ऐसे अनोखे लोग जिनपर एड्स रोग है बेअसर | Aids Immune People

एड्स रोग | Aids disease :

एड्स एक लाइलाज बीमारी है जिससे दुनिया में हर वर्ष करीब 10 लाख लोगों की मृत्यु होती है. एड्स रोग एचआईवी वायरस के संक्रमण से होता है. एड्स का इलाज खोजने में दुनिया भर के वैज्ञानिक लगे हैं, पर अभी तक कोई ऐसी दवा या वैक्सीन नहीं बनी है जोकि एड्स पूर्णतया ठीक कर दे या एड्स होने ही न दे.

लेकिन क्या आप जानते हैं दुनिया की कुल आबादी के 1% लोग ऐसे भी हैं, जिनपर HIV वायरस का कोई असर ही नहीं होता. प्रकृति के इस छुपे रहस्य का पता कुछ वर्षों पहले ही चला है. इस पोस्ट में जानिए ये अद्भुत जानकारी.

एड्स क्या है ? एड्स जानलेवा क्यों हैं | What happen in Aids in Hindi

एचआईवी वायरस खून में पाए जाने वाली CD4+ T सफ़ेद रक्त कोशिकाओं की सतह पर पाए जाने वाले CCR5 प्रोटीन पर कब्जा करके कोशिका के अन्दर प्रवेश कर जाता है. जिसके बाद वो पूरे शरीर में फैलने लगता है. जब व्यक्ति पूर्णतः HIV वायरस से संक्रमित हो जाता है और शरीर में इसके लक्षण दिखने लगते हैं तो इसे एड्स की बीमारी कहा जाता है.

HIV Virus in hindi

सफ़ेद रक्त कोशिकाएं ही हमारे शरीर को रोगों से लड़ने की ताकत देती हैं. जब एचआईवी वायरस इन्हें कम करने लगता है तो व्यक्ति को कई तरह के अन्य रोग होने लगते हैं और शरीर कमजोर होता चला जाता है. इस कमजोरी से एड्स रोगी उबर नहीं पाता और उसकी मृत्यु हो जाती है.

एड्स प्रतिरोधी भाग्यशाली लोग | Aids Immune people

वैज्ञानिकों ने 2005 में इस तथ्य का पता लगाया कि मुख्यतः उत्तरी यूरोप और अफ्रीका, एशिया, मूल अमेरिकन जाति के कुछ लोगों के खून में CCR5-Delta32 नामक अद्भुत जीन म्युटेशन पाया जाता है. ऐसे लोग दुनिया की कुल आबादी का 1% से भी कम हैं. आज दुनिया की आबादी 760 करोड़ है तो लगभग 5-6 करोड़ लोग ऐसे हैं जोकि एड्स प्रतिरोधी हैं.

CCR5-Delta32 जीन म्युटेशन जिसके शरीर में होता है, उनमें CCR5 प्रोटीन सफ़ेद रक्त कोशिका की सतह पर पाया ही नहीं जाता. इस वजह से HIV वायरस कोशिका में प्रवेश नहीं कर पाता और बेअसर हो जाता है.

ऐसे भाग्यशाली लोगों को यह CCR5-Delta32 जीन म्युटेशन अपने माता-पिता दोनों से मिला होता है. अगर माता-पिता में से किसी एक से भी यह जीन म्युटेशन मिला हो तो भी बाकी जनता की तुलना में एड्स होने की सम्भावना बहुत-बहुत कम होती है.

रिसचर्स ने पता लगाया है कि ये जीन म्युटेशन सम्भवतः 15 सदी के आस-पास पहली बार कुछ मनुष्यों के शरीर में पैदा हुआ था. इस बात का अभी तक ठीक ठीक पता नहीं चल पाया है कि जिन लोगों में यह जीन म्युटेशन होता है, उन्हें यह पीढ़ी दर पीढ़ी क्यों और कैसे मिलता चला आ रहा है.

aids se bachne wale wale log

2008 में University of Manitoba में हुई एक स्टडी में पाया गया कि केन्या की कुछ महिला सेक्स वर्कर्स को एड्स नहीं हुआ, जबकि वो 3 साल से ऐसे कई लोगों के सम्पर्क थीं, जिनके शरीर में HIV वायरस थे.

एक और बात ! ऐसे ही एक भाग्यशाली एड्स प्रतिरोधी व्यक्ति की मदद से जर्मनी के बर्लिन शहर में रहने वाले टिमोथी रे ब्राउन का एड्स रोग ठीक हुआ. जी हाँ ! दुनिया में आज तक टिमोथी रे ब्राउन ही एक ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्हें एड्स रोग होने के बाद भी ठीक हो गया. इसकी जानकारी अगले लेख में.

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