चूहा और मैं : हरिशंकर परसाई जी का हास्य व्यंग | Chooha aur Mai

Chooha Aur Mai Vyang

चूहा और मैं : हरिशंकर परसाई  चाहता तो लेख का शीर्षक ‘मैं और चूहा’ रख सकता था। पर मेरा अहंकार इस चूहे ने नीचे कर दिया। जो मैं नहीं कर सकता, वह मेरे घर का यह चूहा कर लेता है। जो इस देश का सामान्‍य आदमी नहीं कर पाता, वह इस चूहे ने मेरे साथ … Read moreचूहा और मैं : हरिशंकर परसाई जी का हास्य व्यंग | Chooha aur Mai