एड्स रोग है बेअसर इन अनोखे लोगों पर | Aids Immune People in hindi

एड्स रोग | Aids disease in hindi :

Aids एक लाइलाज बीमारी है जिससे दुनिया में हर वर्ष करीब 10 लाख लोगों की मृत्यु होती है. एड्स रोग परीक्षण खोज करने का श्रेय फ्रेंच वायरोलोजिस्ट Luc Montagnier और Dr. Robert Gallo को जाता है. Aids एचईवी वायरस के संक्रमण से होता है. एड्स रोग शरीर के रोग प्रतिरोधक तंत्र को प्रभावित करता है. इससे शरीर में बीमारियों से बचाव की क्षमता घटने लगती है. एड्स का इलाज खोजने में दुनिया भर के वैज्ञानिक लगे हैं, पर अभी तक कोई ऐसी दवा या वैक्सीन नहीं बनी है जोकि एड्स पूर्णतया ठीक कर दे या एड्स होने ही न दे.

लेकिन क्या आप जानते हैं दुनिया की कुल आबादी के 1% लोग ऐसे भी हैं, जिनपर HIV वायरस का कोई असर ही नहीं होता. प्रकृति के इस छुपे रहस्य का पता कुछ वर्षों पहले ही चला है. इस पोस्ट में जानिए ये अद्भुत जानकारी.

एड्स क्या है ? एड्स जानलेवा क्यों हैं | What happen in Aids in Hindi :

एचआईवी वायरस खून में पाए जाने वाली CD4+ T सफ़ेद रक्त कोशिकाओं की सतह पर पाए जाने वाले CCR5 प्रोटीन पर कब्जा करके कोशिका के अन्दर प्रवेश कर जाता है. जिसके बाद वो पूरे शरीर में फैलने लगता है. जब व्यक्ति पूर्णतः HIV वायरस से संक्रमित हो जाता है और शरीर में इसके लक्षण दिखने लगते हैं तो इसे एड्स की बीमारी कहा जाता है.

HIV Virus in hindi

सफ़ेद रक्त कोशिकाएं (White blood cells) ही हमारे शरीर को रोगों से लड़ने की ताकत देती हैं. जब Hiv Virus इन्हें कम करने लगता है तो व्यक्ति को कई तरह के अन्य रोग होने लगते हैं और शरीर कमजोर होता चला जाता है. इस कमजोरी से एड्स रोगी उबर नहीं पाता और उसकी मृत्यु हो जाती है.

एड्स प्रतिरोधी भाग्यशाली लोग | Aids Immune in hindi :

वैज्ञानिकों ने 2005 में इस तथ्य का पता लगाया कि मुख्यतः उत्तरी यूरोप और अफ्रीका, एशिया, मूल अमेरिकन जाति के कुछ लोगों के खून में CCR5-Delta32 नामक अद्भुत जीन म्युटेशन पाया जाता है. ऐसे लोग दुनिया की कुल आबादी का 1% से भी कम हैं. आज दुनिया की आबादी 760 करोड़ है तो लगभग 5-6 करोड़ लोग ऐसे हैं जोकि एड्स प्रतिरोधी हैं.

CCR5-Delta32 जीन म्युटेशन जिसके शरीर में होता है, उनमें CCR5 प्रोटीन सफ़ेद रक्त कोशिका की सतह पर पाया ही नहीं जाता. इस वजह से HIV वायरस कोशिका में प्रवेश नहीं कर पाता और बेअसर हो जाता है.

ऐसे भाग्यशाली लोगों को यह CCR5-Delta32 जीन म्युटेशन अपने माता-पिता दोनों से मिला होता है. अगर माता-पिता में से किसी एक से भी यह जीन म्युटेशन मिला हो तो भी बाकी जनता की तुलना में Aids होने की सम्भावना बहुत-बहुत कम होती है.

रिसचर्स ने पता लगाया है कि ये जीन म्युटेशन सम्भवतः 15 सदी के आस-पास पहली बार कुछ मनुष्यों के शरीर में पैदा हुआ था. इस बात का अभी तक ठीक ठीक पता नहीं चल पाया है कि जिन लोगों में यह जीन म्युटेशन होता है, उन्हें यह पीढ़ी दर पीढ़ी क्यों और कैसे मिलता चला आ रहा है.

aids se bachne wale wale log

2008 में University of Manitoba में हुई एक स्टडी में पाया गया कि केन्या की कुछ महिला सेक्स वर्कर्स को एड्स नहीं हुआ, जबकि वो 3 साल से ऐसे कई लोगों के सम्पर्क थीं, जिनके शरीर में HIV वायरस थे.

एक और बात ! ऐसे ही एक भाग्यशाली एड्स प्रतिरोधी व्यक्ति की मदद से जर्मनी के बर्लिन शहर में रहने वाले टिमोथी रे ब्राउन का एड्स रोग ठीक हुआ. जी हाँ ! दुनिया में आज तक टिमोथी रे ब्राउन ही एक ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्हें Aids होने के बाद भी ठीक हो गया. इसकी जानकारी अगले लेख में.

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