Dilwara Temple photos Mt Abu Rajasthan

दिलवाड़ा मन्दिर : ताजमहल भूल जाओगे इस मंदिर के सामने | Dilwara Mandir Mount abu

दिलवाड़ा जैन मन्दिर Dilwara Jain Temple:-

राजस्थान के माउंट आबू में स्थित दिलवाड़ा मन्दिर प्राचीन भारत की अद्भुत निर्माण कला का आश्चर्यजनक उदाहरण है. इस मन्दिर में फोटो खींचने की मनाही है, इसी वजह से बहुत से भारतीय इस बेहतरीन मन्दिर से अनजान है. वैसे इन्टरनेट पर दिलवाड़ा मन्दिर की फ़ोटोज़ हैं, जिसे देखकर आप इसकी दैवीय सुन्दरता का अंदाजा लगा सकते हैं.

Dilwara temple interior images

इस मन्दिर की खूबसूरती के सामने ताजमहल की खूबसूरती भी फीकी पड़ती है. ताजमहल का निर्माण 16वीं शताब्दी में हुआ था. दिलवाड़ा मन्दिर का निर्माण 11वीं से 13वीं शताब्दी के बीच हुआ था. दिलवाड़ा मन्दिर भी संगमरमर का बना हुआ है.

-दिलवाड़ा मन्दिर 5 मन्दिरों का समूह है. यह मंदिर सोलंकी राजा वास्तुपाल और तेजपाल नामक दो भाइयों द्वारा बनवाया गया था. ये खूबसूरत मंदिर जैन धर्म के तीर्थंकरों पर आधारित हैं. ये 5 मन्दिर इस प्रकार हैं.

  1. विमल वसही मन्दिर  : प्रथम जैन तीर्थंकर ऋषभदेव
  2. लुन वसही मन्दिर       : 22वें जैन तीर्थंकर नेमीनाथ
  3. पीतलहर मन्दिर          : प्रथम जैन तीर्थंकर ऋषभदेव
  4. पार्श्वनाथ मन्दिर         : 23वें जैन तीर्थंकर पार्श्वनाथ
  5. महावीर स्वामी मंदिर : अन्तिम जैन तीर्थंकर महावीर
Dilwara Temple roof image
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– इनमें से विमल वसही मन्दिर सबसे प्राचीन है, जोकि 1031 ईसवी में बनाया गया था.

– यह मन्दिर बनाने में 1500 शिल्पकार और 1200 श्रमिकों की कड़ी मेहनत लगी है.

– दिलवाड़ा मन्दिर बनने में 14 साल लगे और करीब 18 करोड़ रुपये खर्च हुए थे.

– पीतलहर मन्दिर में ऋषभदेव की पंचधातु से बनी मूर्ति का वजन 4,000 किलोग्राम है.

– विमल वसही मन्दिर में लगी आदिनाथ मूर्ति की ऑंखें असली हीरे की बनी हुई हैं.

Dilwara Temple photos
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– बाहर से सामान्य लगने वाले इस मन्दिर की भीतरी बनावट लाजवाब है. ऐसा मन्दिर शायद ही आपने देखा हो. महीन पच्चीकारी और उत्कृष्ट मूर्तिकला का उदाहरण इस मन्दिर में देखने को मिलता है. दीवारों और छत पर बारीक नक्काशी बेहद सफाई से बनाई गयी है.

– मूर्तियों पर भाव एकदम सजीव लगते हैं और पॉलिशिंग इतनी चमकदार कि सैकड़ों वर्ष पुरानी होने के बाद भी नई लगती है. संगमरमर पर इतनी फाइन कारीगरी है कि लगता है जैसे वो पत्थर नहीं मोम हो. कोई भी आधुनिक मन्दिर दिलवाड़ा मन्दिर की स्थापत्य कला का मुकाबला नहीं कर सकता.

dilwara temple walls images

दिलवाड़ा मन्दिर बनाने का कारण :

दिलवाड़ा मन्दिर बनाने की शुरुआत सोलंकी राजा भीमदेव के महामंत्री विमलशाह ने की थी. राजा भीमदेव ने चन्द्रावती रियासत में भड़के विद्रोह को काबू करने के लिए विमलशाह को भेजा था. विद्रोह शांत करने में हुए रक्तपात से विमलशाह को बहुत ग्लानि का अनुभव हुआ. उन्होंने एक जैन साधक से इस पाप से मुक्ति और पश्चाताप का उपाय पूंछा. जैन साधक ने कहा – पाप से पूर्णतया मुक्ति तो आसान नहीं, परन्तु मन्दिर बनवाने से तुम कुछ पुण्य अवश्य अर्जित कर सकते हो. इसी प्रेरणा से विमलशाह ने मंदिर निर्माण प्रारंभ किया.

dilwara mandir murti photo

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