बृहदीस्वरर मंदिर, तमिलनाडु : प्राचीन भारत के इस अजूबे से जुड़े 9 आश्चर्यजनक तथ्य | Brihadeeswarar Temple facts

1) 1000 वर्ष पुराना बृहदीस्वरर शिव मंदिर तमिलनाडु प्रदेश के तंजावुर में स्थित है. भारत के सबसे बड़े मंदिरों में से एक बृहदीस्वरर मंदिर का निर्माण चोल सम्राट राजा राजा चोल प्रथम ने स्वप्न में दैवीय प्रेरणा प्राप्त होनेपर करवाया था. बृहदीस्वरर मंदिर को UNESCO World Heritage Site लिस्ट में स्थान दिया गया है.               Brihadeeswarar Temple Top angle view

2) बृहदीस्वरर मंदिर को बृहदेश्वर मंदिर और राजराजेस्वर मन्दिर राजराजेस्वरम नाम से भी जाना जाता है. यह दुनिया का सबसे ऊँचा मन्दिर (मुख्य शिखर की ऊंचाई 61 मीटर )है. इसके शिखर पर लगे हुए पत्थर कुम्बम का वजन 80,000 किलो है. यह मंदिर 16 फीट ऊँचे ठोस चबूतरे पर बना हुआ है.

3) मंदिर के शिखर तक 80 टन वजनी पत्थर कैसे ले जाया गया, यह आज तक एक रहस्य बना हुआ है. ऐसा माना जाता है कि 1.6 किलोमीटर लम्बा एक रैंप बनाया गया था, जिसपर इंच दर इंच खिसकाते हुए इसे मंदिर के शिखर पर ले जाकर लगाया गया.                    Brihadeeswarar Temple Kumbam weight

4) मुख्य मंदिर के अंदर 12 फीट ऊँचा शिवलिंग स्थापित है. मंदिर के प्रवेशद्वार के पास स्थापित नंदी की विशाल मूर्ति भी एक अद्भुत आश्चर्य है. 20,000 किलो वजनी नंदी की यह मूर्ति 16 फीट लम्बी और 13 फीट ऊँची है, जिसे एक ही पत्थर को तराश कर बनाया गया है.

5) पूरा बृहदीस्वरर मंदिर कठोर ग्रेनाईट व सैंडस्टोन की चट्टानों से बनाया गया है. ग्रेनाईट पत्थर का सबसे समीपवर्ती स्रोत मंदिर से 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. इतनी लम्बी दूरी से इतनी बड़ी मात्रा में और विशाल आकार के पत्थरों को मंदिर निर्माण स्थल तक कैसे लाया गया, इसका जवाब किसी के पास नहीं है. मंदिर के आस-पास कोई पहाड़ भी नहीं है, जिससे पत्थर लिए जाने की सम्भावना हो.                                              brihadeswara lingam height

6) बृहदीस्वरर मंदिर को बनाने में 1,30,000 टन पत्थर का प्रयोग हुआ है. इतने विशाल मंदिर को बनाने में सिर्फ रिकॉर्ड 7 साल लगे थे. यह मंदिर 6 बड़े भूकम्पों का सामना कर चुका है, पर इसे किसी भी प्रकार का नुक्सान नहीं हुआ.

7) कहा जाता है कि मंदिर में जलने वाले दीयों के लिए घी की अबाधित पूर्ति के हेतु सम्राट राजा राजा ने मंदिर को 4000 गायें, 7000 बकरियाँ, 30 भैंसे व 2500 एकड़ जमीन दान की थी. मंदिर व्यवस्था सुचारू रूप से चलाने के लिए 192 कर्मचारी रखे गये थे.   Brihadeeswarar Temple Nandi height

8) ग्रेनाइट की चट्टानें इतनी कठोर होती हैं कि उन्हें कटाने, छेद करने के लिए खास हीरे के टुकड़े लगे औजार का प्रयोग करना पड़ता है. उस कालखंड में बिना आधुनिक औजारों के मंदिर में लगी चट्टानों को कैसे तराश कर महीन, कलात्मक मूर्तियां बनाई गयी होंगी, यह एक आश्चर्य का विषय है.

9) बृहदेश्वर मंदिर में उत्कीर्ण लेखों के अनुसार मंदिर के मुख्य वास्तुविद कुंजर मल्लन राजा राजा पेरुन्थचन थे, जिनके खानदान के लोग आज भी वास्तुशास्त्र, आर्किटेक्चर का कार्य करते हैं.
Brihadeeswarar Temple carvings on wall

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