कम उम्र में गठिया से बचने के 4 उपाय | Arthritis in Young adults

Arthritis in young people in hindi – कम उम्र गठिया से बचाव के उपाय :

अगर आपको ये लगता है कि संधिवात, गठिया या आर्थ्राइटिस (Arthritis) बुढ़ापे में होनेवाला रोग है तो इस लेख को ध्यान से पढ़ें. आजकल अलग-अलग तरह के गठिया अब जवान लोगों को भी प्रभावित कर रहे हैं.

इसलिए यदि आप इस Young Age Arthritis  के शिकार बनने से खुद को बचाना चाहते हैं तो आपको 4 उपाय करने होंगे.

CDC (Center for Disease Control) ने कई स्टडीज़ से निकले रिजल्ट के आधार पर आर्थ्राइटिस से होनेवाले खतरों का एनालिसिस किया है. उनके निष्कर्षों के मुख्य बिंदु ये हैं :-

– अनुमान लगाया गया है कि अगले 2 दशकों में 18 साल से अधिक उम्र वाले करोड़ों लोग आर्थ्राइटिस की गिरफ्त में होंगे.

  • हर 5 में से 1 व्यस्क में आर्थ्राइटिस के लक्षण देखे जा रहे हैं.
  • 65 वर्ष से अधिक के 50% लोगों में आर्थ्राइटिस देखा गया है.
  • 4 में से 1 व्यक्ति को कूल्हे का गठिया (Hip arthritis) हो सकता है.
  • 85 वर्ष का होने पर आधे लोगों को घुटनों में ऑस्टियोआर्थ्राइटिस (symptomatic knee osteoarthritis) हो सकता है.

इन फ़ैक्टस से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि ज्यादातर लोगों को Arthritis होने का खतरा वाकई बहुत अधिक है.

अब हम आपको लाइफस्टाइल में किए जा सकनेवाले 4 बदलावों के बारे में बताएंगे जो आर्थ्राइटिस न होने में मदद करेगी।

1) धूम्रपान न करें (Don’t Smoke) :

Dhumrapan na kare

Smoking causes Arthritis

स्मोकिंग से हमारे शरीर में सिस्टेमेटिक इन्फलेमेशन और ऑक्सीडेटिव तनाव बढ़ता है. ये स्मोकिंग से होने वाले गंभीर खतरों मे शामिल है जिसे कंपनियां भी नकार नहीं सकतीं.

स्मोकिंग हमारे शरीर के लिए वाकई बहुत नुकसानदेह है और यह हमें कई प्रकार की स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं से घेर सकती है.

2) सोडा ड्रिंक्स पीना कम करें (Avoid Drinking Soda) :

सोडा ड्रिंक्स या सोडा वाली कोल्ड ड्रिंक में मौजूद फॉस्फोरिक एसिड हमारी हड्डियों का Calcium सोख लेता है जिससे ऑस्टियोआर्थ्राइटिस होने का खतरा बढ़ जाता है.

Soda drinks ke nuksan

Soda Drinks increases chances of Arthritis

दिन में कई बार Soda drinks पीते रहना नशे की लत जितना ही बुरा है. दोनों ही शरीर को बहुत नुकसान पहुंचाते हैं.

पढ़ें > सोडा ड्रिंक्स पीने के 5 नुकसान जानिए 

3) शरीर में ओमेगा 6 व ओमेगा 3 का अनुपात बिगड़ना (Unbalanced Omega 6 to Omega 3 Ratio) :

ओमेगा 6 और ओमेगा 3 शरीर के अनेक फंक्शन्स को सही तरीके से चलते रहने के लिए ज़रूरी फैटी एसिड्स (essential fatty acids) हैं.

पहले के लोगों का खानपान ऐसा होता था कि हमारे भोजन में इनका अनुपात लगभग 1:1 का होता था लेकिन अब यह अनुपात बहुत अधिक (25:1) बिगड़ गया है.

Omega 6 capsules and arthritis

बहुत ज्यादा इन्फ्लेमेटरी ओमेगा 6 वाली खुराक लेने से हमारे शरीर के कई सिस्टम्स में इन्फ्लेमेशन (System-wide inflammation) हो जाता है. यह केवल आर्थ्राइटिस ही नहीं बल्कि आजकल दिख रही बहुत सी स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं का कारण बन गया है.

इससे बचने के लिए उन तेलों का प्रयोग कम कर दीजिए जिनमें ओमेगा 6 अधिक मात्रा में होता है.

ये तेल हैं :- कॉर्न ऑइल, सूरजमुखी और सोयाबीन का तेल. ज़रूरत से अधिक मात्रा में नट्स और बीजों (Dry-fruits and seeds) को भी खाने से बचना चाहिए.

– घास खानेवाले पशुओं से प्राप्त होनेवाले प्रोडक्ट्स में इन फैटी एसिड्स का अनुपात बेहतर होता है. सामन  (salmon) मछली से मिलनेवाले Omega 3 में बहुत गुण होते हैं और अनेक कंपनियां इसके कैप्सूल बेचती हैं.

4) ज्यादा कार्बोहाइड्रेट न खाएं (Avoid excess Carbohydrate Consumption) : 

बहुत अधिक कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन लेने से ब्लड शुगर बढ़ जाती है जिससे शरीर में इन्फ्लेमेटरी रिस्पांस (inflammatory response) पैदा हो जाता है.

अधिक कार्बोहाइड्रेट लेने से बचने के लिए हैल्थी फैट्स खाएं जैसे नारियल का तेल और चारा खानेवाले पशुओं के दूध से बना मक्खन/घी प्रयोग करना चाहिए.

Carbohydrate harms in hindi

ऐसा नहीं है कि बुढ़ापा आने तक गठिया (आर्थ्राइटिस) के खतरे को टाला नहीं जा सकता.

हकीकत तो ये है कि हमारे पूर्वजों को गठिया जैसी जोड़ संबंधित समस्याओं का सामना ज्यादा नहीं करना पड़ता था.

पिछले कुछ सालों में ही कम उम्र का आर्थ्राइटिस (Young people Arthritis) एक बड़ा खतरा बनकर उभरा है और इसका बड़ा कारण हमारी Lifestyle और खानपान में है.

इसलिए आज अपने युवा दिनों में अपनी अच्छी सेहत के लिए जो सही कदम आप उठायेंगे वही आपके बुढ़ापे को सुखद बनाएंगे. Source

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