित और बेस्ट फिल्म के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित यह फिल्म ‘राजाराम’ नाम के एक क्लर्क के बारे में है. स्वभाव से शर्मीला ‘राजाराम’ (नसीरुद्दीन शाह) अपने पड़ोस में रहने वाली लडकी संध्या (दीप्ति नवल) से मन ही मन प्रेम करता है पर कभी जाहिर नहीं करता.

एक दिन उसका मित्र बासुदेव (फारूख शेख़) उसके साथ रहने के लिए आता है. तेज तर्रार बासुदेव बड़ी आसानी से संध्या को अपनी ओर आकर्षित कर लेता है और राजाराम भौचक्का रह जाता है. इसके आगे क्या होता है, जानने के लिए देखिये फिल्म ‘कथा’.

किसी से न कहना 1983 – Kissi Se Na Kehna on YouTube :

डायरेक्टर हृषिकेश मुख़र्जी की इस फिल्म के अन्य मुख्य कलाकार हैं उत्पल दत्त, सईद जाफरी, देवेन वर्मा. फिल्म की कहानी कुछ इस प्रकार है. कैलाशपति (उत्पल दत्त) एक विधुर, नौकरी से रिटायर्ड, पिता हैं जिन्हें आधुनिक युवाओं के चाल-चलन से बड़ी नफरत है.

अपने लडके रमेश (फारुख शेख़) को इस बुरे ज़माने की हवा न लग जाये, ऐसा सोचकर वह उसका शीघ्र विवाह ऐसी लडकी से कराना चाहते हैं जोकि एकदम पारंपरिक हो और अंग्रेजी भाषा तो जानती ही न हो. इसके उलट रमेश एक मॉडर्न ख्यालों वाली लडकी डॉ. रमोला (दीप्ति नवल) से प्रेम करता है और शादी करना चाहता है.

रमेश अपने पिता के मित्र लालाजी (सईद जाफरी) की मदद/जुगाड़ से रमोला से शादी कर लेता है व अपने पिता को यकीन भी दिला देता है कि वह गाँव के एक पंडित की लडकी है. पर कहा गया है न एक झूठ छिपाने को हजार झूठ बोलने पड़ते है.

साथ-साथ 1982 – Saath Saath on YouTube :

सन 1982 में आई फिल्म की कहानी कुछ इस प्रकार है. गीता (दीप्ति नवल) एक अमीर खानदान की लडकी है जोकि एक आदर्शवादी लडके अविनाश (फारुख शेख़) से प्रेम करती है और घर वालों के विरोध के बावजूद शादी कर लेती है. शादी के बाद अविनाश की सोच में ऐसा परिवर्तन आ जाता है कि गीता परेशान हो उठती है.

फिल्म के अन्य कलाकार हैं नीना गुप्ता, ए के हंगल, राकेश बेदी, सतीश शाह आदि. फिल्म की एक और खासियत गायक जगजीत सिंह – चित्रा सिंह द्वारा गायी यादगार गज़लें ‘तुमको देखा तो ये ख्याल आया’, ‘ये तेरा घर ये मेरा घर’ , ‘प्यार मुझे जो किया तुमने तो क्या पाओगी’ , ‘ये बता दे मुझे ज़िन्दगी’ और ‘यूँ ज़िन्दगी की राह में’ भी थे.

लिसेन अमाया 2013 – Listen Amaya on YouTube :

2013 में आई यह फिल्म फारूख शेख़ और दीप्ति नवल जोड़ी की आखिरी फिल्म थी. फिल्म की कहानी एक उभरती लेखिका ‘अमाया’ (स्वरा भास्कर) के बारे में हैं. अमाया की विधवा माँ लीला (दीप्ति नवल) एक लाइब्रेरी कैफ़े चलाती है. लीला की मुलाकात एक विधुर फोटोग्राफर जयंत (फारूख शेख़) से होती है और धीरे धीरे उनकी दोस्ती भावनात्मक सम्बन्ध के रूप में बदल जाती है. जब अमाया इस सम्बन्ध के बारे में जानती है तो वह इसे स्वीकार नहीं कर पाती.

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