Indian desi dog breed

देसी कुत्ता : इंडिया में जीरो, पर विदेशों में हीरो बन रहे हैं देसी नस्ल के कुत्ते | Desi Kutta

देसी कुत्ता :

भारत की सडकों, गली-मुहल्लों में आवारा घूमते हुए देसी कुत्तों की बड़ी दुर्गति होती है. ये कुत्ते यहाँ-वहाँ कूड़े में मुंह मारते, घरों के फेंके बचे-खुचे भोज्य पदार्थ से अपनी जिंदगी काटते हैं. कभी किसी गाड़ी के नीचे आकर तो कभी लोगों के भद्दे मजाक का शिकार होकर कितने ही देसी कुत्ते मारे जाते हैं. हालाँकि कई शहरों में बहुत से ऐसे NGO सामने आये हैं, जिन्होंने इन देसी नस्ल के व अन्य आवारा कुत्तों के बचाव के लिए कई कदम उठायें हैं. पर फिर भी इस क्षेत्र में काफी सुधार की गुंजाईश है.

देसी नस्ल के कुत्तों की खासियतें :

हाल के कुछ वर्षों में कई विदेशी लोगों ने भारतीय देसी कुत्तों को पालने में रूचि दिखाई है. दुनिया के फ़्रांस, अमेरिका, कनाडा, नीदरलैंड, जर्मनी जैसे कई देशों के लोग भारत से वापस लौटते समय देसी कुत्ते अडॉप्ट कर लेते हैं.

why indian desi dogs are better

– भारतीय कुत्तों की देसी नस्ल बड़ी आसानी से किसी भी स्थान, परिवेश में ढल जाती हैं.

देसी नस्ल के ये कुत्ते समझदार, मजबूत और सक्रिय होते हैं.

– देसी कुत्तों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़िया होती है और इन्हें ज्यादा देखरेख की जरुरत भी नही पड़ती.

विदेशों की तुलना में भारत में कुत्ता पालने का कल्चर काफी कम है. यहाँ शहरों में ज्यादातर अमीर लोग ही कुत्ते पालते हैं, जिनके लिए ये शौक के साथ ही ये घर की सेफ्टी का उपाय भी होते हैं. टीवी, एड जैसे मीडिया माध्यमों की देखा-देखी हम इंडियन एक से बढ़कर एक महंगी ब्रीड के कुत्ते लाते हैं, जो स्टेटस सिंबल बन गये हैं. जमीनी हकीकत जाने बिना लोग ये महंगे कुत्ते पाल तो लेते हैं, पर इन्हें पालना इतना आसान नहीं होता.

विदेशी नस्ल के कुत्तों की समस्याएँ :

– ये महंगे विदेशी कुत्ते भारतीय मौसम के लिए उपयुक्त नहीं होते. तापमान परिवर्तन से इन्हें कई स्वास्थ्य समस्याएँ हो जाती हैं. इन्हें बराबर टीकाकरण (वैक्सीसनेशन) और चेकअप की जरुरत होती है. इन्हें अक्सर ही पेट, साँस, त्वचा सम्बन्धी समस्याएँ होती रहती हैं. विदेशी कुत्तों की ब्रीडिंग में भी कई समस्याएँ होती हैं.

– असल में कुत्तों की ज्यादातर विदेशी नस्लें शुद्ध नस्ल के न होकर कुत्तों की दो-तीन अलग-अलग नस्ल के संकर (हाइब्रिड) होते हैं. हाइब्रिड नस्ल के ये कुत्ते देखने में भले ही बड़े प्यारे लगें मगर इनमें कई जन्मजात स्वास्थ्य समस्याएँ होती हैं. शौक-शौक में ख़रीदे गए ऐसे कुत्तों को पालने वाले लोग बाद में परेशान होते हैं.

Foreign dog breeds
1. Siberian huskies  2. Pug  3. Bulldog  4. Saint Bernard

– घने बालों वाले Siberian Huskies ठंडे देशों की नस्ल है, भारत जैसे गर्म-उमस भरे मौसम के लिए नहीं. Saint Bernard नस्ल के भारी कुत्ते को दिन में कम से कम 3 बार आपको घुमाना पड़ेगा नहीं तो उसकी सेहत ख़राब होनी ही है. वोडाफोन के एड वाला छोटा कुत्ता Pug और Bulldog नस्ल के कुत्ते को ओवरहीटिंग, स्किन, स्वांस व आँखों की समस्या होती है, जिससे अक्सर उनकी असामयिक मृत्यु हो जाती है.

सिर्फ अपने मनोरंजन, सजावट और स्टेटस सिंबल के लिए ये विदेशी कुत्ते पालना क्या उन पर अत्याचार नहीं है. इन्ही सब बातों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने साल 2016 में विदेशी नस्ल के कुत्तों के इम्पोर्ट पर रोक लगा दी है.

केवल डिफेन्स, आर्म्ड एंड पुलिस फोर्सेज व कुछ अन्य सरकारी संस्थाओं को ही फॉरेन डॉग ब्रीड्स के इम्पोर्ट की अनुमति दी गयी है. रोक भले ही लगा दी गयी हो पर अभी भी चोरी-छुपे इनकी कमर्शियल ब्रीडिंग और गलत तरीके से इम्पोर्ट चालू है क्योंकि लोग तो डिमांड करते ही हैं.

जब जब किसी भारतीय देसी वस्तु या व्यक्ति की विदेशों में महत्ता समझी जाती है, तभी हम देसी लोगों में उस चीज़ के प्रति देशभक्ति, गर्व और आस्था की भावना उमड़ती है. चाहे भारतीय योग-दर्शन, दोने-पत्तल का प्रयोग, देसी जड़ी-बूटियां का महत्व हो या बासमती चावल, हल्दी के पेटेंट की बात. हम उम्मीद करते हैं कि भावुक न होकर सही, विज्ञान और नैतिकता के नजरिये से ही हम लोग जीव-जगत के इस प्यारे देसी दोस्त को अपनाना पसंद करेंगे.

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