khalil gibran on children

खलील ज़िब्रान की प्रसिद्द कविता बच्चे | Kahlil gibran poem children in hindi

खलील जिब्रान की कविता : Khalil Gibran [जनवरी 6 ,1883 – अप्रैल 10, 1931] 

एक प्रसिद्ध लेबनानी कवि, लेखक, कलाकार थे . 1923 में उनकी अंग्रेजी किताब द प्रोफेट (The Prophet) आई, जिसकी वजह से इन्हें बेशुमार शोहरत मिली. खलील जिब्रान दुनिया में  शेक्सपियर और लाओ-त्सु के बाद तीसरे नंबर के सबसे ज्यादा प्रसिद्ध कवि माने जाते है. यह कविता “ बच्चे” उनकी कविता ‘Children’ का हिंदी अनुवाद है जो की मुझे इन्टरनेट से मिला है, अनुवादक का नाम ध्यान नहीं आ रहा है क्षमा करें .

Kahlil gibran poem hindi
खलील ज़िब्रान

                                                                      “बच्चे “

तुम्हारे बच्चे तुम्हारे बच्चे नहीं हैं
वह तो जीवन की अपनी आकाँक्षा के बेटे बेटियाँ हैं
वह तुम्हारे द्वारा आते हैं लेकिन तुमसे नहीं, 

वह तुम्हारे पास रहते हैं लेकिन तुम्हारे नहीं.

तुम उन्हें अपना प्यार दे सकते हो लेकिन अपनी सोच नहीं
क्योंकि उनकी अपनी सोच होती है
तुम उनके शरीरों को घर दे सकते हो, आत्माओं को नहीं
क्योंकि उनकी आत्माएँ आने वाले कल के घरों में रहती हैं
जहाँ तुम नहीं जा सकते, सपनों में भी नहीं.
तुम उनके जैसा बनने की कोशिश कर सकते हो,
पर उन्हें अपने जैसा नहीं बना सकते,

क्योंकि जिन्दगी पीछे नहीं जाती, न ही बीते कल से मिलती है.

तुम वह कमान हो जिससे तुम्हारे बच्चे
जीवित तीरों की तरह छूट कर निकलते हैं
तीर चलाने वाला निशाना साधता है एक असीमित राह पर
और अपनी शक्ति से तुम्हें जहाँ चाहे उधर मोड़ देता है
ताकि उसका तीर तेज़ी से दूर जाये.
स्वयं को उस तीरन्दाज़ की मर्ज़ी पर खुशी से मुड़ने दो,
क्योंकि वह उड़ने वाले तीर से प्यार करता है
और स्थिर कमान को भी चाहता है.