सप्ताह में किस दिन व्रत रखने से क्या फल मिलता है

कौन सा व्रत रखना चाहिए ? 

हिन्दू धर्म में व्रत रखने की सदा से धार्मिक, आध्यात्मिक परम्परा रही है. व्रत रखने के मानसिक, शारीरिक और भौतिक फायदे होते हैं. सप्ताह में हर दिन अलग-अलग देवी-देवताओं की पूजा होती है. हर व्रत करने का अलग तरीका और महत्व है.

सोमवार व्रत : इस दिन का व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है. शिव व्रत की पूजा हमेशा गणेश जी की पूजा से शुरू होती है. भगवान गणेश का आशीर्वाद लेकर उनके माता-पिता शिव-पार्वती जी की पूजा अर्चना की जाती है. सोमवार व्रत से सभी इच्छाओं, मनोकामनाओं की पूर्ति संभव होती है. अक्सर सोमवार व्रत युवा अविवाहित लडकियाँ रखती है, जिससे उन्हें भगवान शिव समान उत्तम वर मिले. परन्तु सोमवार व्रत कोई भी व्यक्ति रख सकता है. सोमवार व्रत रखने के 3 प्रकार होते हैं, सोमवार व्रत, सोलह सोमवार व्रत, सोम प्रदोष व्रत. सोमवार व्रत की बेहतर सफलता के लिए इसे सावन महीने में शुक्ल पक्ष के सोमवार से शुरू करें. सोमवार व्रत के दिन अधिकाधिक ‘ॐ नमः शिवाय‘ का जाप करें. इस दिन सफ़ेद या नीले वस्त्र धारण करें.

मंगलवार व्रत : यह सम्भवतः सबसे ज्यादा रखे जानेवाला व्रत है. बताने की आवश्यकता नहीं है कि मंगलवार व्रत महावीर हनुमान जी को समर्पित होता है, जोकि भगवान श्री राम के परम भक्त हैं. मंगलवार व्रत के नियम कड़े माने जाते हैं. सामान्यतया पुरुषों द्वारा रखे जाने वाला यह व्रत जीवन में सफलता, आत्मविश्वास, शक्ति, रोग-मुक्ति, कर्ज से मुक्ति का निरंतर फल देता रहता है. ज्योतिष के अनुसार मंगलवार व्रत से मंगल और शनि ग्रह के बुरे असर खत्म होते हैं. मंगलवार व्रत को सम्भव हो तो लाल वस्त्र पहने. नमक न खाएं, मीठा भोजन, फल खाएं. हनुमान जी को चन्दन का तिलक लगायें, लाल फूल अर्पित करें. हनुमान चालीसा का पाठ करें और ‘राम-राम‘ का 108 बार जाप करें.

बुधवार व्रत : यह व्रत बुध ग्रह और भगवान विट्ठलनाथ (विष्णुअवतार) को समर्पित होता है. कोई भी नया उद्यम, पढाई-लिखाई, सम्वाद से सम्बन्धित गतिविधि शुरू करने के लिए यह उत्तम दिन माना गया है. इस दिन भगवान विष्णु, भगवान कृष्ण की पूजा-आराधना होती है. बुधवार व्रत से जीवन में सामंजस्य आता है. विवाहित जोड़ा साथ में यह व्रत रखे तो आनंदमय वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद मिलता है. इस व्रत के दिन हरे रंग के वस्त्र धारण करें. इस दिन बुधव्रत कथा का पाठ करें और भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करें. इस व्रत के प्रभाव से सभी पारिवारिक झगड़ों और जीवन के क्लेश, कष्ट से मुक्ति मिलती है.

गुरुवार व्रत : इस दिन भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी, बृहस्पति ग्रह की पूजा होती है. यह व्रत रखने से धन-धान्य की प्राप्ति, सुख और मानसिक शांति मिलती है. जिनकी कुंडली में बृहस्पति ग्रह कमजोर हो उन्हें यह व्रत अवश्य करना चाहिए. किसी भी महीने में शुक्ल पक्ष के पहले गुरुवार से यह व्रत शुरू करें. इस दिन पीले वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु और बृहस्पति ग्रह को पीले फूल, पीला प्रसाद चढ़ाएं, चन्दन का तिलक लगाये. व्रत रखने वाले को चाहिए कि वो बृहस्पति व्रत कथा का पाठ करे, पीली वस्तु का दान करे और बिना नमक का भोजन करे.

शुक्रवार व्रत : यह व्रत माँ दुर्गा, माँ महालक्ष्मी जी, शुक्र ग्रह को समर्पित होता है. कुंडली में कमजोर शुक्र ग्रह होने पर यह व्रत जरुर रखें. सोलह शुक्रवार व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने पर मनोकामना की पूर्ति, सौभाग्य, शारीरिक-मानसिक शक्ति में वृद्धि होती है. इस दिन सफ़ेद या नीले वस्त्र पहने. सोलह शुक्रवार व्रत की पूर्णता के दिन 7 अथवा 11 लड़कियों का कन्यापूजन करें, भोजन कराएँ और उपहार दें. माँ दुर्गा आपका कल्याण करेंगी.

शनिवार व्रत : शनि ग्रह के बुरे असर से प्रभावित लोग यह व्रत अवश्य रखते हैं. इस व्रत के दिन काली वस्तु जैसे काला कपड़ा, काला चना, उर्द की दाल, काला तिल दान करें. लोहे के बर्तन में एक सिक्का डालकर फिर सरसों का तेल डालें. तेल में अपनी परछाई देखकर इसे दान कर दें. शनिवार व्रत के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करें और पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दिया जलायें. इस दिन भगवान श्री हनुमान की पूजा, हनुमान चालीसा का पाठ करने से भी शनि के दुष्प्रभाव खत्म होते हैं. शनिदेव हनुमान जी के भक्तों को कष्ट नहीं पहुंचाते हैं. शनिवार व्रत रखने वाले दिनभर में एक बार भोजन करें. शाम को पूजा के बाद भोजन करें, कोशिश करें कि कोई भोज्य पदार्थ काले रंग का हो जैसे काला तिल, काला चना, सरसों आदि. इस दिन नीला वस्त्र पहनें, काला नहीं. शनिवार व्रत से धन-समस्या का समाधान, इंजीनियरिंग, फैक्ट्री व्यवसाय में सफलता, कर्ज और रोग से मुक्ति प्राप्त होती है.

रविवार व्रत : इस व्रत के दिन भगवान सूर्य की पूजा होती है. भगवान सूर्य व्यक्ति की इच्छा पूरी करते हैं, शत्रु पर विजय देते हैं. सूर्यदेव उसे समाज में ऊँचे, सम्मानित स्तर पर पहुंचाते हैं, प्रसिद्धी दिलाते हैं. इस व्रत से व्यक्ति का आभामंडल शुद्ध होता है और अगर कोई रोग या स्किन समस्या हो तो वह भी दूर होती है. इस दिन सुबह जल्दी स्नान करके ताम्बे के पात्र में जल लेकर उसमें रोली, चन्दन मिलाकर पूर्व दिशा में सूर्य के समक्ष खड़े होकर जल अर्पित करें. जल अर्पण करते समय कम से कम 3 बार गायत्री मंत्र का जाप करें. खट्टा, तैलीय, तला-भुना न खाएं बल्कि मीठा भोजन करें. इस दिन लाल रंग के कपड़े पहनें.

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