जीवन का रहस्य क्या है – एक किसान की मोटिवेशनल कहानी | Jeevan ka Rahasya

जीवन का रहस्य क्या है – एक किसान की मोटिवेशनल कहानी | Jeevan ka Rahasya

जीवन का रहस्य – एक किसान की कहानी :

गाँव में रहने वाले एक किसान का एकमात्र घोड़ा एक दिन भाग खड़ा हुआ. आस-पड़ोस वाले दुःख जताने के लिए उसके पास आये और बोले –तुम्हारी खेती तो गयी, बिना घोड़े के हल कैसे चलाओगे ? ये तो बहुत बुरा हुआ !

किसान बोला – शायद बुरा हुआ या शायद अच्छा हुआ !

अगले सुबह किसान ने देखा उसका घोड़ा वापस आ गया और उसके साथ 6 जंगली घोड़े भी आ गये. पड़ोस वाले उसे बधाइयाँ देने पहुँच गये – ये तो कमाल हो गया, अब तो तुम्हारे पास कई घोड़े हो गये, तुम तो बड़े आदमी बन गए. घोड़े का जाना यक़ीनन तुम्हारे लिए अच्छी किस्मत लेकर आया.

किसान ने जवाब दिया – शायद हाँ, शायद नहीं  !

Jeevan ka rahasya ek kahani

अगले दिन किसान के लड़के ने एक जंगली घोड़े को पालतू बनाने के लिए, उसकी पीठपर चढ़कर बैठने की कोशिश की.  घोडा बड़ा अड़ियल निकला, उसने किसान को लड़के को झटककर पीठ से गिरा दिया. गिरने से किसान के लडके की पैर की हड्डी टूट गयी. ये देखकर फिर पड़ोस वाले किसान के पास अफ़सोस जताने आ गये – व्यर्थ में खर्चा बढ़ गया तुम्हारा, अब तुम्हारे काम में हाथ बँटाने वाला भी कम हो गया. तुम्हारा तो बड़ा ही बुरा समय चल रहा है !

किसान उन्हें देखा और बोला – शायद हाँ, शायद नहीं !

एक दिन बाद अचानक देश में युद्ध की घोषणा हो गयी. आर्मी के ऑफिसर गाँव-गाँव जाकर युवा लड़को को जबरदस्ती सेना में भर्ती करने लगे. किसान के लड़के का पैर टूटे होने की वजह से बच गया.

आर्मी ऑफिसर के जाते ही पड़ोसी किसान को बधाई देने टूट पड़े – भाई तुम तो बड़े किस्मत वाले हो ! युद्ध में जाने वाले की जिन्दा वापस आने की सम्भावना न के बराबर होती है. जो लड़के गये हैं, क्या पता कोई भी वापस न आ पाए. नसीब तुमपर मेहरबान है.

किसान ने फिर वही जवाब दिया – शायद हाँ, शायद नहीं

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झूठ बोलना पाप है पर झूठ बोलकर किसी की जान बचाना गलत नहीं है. किसी ने आपको धोखा दिया तो आप लोगों पर भरोसा करना छोड़ देते हैं, पर हर किसी पे अविश्वास करने से जीवन नही चल सकता. भ्रष्ट लोगो को देखकर लगता है, अच्छाई का तो जमाना ही नहीं, फिर जब एक दिन भ्रष्ट व्यक्ति को जेल हो जाती है तो हमारी आँखें खुलती है.

यही जीवन का रहस्य है. आज जो सही लगता है, कल गलत लगने लगता है. आज तो बुरा हुआ, कल हमे उसके फायदे नजर आने लगते हैं. जीवन की बढती हुई गाड़ी रोज हमे नई सीख दे जाती है. क्या सही है, क्या गलत है, यहाँ कोई पक्का फार्मूला नहीं है. इसीलिए हमारे पूर्वज, ज्ञान ग्रन्थ कह गए हैं – विवेक से काम लो, देखो ! सोचो ! समझो ! फिर निर्णय लो. जड़ मत बनो !

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