सेल्फ-हेल्प किताबें क्यों पढनी चाहिए ?

By | 25/09/2015

slef help books benefits

 

Self-help किताबें क्यों पढ़ें ? Why read Self-help books ?

जैसे समस्याएँ सबके जीवन में आती जाती रहती हैं, Self-help किताबें भी हमारी आँखों के सामने से आती जाती रहती है. हम सभी ने कभी न कभी कोई सेल्फ हेल्प किताब जरुर पढ़ी या पलटी होगी.

मेरी राय में लोग दो तरह के होते है एक जो सेल्फ हेल्प बुक पढ़ते है और एक जो नहीं पढ़ते है.

नहीं पढने वाले तर्क देते है कि ये लेखक का अपना नजरिया है जरुरी नहीं मेरा भी वैसा हो ….क्या हम इस लेखक से कम है…. हम भी किताब लिख सकते है इत्यादि. दोनों तरह के लोग गलत नहीं है.

जीवन जीने का सबका अपना तरीका होता है. यहाँ कोई भी शोर्ट-कट/ ट्रिक्स नहीं चलता है, हाँ कुछ सिद्धांत ऐसे है जो की शाश्वत सत्य हैं भले ही उनका विवेकपूर्ण पालन करके देर हो जाये पर अंधेर नहीं होगा.

इसके अलावा इन Self-help books के पढने से हम अपनी समस्या को किसी दूसरे की नजर से देख पाते है. हमें कुछ छिपी हुई कमजोरियों और कमियों का पता चलता है.

ये भी पढ़ें   2016 में नेट सर्फिंग को शानदार बनायेंगे ये 21 Best Google Chrome Extension

इन किताबों का सबसे बड़ा फायदा एक Positive energy, नई आशा मिलती है, सोच को नया आयाम मिलता है.

Best self help books

कौन सी self-help किताब चुनें ? How to choose Self-Help Books ?

ये सवाल बड़ा लगता है क्योंकि ऑनलाइन शॉप और दुकानों में हजार किताबें है. ये किताबें अलग अलग तरह की होती है. कुछ किताबें किसी खास समस्या जैसे भय, निराशा के लिए होती है  कुछ संपूर्ण व्यक्तित्व के विकास को संबोधित करती है, कुछ भारतीय और कुछ विदेशी लेखको की होती है. किसी भी प्रसिद्द लेखक और Best-seller किताब  से शुरुआत कर सकते है.

सेल्फ हेल्प बुक कभी भी कहानी या नावेल जैसे नहीं पढना चाहिए. थोडा थोडा पढ़ें, सोचे, समझे, महसूस करें और सब से बड़ी बात पालन करें. बिना लाइफ में इन बातों को उतारे इनके पढने का कोई फायदा नहीं. पढेंगे फिर भूल जायेंगे, वही के वही रह जायेंगे और सोचेंगे किताब फालतू है, इस से अच्छी किताब लेनी चाहिए थी.

आप दस सेल्फ हेल्प बुक्स पढ़िए, पढने के बाद अंत में आप खुद सोचेंगे – यार ! घुमा फिर के सबमे मुख्यतः वही बातें कही गयी है बस अलग अलग क्रम और तरीके से कही गयी है.

सत्य कालजयी, शाश्वत और पूर्ण होता है.

ये भी पढ़ें   रॉक बैंड 'Coldplay' के नए गाने के विडियो में मुंबई और 'सोनम कपूर' नज़र आये

सच एक ही होता है कहने का तरीका अलग अलग हो सकता है. जैसे सारे धर्मो में कही बातें भी एक जैसी ही है. सच पर ऊँगली तब तक उठती है जब तक आप खुद महसूस न कर ले, देख न ले, आजमा न ले. कहते है सांच को आंच क्या.

जब सच से सामना होता हम लाजवाब हो जाते है. जैसे इस पृथ्वी का अस्तित्व सच है, हमारा अस्तित्व सच है, वैसे ही सच का भी अस्तित्व है. शर्त ये है की सच को जानने और महसूस करने की मेहनत तो उठानी पड़ेगी. ज्यादातर लोगो को इस से आसान लगता है सच पर ऊँगली उठाना. ऐसे लोगो का जीवन भी अधूरा रह जाता है.

Motivational books

सच का साक्षात्कार हमें नए आशा नयी ऊर्जा से भर देता है. यह अनुभव हमें गज़ब का आत्म बल देता है, जीवन को नई गति और दिशा देता है. दिन और रात जैसे सच भी प्रकृति का नियम है.

ये भी पढ़ें   बॉलीवुड और टीवी जगत के प्रतिभाशाली कलाकार मनोज पाहवा

सेल्फ हेल्प बुक्स में इन सिद्धांतो का वर्णन होता है जिन्हें सदियों से हर देश काल में सफल व्यतियों ने जाना , पालन किया और उनकी सत्यता को महसूस किया और निरंतर आगे बढ़ते चले गए.

जैसे बनाना कठिन है और बिगड़ना आसान , इन नियमो का पालन मुश्किल लग सकता है पर हमारी नजर हमेशा हमारे सुनहरे लक्ष्य पर होनी चाहिए फिर हम इन कष्टों को भी पार कर जायेंगे. बीमारी में कडवी गोली भी हमें अच्छे स्वास्थ्य के लिए खानी पड़ती है.

कोई भी अच्छी किताब लीजिये पढिये, पालन करिए और सच और सुख को जीवन में ले आइये.

जैसे ‘सत्यम शिव सुन्दरम’ का  मतलब होता है : जो सत्य है ,कल्याणकारी है, वही सुन्दर है.

यह भी देखें :

3 thoughts on “सेल्फ-हेल्प किताबें क्यों पढनी चाहिए ?

  1. Amul Sharma

    Very good post…..this post is very important for me………Self help books should read for motivation……this is like as medicine……..Read must……..Thanks for share this Article………

    Reply
  2. Pingback: बड़ों के पैर छूने के पीछे क्या प्राचीन विज्ञान छुपा हुआ है ?

  3. Pingback: Kahlil Gibran Poem ' Children ' का हिंदी अनुवाद

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *